मधुबनी। कमला नदी में उफान आने का दौर शुरू हो चुका है। स्थानीय लोगों पर संभावित बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। तटबंध किनारे बसे लोग दहशत में हैं। तटबंध की मरम्मत कार्य पर सबकी निगाहें टिकी हुई है। बाढ़ से बचाव की दिशा में विभाग द्वारा किए गए कार्य को स्थानीय लोग नाकाफी बता रहे हैं। प्रखंड क्षेत्र के खैरी मुसहरी के निकट हर वर्ष बाढ़ के समय में स्थिति भयावह बन जाती है।

पिछले वर्ष वहां पर तटबंध को टूटते-टूटते बचाया जा सका था। तटबंध रिसाव स्थल पर ग्रामीणों के गुस्से का शिकार स्थानीय थानाध्यक्ष को होना पड़ा था। गुस्से में किसी ने उनके सर पर ईंट मार दी थी। दूसरी ओर जियो बैग में बालू की जगह मिट्टी डालकर कार्य किया जा रहा है।

जानकार बताते हैं कि बालू की जगह मिट्टी डालने पर जियो बैग में चूहे लग जाते हैं और उससे रिसाव होने लगता है। प्रखंड क्षेत्र में पड़ने वाले कमला पूर्वी तटबंध के 62.05 से लेकर 77वें किलोमीटर तक की तटबंध में रे¨जग एवं तटबंध के दोनों किनारे में सुरक्षात्मक कार्य किया गया है। जबकि फटकी चौक से उत्तर लगभग चार सौ मीटर में ईंट सो¨लग कार्य एवं जियो क्रे¨टग कार्य बांकी है।

वहीं बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल झंझारपुर एक के कार्यपालक अभियंता नागेन्द्र राय ने बताया कि इस बार तटबंध का मरम्मति कार्य काफी मजबूती से किया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग हर एक स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। बाढ़ से तटबंध टूटने की दूर-दूर तक संभावना नहीं है।

Posted By: Jagran

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