जनकपुर अयोध्या ट्रेन सेवा का जल्द होगा शुभारंभ, पीएम मोदी और बालेन शाह दिखाएंगे हरी झंडी
Janakpur Ayodhya Train Service: जनकपुर-अयोध्या ट्रेन सेवा जल्द शुरू होने वाली है, जिसके लिए भारत और नेपाल के विदेश सचिवों के बीच उच्चस्तरीय बैठक हुई है।

बैठक में शामिल भारतीय विदेश सचिव समेत अन्य। फोटो सौ.: सोशल मीडिया
HighLights
पीएम मोदी और बालेन शाह करेंगे ट्रेन का शुभारंभ।
अयोध्या-जनकपुर को जोड़ेगी रामायण सर्किट की यह ट्रेन।
पर्यटन, व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों को मिलेगा बढ़ावा।
संवाद सहयोगी, जयनगर (मधुबनी)। India Nepal Railway Network: जनकपुर-अयोध्या प्रस्तावित ट्रेन संचालन को लेकर बुधवार को नेपाल की राजधानी काठमांडू में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री और नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय के बीच उच्चस्तरीय बैठक हुई।
इसमें ट्रेन संचालन के साथ जल विद्युत, आपसी व्यापार और सीमा प्रबंधन समेत भारत-नेपाल संबंधों के कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। उम्मीद है कि नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह इसी माह 22 या 23 नवंबर को चार दिवसीय दौरे पर दिल्ली आएंगे।
हरी झंडी दिखाएंगे पीएम
इस यात्रा के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह संयुक्त रूप से जनकपुर-अयोध्या ट्रेन संचालन को हरी झंडी दिखाकर इसकी आधिकारिक शुरुआत करेंगे।
भारत और नेपाल के बीच प्रस्तावित यह ट्रेन सेवा रामायण सर्किट के तहत दोनों देशों के धार्मिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक रिश्तों में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।

रामायण सर्किट का स्वरूप
यह प्रस्तावित ट्रेन भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या और माता सीता की जन्मस्थली जनकपुरधाम को सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ने का काम करेगी।
यह त्रेतायुग के उस पौराणिक मार्ग और पावन रिश्ते को आधुनिक पटरी पर उतारने का सार्थक प्रयास है। वर्तमान में सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को इससे एक सीधी, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा की सुविधा मिलेगी।
सुगम होगी तीर्थयात्रा
जयनगर पहले से ही भारत-नेपाल रेल संपर्क का एक प्रमुख केंद्र रहा है, जिसे इस रूट के लिए मुख्य जंक्शन के रूप में विकसित किया जा रहा है।
सड़क मार्ग से जनकपुर से अयोध्या की दूरी लगभग 430 से 500 किलोमीटर के आसपास है। जयनगर, दरभंगा और सीतामढ़ी से होकर गुजरने वाला यह रेल रूट दोनों देशों के बीच धार्मिक पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा देगा।

सुगम सीमा पार आवाजाही
भारत और नेपाल के बीच सदियों से ‘बेटी-रोटी’ का पवित्र संबंध रहा है। इस ट्रेन सेवा के शुरू होने से दोनों देशों के आम नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों और परिवारों के लिए आवागमन बेहद आसान हो जाएगा।
यह रेल सेवा केवल एक परिवहन साधन नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के जन-मानस को और करीब लाते हुए सदियों पुराने आत्मीय रिश्ते को मजबूत करेगी।
मजबूत होगा पर्यटन उद्योग
इस रेल कॉरिडोर के शुरू होने से होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प उद्योगों को जबरदस्त गति मिलेगी। इसके साथ ही जनकपुर की प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग, कलाकृतियों और स्थानीय उत्पादों के लिए एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध होगा।
दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों, विशेषकर नेपाल के मधेश प्रांत और बिहार के मिथिला क्षेत्र में पर्यटन आधारित रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
सामाजिक व क्षेत्रीय विकास
धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से दोनों क्षेत्रों के समाजों के बीच वैचारिक और सांस्कृतिक मेल-जोल को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अतिरिक्त, इस महत्वाकांक्षी परियोजना से सीमावर्ती बुनियादी ढांचे का व्यापक विकास होगा। इसका सीधा और सकारात्मक प्रभाव स्थानीय नागरिकों के सामाजिक जीवन और रहन-सहन के स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
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