मधुबनी में अवैध अस्पतालों पर बड़ी कार्रवाई, एपेक्स अस्पताल का निबंधन निलंबित
दैनिक जागरण में खबर छपने के बाद मधुबनी के झंझारपुर स्थित एपेक्स अस्पताल का निबंधन स्वास्थ्य विभाग ने निलंबित कर ...और पढ़ें

अस्पताल संचालक से पूछताछ करते डाक्टर मुकेश कुमार। जागरण
HighLights
दैनिक जागरण की खबर के बाद एपेक्स अस्पताल का निबंधन निलंबित।
जांच में अस्पताल में योग्य डॉक्टर और स्टाफ नहीं पाए गए।
मधुबनी में अवैध निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग की लगातार कार्रवाई।
जागरण संवाददाता, मधुबनी। दैनिक जागरण में छपी खबर का बड़ा असर हुआ है। झंझारपुर के मोहना चौक स्थित एपेक्स अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग ने ताला बंद करने की कार्रवाई की है। सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने अस्पताल का निबंधन तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक दैनिक जागरण में मामला उजागर होने के बाद सिविल सर्जन ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मुकेश कुमार और डॉ. फिरोज अंसारी की संयुक्त टीम से जांच कराई। टीम जब मौके पर पहुंची तो अस्पताल में न तो कोई योग्य डॉक्टर मिला और न ही पैरामेडिकल स्टाफ।
अस्पताल मानक के अनुसार संचालित नहीं हो रहा था। इसी आधार पर सिविल सर्जन ने अस्पताल को तुरंत बंद रखने का आदेश दिया है। अस्पताल के संचालक शत्रुघ्न कुमार यादव को एक सप्ताह के अंदर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर निबंधन रद्द करने के साथ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
लगातार एक्शन मोड में है विभाग
बता दें कि दो दिन पहले ही विभाग ने एक निजी अस्पताल को सील किया था और दो अन्य अस्पतालों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाकर बंद करने का निर्देश दिया था। लगातार हो रही इस कार्रवाई से अवैध रूप से चल रहे नर्सिंग होम संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।
पिछले एक साल की बात करें तो मधुबनी जिले में अब तक कम से कम 17 निजी अस्पतालों और क्लीनिकों पर कार्रवाई हो चुकी है। डेढ़ महीने पहले बेनीपट्टी और लौकही में एक साथ 7 अस्पतालों पर छापेमारी हुई थी।
इसमें दूसरी बार नियम तोड़ने वाले तीन अस्पतालों पर दो-दो लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया गया था। इनमें बेनीपट्टी कटैया रोड का ठाकुर डेंटल क्लिनिक और लौकही का एक निजी सेंटर शामिल था। जबकि बिना निबंधन के चल रहे चार अन्य अस्पतालों पर 10-10 हजार का जुर्माना लगा था।
इससे पहले अक्टूबर में लदनिया के तीन अस्पतालों पर 50-50 हजार और अप्रैल 2025 में बाबूबरही के तीन नर्सिंग होम पर 50-50 हजार का जुर्माना लगाया गया था। फुलपरास में भी पहले कई अल्ट्रासाउंड सेंटर और नर्सिंग होम सील किए जा चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पहली बार नियम तोड़ने पर 10 से 50 हजार और दूसरी बार पकड़े जाने पर दो लाख का जुर्माना और सील की कार्रवाई की जा रही है। पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य स्तरीय टीम भी हर पखवाड़े जिलों में जांच कर रही है।
