मधुबनी। जिला मुख्यालय स्थित बाबू साहेब चौक वासी व वाट्सन प्लस टू विद्यालय के संगीत शिक्षक डॉ. शिव नारायण मिश्र शास्त्रीय संगीत मर्मज्ञ हैं। पारिवारिक संगीत परंपरा के ध्वजवाहक शिव नारायण स्थानीय कलाकारों को बखूबी प्रशिक्षण दे रहे हैं। 'विभिन्न संगीत परम्पराओं के वाद्य एवं वादक' इनकी लिखी प्रथम पुस्तक है। ये याद करते हैं कि किस तरह पहली पुस्तक प्रकाशित हुई थी तो उत्साह से भर उठे थे। शास्त्रीय संगीत विधाओं में पुस्तक प्रकाशित होना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, जो इन्होंने हासिल कर ली थी। कहा कि इस पुस्तक में रमानंद मिश्र, विंध्यवासनी देवी, शारदा सिन्हा सरीखे संगीत कलाकारों के कृतित्व का वर्णन भी है। साथ ही, यहां के माटी-पानी से जुड़े ग्रामीण अंचल में रचे-बसे लोक संगीत का वृत्तांत प्रतिपादित किया गया है। खासकर विद्यापति गीत, भगवती गीत, विभिन्न संस्कार गीत व लोकनाट्य से जुड़े गीतों का वर्णन है। कहते हैं कि लोक संगीत व शास्त्रीय संगीत विधा पर पुस्तक प्रकाशन ने मेरे आत्मबल को संबल दिया है। जिला प्रशासन द्वारा राजभाषा विभाग के पास इस वर्ष के विद्यापति सम्मान के लिए मेरी पुस्तक की अनुशंसा की गई है। पहली पुस्तक प्रकाशित हुई तो उस समय संगीत संसार से जुड़े विभिन्न विद्वानों ने मुझे खूब बधाई और शुभकामनाएं दी थी वह आज भी अविस्मरणीय है।

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