मुंगेर में सड़क के नाम पर सिर्फ बिछा दिए गए पत्थर, अधूरा निर्माण छोड़ ठेकेदार गायब
मुंगेर के टेटिया बंबर प्रखंड में लश्करा और लोनाजी गांव के बीच सड़क निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया है। ठेकेदार ...और पढ़ें

मुंगेर में सड़क के नाम पर सिर्फ बिछा दिए गए पत्थर
HighLights
लश्करा-लोनाजी गांव के बीच सड़क निर्माण वर्षों से अधूरा पड़ा।
ठेकेदार ने पत्थर-मौरंग गिराकर काम बीच में ही छोड़ा।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री की पत्नी से पक्की सड़क की मांग की।
संवाद सहयोगी, टेटिया बंबर (मुंगेर)। विकास के दावों के बीच टेटिया बंबर प्रखंड के लश्करा और लोनाजी गांव के बीच एक सड़क ऐसी भी है, जहां पक्की राह का इंतजार सालों से खत्म नहीं हो रहा।
सड़क बनाने के लिए पत्थर और मौरंग गिराए गए, ग्रामीणों को उम्मीद जगी कि अब आवागमन आसान होगा। लेकिन समय बीतता गया और सड़क निर्माण अधूरा ही रह गया। नतीजा यह है कि आज भी ग्रामीण कच्चे रास्ते से आने-जाने को मजबूर हैं।
नोनाजी गांव के मिथुन कुमार और अरविंद कुमार बताते हैं कि आजादी के कई दशक बाद भी गांव को पक्की सड़क नसीब नहीं हुई। लश्करा जाने के लिए ग्रामीणों को सीधे रास्ते के बजाय करीब चार किलोमीटर घूमकर पक्की सड़क पकड़नी पड़ती है। इससे समय और मेहनत दोनों बर्बाद होते हैं। बारिश के दिनों में कच्चा रास्ता और मुश्किल हो जाता है। ऐसे में ग्रामीणों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है।
निर्माण की उम्मीद पर फिरा पानी
ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण के लिए संवेदक ने पत्थर और मौरंग गिरवाए थे। इससे लगा था कि जल्द ही कच्चे रास्ते से मुक्ति मिल जाएगी। लेकिन कई वर्ष बीतने के बाद भी निर्माण पूरा नहीं हुआ। सड़क किनारे पड़े निर्माण सामग्री के अवशेष अब अधूरे काम की याद दिला रहे हैं।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब सामग्री गिराई गई तो सड़क बनाने का काम आखिर क्यों रोक दिया गया। लगातार परेशानी झेल रहे ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पत्नी ममता चौधरी से सड़क का पक्कीकरण कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि गांव को विकास से जोड़ने की बुनियादी जरूरत है। अब देखना है कि वर्षों से पक्की सड़क की बाट जोह रहे ग्रामीणों की आवाज जिम्मेदारों तक पहुंचती है या उनकी परेशानी यूं ही बनी रहती है।
