मधुबनी। सरकार एक-एक गांव को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाने की भरपूर कोशिश कर रही है। मगर, अधिकारी व कर्मचारियों की लापरवाही के कारण लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। सभी पंचायतों के ओडीएफ होने के सरकारी दावे धरातल पर नहीं दिखती। मधवापुर पंचायत को छोड़कर अब भी प्रखंड की 12 पंचायत ओडीएफ घोषित नहीं हो सकी है। इन पंचायतों में शौचालय निर्माण की गति काफी धीमी है। यही नहीं जिनके घरों में शौचालय का निर्माण हो चुका है वे भी प्रचार-प्रसार के अभाव में इसका इस्तेमाल नहीं कर खुले में शौच करते हैं। इन पंचायतों की करीब 45 से 50 प्रतिशत आबादी अब भी खुले में शौच जाते हैं। खासकर जागरूकता की कमी से ग्रामीण क्षेत्रों में लोग सड़कों पर शौच करते नजर आते हैं।

विभाग ने प्रखंड में कुल 18,500 शौचालय के निर्माण कराने का लक्ष्य रखा। इसमें अबतक 11 हजार परिवारों के घरों में शौचालय का निर्माण हो चुका है। वहीं लाभुक के बैंक खाते में राशि का भुगतान हो चुका है। 6702 लाभुक अब भी लाभ से वंचित है। जबकि 23 हजार लोगों ने शौचालय निर्माण कराने के लिए आवेदन जमा किया है।

बताते चलें कि पिरौखर पंचायत में अब तक मात्र छह सौ लोगों के घरों में शौचालय का निर्माण पूर्ण हुआ है। वहीं पंचायत के विभिन्न वार्डो के टोलों में करीब सात सौ परिवारों के घरों में शौचालय का निर्माण नहीं हो सका है। यहां की करीब 45 प्रतिशत आबादी खुले में शौच करने को विवश है। मुखिया मंदाकिनी ने बताया कि पंचायत के सुजातपुर, एकारी, पिरौखर समेत कई गांव के महादलित व अति पिछड़े वर्ग के टोल में शौचालय का निर्माण नहीं हो पाया है। इससे लोग खुले में शौच जाते हैं। शौचालय निर्माण के लिए लोगों का फार्म प्रखंड कार्यालय में जमा हैं। वहीं जिनका शौचालय बन चुका है उनके खाते में राशि नहीं आने से वे राशि के लिए प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। इसी तरह बलवा पंचायत में अबतक 400 लोगों के घरों में शौचालय निर्माण का कार्य पूर्ण हुआ है। वहीं नौ सौ लोगों के घरों में शौचालय निर्माण का कार्य शुरू भी नहीं हो सका है। सलेमपुर पंचायत में करीब सात सौ परिवारों में शौचालय का निर्माण पूर्ण हो चुका है। मगर, एक हजार लोगों के घरों में शौचालय नहीं बना है। मुखिया देवेन्द्र यादव ने बताया कि फार्म जमा है। धीरे-धीरे लोगों का शौचालय निर्माण हो रहा है। खासकर इस पंचायत के कई गांवों के महादलित व अति पिछड़े वर्ग के टोल में शौचालय निर्माण की गति काफी धीमी चल रही है। मुखिया बैधनाथ दास ने बताया कि करीब नौ सौ परिवारों के फार्म प्रखंड कार्यालय में जमा होने के बावजूद अबतक इन परिवारों के घरों में शौचालय निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ है। इस कारण पंचायत के करीब 45 से 50 प्रतिशत आबादी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। जिन लोगों के घरों में शौचालय निर्माण पूर्ण हो चुका है। वैसे लोगों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया जा सका है। मजबूर हो लोग प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। इतना ही नहीं प्रखंड के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों, मधवापुर बस पड़ाव, साहरघाट बाजार परिसर आदि जगहों पर सरकार के द्वारा लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए शौचालय ध्वस्त हो चुका है। इसकी मरम्मत नहीं कराने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इस बाबत बीडीओ बैभव कुमार ने बताया कि प्रखंड की 13 पंचायतों में 80 प्रतिशत लोगों के घरों में शौचालय का निर्माण पूर्ण हो चुका है। लोगों के खातों के माध्यम से प्रोत्साहन राशि भेजी जा चुकी है। शेष आवेदनों का सत्यापन और जीओ टैगिग का काम चल रहा है।

Posted By: Jagran

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