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मिथिला की गोदना कला को राष्ट्रीय पहचान, मधुबनी की महामना देवी को शिल्प गुरु पुरस्कार

By Brijmohan mishraEdited By: Dharmendra Singh
Published: Fri, 16 Oct 2026 09:39 PM (GMT+05:30)

मधुबनी की महामना देवी को मिथिला की गोदना शैली में उनके योगदान के लिए वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित शिल्प गुरु ...और पढ़ें

मधुबनी के जितवारपुर गांव की कलाकार महामना देवी।

मधुबनी के जितवारपुर गांव की कलाकार महामना देवी।

HighLights

  1. महामना देवी को 2025 के शिल्प गुरु पुरस्कार के लिए चुना गया।

  2. मधुबनी पेंटिंग की गोदना शैली में उनके योगदान का सम्मान।

  3. यह सम्मान मिथिला की पारंपरिक कला को नई पहचान देगा।

जागरण संवाददाता, मधुबनी। मिट्टी की खुशबू, लोकजीवन के रंग और परंपराओं की विरासत को अपनी तूलिका से जीवंत करने वाली मिथिला की गोदना कला को राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी पहचान मिली है। मधुबनी के जितवारपुर गांव की कलाकार महामना देवी के लिए यह उपलब्धि भावुक कर देने वाली है।

पहले नेशनल अवार्ड से सम्मानित हो चुकीं महामना देवी को अब वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित शिल्प गुरु पुरस्कार के लिए चुना गया है। इस सम्मान से उनकी कला साधना के साथ मिथिला की समृद्ध चित्रकला परंपरा का मान भी बढ़ा है।

गोदना शैली के योगदान पर मिला सम्मान

भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की ओर से जारी शिल्प गुरु पुरस्कारों की अंतिम सूची में महामना देवी का नाम शामिल है। उन्हें मधुबनी पेंटिंग की गोदना शैली में योगदान के लिए इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। सूची में बिहार के प्रतिनिधित्व के साथ उनका नाम दर्ज है। इससे पहले उन्हें नेशनल अवार्ड भी मिल चुका है।

14 अक्टूबर को जारी हुई सूची

वस्त्र मंत्रालय के हस्तशिल्प विकास आयुक्त कार्यालय की ओर से 14 अक्टूबर 2026 को चयनित कलाकारों की सूची प्रकाशित की गई। पुरस्कारों के लिए चयन 18 जुलाई 2026 को आयोजित केंद्रीय स्तरीय चयन समिति की बैठक में अंतिम रूप से किया गया था। महामना देवी के चयन से मधुबनी के कला जगत में खुशी का माहौल है।

भावुक होकर बोलीं महामना देवी

इस उपलब्धि पर महामना देवी ने भावुक होते हुए कहा कि यह उनके लिए अविस्मरणीय पल है। वर्षों से पारंपरिक कला से जुड़ाव और गोदना शैली में योगदान के लिए मिलने वाला यह सम्मान उनके लिए खास महत्व रखता है। उनके चयन को जिले की हस्तशिल्प परंपरा के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

लोकसंस्कृति की पहचान है गोदना शैली

मिथिला की पारंपरिक लोकचित्र कला की विशिष्ट विधा गोदना शैली में रेखाओं, पारंपरिक प्रतीकों और लोकजीवन से जुड़ी आकृतियों के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को चित्रों में उकेरा जाता है। महामना देवी को मिलने वाला यह सम्मान इस कला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने और अगली पीढ़ी को इससे जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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