संवाद सूत्र, संग्रामपुर (मुंगेर): बच्चियों को शिक्षित करने के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चल रही है। इसका सकारात्मक परिणाम भी दिख रहा है। बालिकाएं सफलता का परचम लहरा रही है। बावजूद कुछ कमियों के कारण शिक्षा व्यवस्था का स्तर दिन प्रतिदिन गिरता जा रहा है। कहीं विद्यालय में छात्र- छात्राएं है तो शिक्षक व भवन नहीं, तो कहीं छात्राएं हैं तो ना तो प्रयाप्त संख्या में शिक्षक और ना तो छात्राओं के लिए बैठने की जगह। कुछ ऐसा ही मामला संग्रामपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित श्रीबुध्दूराम टिबरेवाल परियोजना बालिका प्लस टू विद्यालय में देखा जा सकता है। जहां छात्राओं की संख्या के अनुरूप न तो शिक्षक हैं और ना ही छात्राओं को बैठने के लिए जगह। लाखों के कंप्यूटर शोभा की वस्तु बनकर वर्षों से धूल फांक रहे है। जिम में रखे समान में जंक लग रहा है। जर्जर भवन रहने के कारण छात्राओं को दुर्घटना होना का भय सताते रहता है। जर्जर भवन निर्माण की मांग छात्राएं और अभिभावक बराबर कर रहे है, लेकिन इस और न जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे है न ही वरीय पदाधिकारी, जिससे छात्राओं और अभिभावकों में आक्रोश दिखने लगा है।

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प्रखंड का इकलौता है कन्या विद्यालय

श्री बुध्दूराम टिबरेवाल परियोजना कन्या प्लस टू उच्च विद्यालय प्रखंड का इकलौता विद्यालय है।इस विद्यालय में संग्रामपुर प्रखंड के अलावा सीमावर्ती बेलहर प्रखंड क्षेत्र की छात्राएं भी शिक्षा ग्रहण करने आती है। इस विद्यालय में 943 छात्राएं नामांकित है। जिन्हें पढ़ाने के लिए प्रभारी प्रधानाध्यापक सहित सात शिक्षक पदस्थापित हैं। छात्राओं की संख्या की ²ष्टि से बहुत कम है। ------------------------

जर्जर है विद्यालय भवन

लगभग 40 वर्ष पूर्व इस विद्यालय की स्थापना बिहार शिक्षा परियोजना के माध्यम की गई थी। स्थापना काल में निर्माण किए गए भवन की दीवारों में जगह जगह दरारें पड़ गई है । छत भी जर्जर हो चुकी है। उसी जर्जर भवन में दहशत में पढ़ाई करने को छात्राएं विवश हैं। आलम यह है कि विद्यालय की छत का प्लास्टर टूटने व छत का सरिया बाहर आ जाने से छात्राओं व शिक्षक में भय का माहौल बना रहता है।

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कंप्यूटर आने के बाद चला नहीं

वर्तमान समय में कंप्यूटर शिक्षा का बहुत बड़ा महत्व है। छात्राओं को कंप्यूटर शिक्षा के लिए लगभग एक दशक पूर्व लाखों रुपये की लागत से कंप्यूटर विद्यालय को बिहार शिक्षा परियोजना के माध्यम से उपलब्ध कराया गया था। विभागीय उदासीनता की वजह से छात्राएं कंप्यूटर शिक्षा से वंचित तो है ही, उचित रखरखाव नहीं होने से धूल फांक रहा है। -------------------------------

प्रभारी प्रधानाध्यापक की सुने

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक निरंजन प्रसाद सिंह ने बताया कि विद्यालय में 943 छात्राएं नामांकित है। 300 छात्राओं के बैठने के लिए ही जगह है, जिस कारण कभी बरामदे पर, कभी प्रयोगशाला तो कभी कार्यालय में ही छात्राओं को बैठाना मजबूरी होती है। उन्होंने जर्जर विद्यालय भवन के बारे में बताया कि विभागीय अधिकारियों को कई बार लिखित रूप से विद्यालय भवन निर्माण के लिए आग्रह किया है।ना तो नए भवन के निर्माण की और ना ही मरम्मति कराने की स्वीकृति प्रदान की गई है। जर्जर भवन के कारण मन में दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।

Edited By: Jagran