जमालपुर इरिमी में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार; हाइड्रोजन ट्रेन, वंदे भारत TCMS और आधुनिक कपलर तकनीक पर मंथन
IRIMEE Jamalpur Railway Seminar: जमालपुर के इरिमी में 'इंजीनियरिंग रोलिंग स्टॉक टेक्नोलॉजी' पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित हुआ। इसमें ...और पढ़ें

IRIMEE Jamalpur Railway Seminar: जमालपुर स्थित इरिमी में 'इंजीनियरिंग रोलिंग स्टॉक टेक्नोलॉजी' सेमिनार के दौरान तकनीकी प्रस्तुति देते विशेषज्ञ व उपस्थित रेल अधिकारी
HighLights
वंदे भारत TCMS और आधुनिक CBC कपलर पर चर्चा।
हाइड्रोजन ट्रेनसेट को भविष्य का हरित ईंधन बताया।
तकनीकी दक्षता से परिचालन व्यवधान कम करने पर जोर।
संवाद सहयोगी, जमालपुर (मुंगेर)। IRIMEE Jamalpur Railway Seminar: भारतीय रेल के आधुनिकीकरण के दौर में ट्रेनों की गति बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें अधिक सुरक्षित, ऊर्जा दक्ष और परिचालन की दृष्टि से विश्वसनीय बनाना रेलवे की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए केवल हाई-स्पीड ट्रेनसेट का निर्माण ही काफी नहीं है, बल्कि उन्नत ब्रेकिंग सिस्टम, आधुनिक नियंत्रण तकनीक और रखरखाव से जुड़े रेलकर्मियों की तकनीकी दक्षता में निरंतर सुधार भी उतना ही अनिवार्य है।
जमालपुर स्थित देश के प्रतिष्ठित भारतीय रेल यांत्रिक एवं विद्युत अभियंत्रण संस्थान (इरिमी) में आयोजित 'इंजीनियरिंग रोलिंग स्टॉक टेक्नोलॉजी' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में यह मुख्य निष्कर्ष सामने आया। दो दिनों तक चले इस तकनीकी समागम में देश भर से जुटे शीर्ष रेल अभियंताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और वैज्ञानिकों ने भविष्य की रेल प्रणालियों के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया।
वंदे भारत TCMS और आधुनिक सीबीसी कपलर पर तकनीक मंथन
सेमिनार के पहले दिन अगले दशक में रेलगाड़ियों के नए डिजाइन, ट्रेनसेट और उभरती इंजीनियरिंग तकनीकों पर विचार विमर्श हुआ। वहीं, दूसरे दिन उद्योग जगत की दिग्गज कंपनियों ने अपनी आधुनिक प्रणालियों का प्रेजेंटेशन दिया।
मेधा (Medha) कंपनी के इंजीनियरों ने वंदे भारत एक्सप्रेस की अत्याधुनिक 'ट्रेन कंट्रोल एंड मैनेजमेंट सिस्टम' (TCMS) की आंतरिक कार्यप्रणाली और रियल-टाइम फॉल्ट डिटेक्शन पर जानकारी साझा की। उधर, वेबटेक (Webtec) के प्रतिनिधियों ने आधुनिक सीबीसी (CBC) कपलर की बनावट, कपलर डायनेमिक्स और उन्नत ब्रेकिंग सिस्टम की बारीकियां समझाईं, जिससे तेज रफ्तार के दौरान भी यात्रियों को झटके (जर्क) न लगें और संरक्षा के उच्चतम मानक सुनिश्चित हो सकें।
तकनीकी रखरखाव से थमेंगे परिचालन व्यवधान
विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि आधुनिक रोलिंग स्टॉक तकनीकों की सटीक समझ का सीधा असर आम रेल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा पर पड़ता है। ट्रेन के ब्रेकिंग मैकेनिज्म, बोगी डिजाइन और बफर प्रणालियों के वैज्ञानिक रख-रखाव से यांत्रिक दोषों को रूट पर निकलने से पहले ही यार्ड में दुरुस्त किया जा सकता है।
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समय पर तकनीकी खामियों की पहचान और त्वरित निवारण से ट्रेनों के बेवजह लेट होने या मार्ग में रुकने जैसे परिचालन व्यवधानों में भारी कमी लाई जा सकती है, जिससे भारतीय रेल की समयबद्धता (पंक्चुअलिटी) और साख और मजबूत होगी।
हाइड्रोजन ट्रेनसेट: भविष्य का हरित और स्वच्छ ईंधन
इरिमी के महानिदेशक अनिमेष कुमार सिन्हा ने शून्य कार्बन उत्सर्जन की दिशा में हाइड्रोजन ईंधन को भविष्य की रेल ऊर्जा के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन आधारित ट्रेनसेट पारंपरिक जीवाश्म ईंधन का बेहतरीन विकल्प बन सकते हैं। हालांकि, इसके वाणिज्यिक और व्यापक परिचालन के लिए मजबूत आधारभूत ढांचे, सुरक्षित तकनीकी परीक्षण और लागत नियंत्रण जैसे पहलुओं पर चरणबद्ध कार्य करना होगा।
सत्र को संबोधित करते हुए पूर्व मध्य रेलवे (ECR) के महाप्रबंधक डिंपी गर्ग ने कहा कि आधुनिक तकनीक तभी प्रभावी हो सकती है जब परिचालन से जुड़े रेल अधिकारियों और तकनीकी संवर्ग की क्षमता का सतत उन्नयन (अपस्किलिंग) किया जाए। पूर्व रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक अरुण अरोड़ा ने उभरती रेल इंजीनियरिंग पर प्रकाश डाला।
सेमिनार में तकनीकी विषयों के अलावा अधिकारियों की मानसिक सजगता के लिए संकायाध्यक्ष प्रेम प्रकाश और स्वामी परमतेज ने तनाव प्रबंधन पर विशेष विचार रखे। अंत में संकायाध्यक्ष प्रेम प्रकाश के धन्यवाद ज्ञापन के साथ सेमिनार का समापन हुआ।
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