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मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ पर एक्शन, मधुबनी में अस्पताल सील, दो पर 10-10 हजार जुर्माना

By Braj mohan mishraEdited By: Dharmendra Singh
Published: Thu, 10 Sep 2026 02:42 PM (IST)

मधुबनी में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे अवैध निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है। ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. मधुबनी में अवैध निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई।

  2. झंझारपुर स्थित मां दुर्गा अस्पताल को सील करने का आदेश।

  3. दो अन्य संस्थानों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड।

जागरण संवाददाता, मधुबनी। जिले में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे बिना निबंधन और मानकों के विपरीत संचालित निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग ने अब कड़ा शिकंजा कस दिया है। जांच के दौरान अनियमितता मिलने के बाद एक अस्पताल को सील करने की तैयारी है, जबकि दो अन्य संस्थानों के संचालकों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। कार्रवाई के बाद अवैध तरीके से अस्पताल चलाने वालों में हड़कंप मचा है।

मां दुर्गा अस्पताल पर सबसे बड़ी कार्रवाई

झंझारपुर स्थित मां दुर्गा अस्पताल की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, झंझारपुर की टीम ने अस्पताल की जांच की थी। जांच में इसका संचालन अवैध और निर्धारित मानकों के विपरीत पाया गया। इसके बाद सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने अस्पताल को सील करने का आदेश दिया है।

दंडाधिकारी-पुलिस की मौजूदगी में सील

सिविल सर्जन ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, झंझारपुर को अनुमंडल पदाधिकारी से समन्वय स्थापित कर दंडाधिकारी और पुलिस बल की मौजूदगी में अस्पताल को अविलंब सील करने का निर्देश दिया है। विभाग की इस कार्रवाई से अन्य निजी अस्पताल संचालकों में भी खलबली मच गई है।

दो संस्थानों पर 10-10 हजार जुर्माना

घोघरडीहा के असंग चौक बेलहा स्थित ग्रामीण आरोग्य हेल्थ केयर और लखनौर के तमुरिया स्थित आर्युवेद स्वास्थ्य संस्थान की जांच में भी निबंधन के बिना संचालन का मामला सामने आया। जिला वेक्टर बोर्न रोग नियंत्रण पदाधिकारी और प्रभारी उपाधीक्षक, अनुमंडलीय अस्पताल, फुलपरास की टीम ने दोनों संस्थानों की जांच की थी।

पहली गलती मानकर अर्थदंड

जांच रिपोर्ट के आधार पर सिविल सर्जन ने दोनों संचालकों को प्रथम उल्लंघन का दोषी माना। इसके बाद दोनों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। स्वास्थ्य विभाग अब ऐसे संस्थानों की जांच आगे भी जारी रखने की तैयारी में है। अधिकारियों का कहना है कि बिना निबंधन और निर्धारित मानकों के संचालित स्वास्थ्य संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।