यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 08, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कल्याणेश्वर शिव, कलना
हरलाखी प्रखंड के कलना गांव में स्थित है अति प्राचीन कल्याणेश्वर शिवालय। कल्याणेश्वर शिव श्रद्धालुओं को मनोवांछित फल देते हैं।

हरलाखी प्रखंड के कलना गांव में स्थित है अति प्राचीन कल्याणेश्वर शिवालय। कल्याणेश्वर शिव श्रद्धालुओं को मनोवांछित फल देते हैं। मंदिर की बनावट गुंबददार है। शिवालय परिसर में अन्य देवों की प्रतिमाएं भी विभिन्न मंदिरों में स्थापित हैं। शिवालय स्थित तालाब भी हैं।
इतिहास कल्याणेश्वर शिवलिग खुरदुरा व अधिक व्यास वाला है। इसका आधार छह फुट नीचे है। इसकी प्राचीनता का अंदाज इससे लगा सकते हैं कि यहां राजा जनक द्वारा पूजा करने का प्रमाण पुराणों में है। प्रतिवर्ष यहीं से जनकपुर की अतिप्रसिद्ध परिक्रमा सदियों से शुरू होती आई हैं। मंदिर की भव्य बनावट लोगों को आकर्षित करती है। कल्याणेश्वर शिवालय लगभग 200 वर्ष प्राचीन होने का प्रमाण मिलता है। शिवालय मुख्य तल से गर्भ गृह दस फीट नीचे है। तैयारियां सावन में जयनगर के कमला नदी से कांवर में जल भरकर लाखों की संख्या में कांवरिया कल्याणेश्वर शिवालय आते हैं। प्रत्येक सोमवार को यहां कांवरियों की भारी भीड़ होती है। शिवालय में स्थानीय स्तर पर लोगों द्वारा कांवरियों की सुविधा की व्यवस्था की जाती है। सावन में यहां विभिन्न प्रकार की दुकानें सज जाती हैं। सावन में शिवालय की आकर्षक ढ़ंग से सजावट की जाती है। शिव आराधना से सकल मनोरथ की प्राप्ति होती है।
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'कल्याणेश्वर शिव यहां आने वाले सभी भक्तों की मनोरथ पूरी करते हैं। यहां एक बड़े धर्मशाला की जरूरत है। इस शिवालय के विकास को भक्तों को आगे आना होगा। शिवरात्रि के बाद श्रावण में भगवान शिव पृथ्वी लोक पर विचरण करते हैं। भक्तों के सभी कष्टों को दूर करते हैं।'
- राकेश कुमार
फोटो 8 एमडीबी 6 'कल्याणेश्वर शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। कल्याणेश्वर शिवालय को विकसित करने की जरूरत है। धर्म स्थलों के विकास से समाज का कल्याण होता हैं। जलाभिषेक से ही भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं। शिव की पूजा करने से भक्तों को असीम शांति मिलती है।'
- शैलेश झा
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(श्रद्धा का महासावन) : श्रावण माह की बड़ी महत्ता
फोटो 8 एमडीबी 8 जलाभिषेक से अभिष्ट फल की प्राप्ति भगवान शिव नीलकंठ महादेव के रूप में भी पूजित हैं। श्रावण माह के पवित्र महीने से भगवान नीलकंठ का गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव रहा है। समुद्र मंथन के बाद भगवान शिव द्वारा विष ग्रहण के कारण उनका गला नीला पड़ गया। विष के ताप को कम करने के लिए पवित्र जलाशयों के जल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया गया। सावन माह की आध्यात्मिक महत्ता पर चर्चा करते हुए शिव भक्त गोपाल जी झा कहते हैं कि सावन में सोमवार को भगवान शिव पर जलाभिषेक से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लोगों को सप्ताह में एक दिन उपवास रखकर अपने इष्ट की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। शिव उपवास से कई प्रकार के रोगों से छुटकारा मिलता है। सोमवारी में लोगों को भगवान शिव का निश्चित रूप से जलाभिषेक करना चाहिए। धर्म ग्रंथों के अनुरूप लोगों को मानव सेवा कार्य में लगा रहना चाहिए। मानव सेवा को माधव सेवा का दर्जा दिया गया है। मानव के साथ-साथ पशुओं की सेवा में लगा रहना चाहिए। हरेक प्राणियों में शिव का वास होता है। शिव भक्तों को भय, शोक, क्रोध से मुक्त रहना चाहिए। भक्तों को निज साधना की उन्नति के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। निज साधना के साथ-साथ सामूहिक साधना के लिए प्रयासरत रहना चाहिए।
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