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बिहार में फर्जी MBA डिग्री पर बना अस्पताल प्रबंधक, राज खुला तो सरकारी रकम लेकर रफू चक्कर

Published: Thu, 01 Oct 2026 09:02 PM (IST)

Madhubani Hospital Scam : मधेपुर रेफरल अस्पताल में एक प्रबंधक ने फर्जी एमबीए डिग्री के सहारे नौकरी पाई और 4.67 ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. फर्जी एमबीए डिग्री पर अस्पताल प्रबंधक की नौकरी मिली।

  2. प्रबंधक 4.67 लाख रुपये वेतन लेकर फरार हो गया।

  3. अस्पताल ने प्राथमिकी दर्ज कर वसूली की कार्रवाई शुरू की।

संवाद सहयोगी, झंझारपुर (मधुबनी)। मधेपुर रेफरल अस्पताल में फर्जी एमबीए (मास्टर आफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन) डिग्री के सहारे अस्पताल प्रबंधक की नौकरी का मामला सामने आया है।

फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद प्रबंधक की सेवा समाप्त कर दी गई। इस बीच वह वेतन के रूप में 4.67 लाख रुपये लेकर फरार हो गया। अस्पताल प्रशासन ने उसके खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज करा वसूली की कार्रवाई तेज कर दी है।

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. राजू कुमार रंजन ने 29 सितंबर को मधेपुर थानाध्यक्ष को पत्र भेजकर पूरे मामले की जानकारी दी है। आरोपित चिरंजीव कुमार चिराग (पिता-सियालाल प्रसाद), सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के मोरकाही गांव का निवासी है।

डा. रंजन के अनुसार, चिरंजीव कुमार चिराग ने एमबीए की डिग्री के आधार पर मधेपुर रेफरल अस्पताल में अस्पताल प्रबंधक के पद पर नौकरी हासिल की थी।

विभाग ने जब उसके प्रमाणपत्रों की जांच कराई तो डिग्री फर्जी निकली। इसके बाद राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के आदेश और जिला स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर उसकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई।

आरोप है कि सेवा समाप्ति के दिन ही वह अस्पताल से चला गया। जांच में पाया गया कि अपने कार्यकाल के दौरान उसने वेतन और अन्य मद में कुल चार लाख, 67 हजार,112 रुपये सरकारी खजाने से लिया है।

विदित हो कि चिरंजीव कुमार ने मार्च, 2023 में मधेपुर रेफरल अस्पताल में योगदान किया था। अगस्त, 2024 में उसके प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया गया। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद तत्काल उसकी सेवा समाप्त कर दी गई थी। 29 सितंबर को मधेपुर थानाध्यक्ष को पत्र भेजे जाने के बाद यह मामला सामने आया है।

वसूली के लिए पत्र

सेवा समाप्ति के बाद विभाग ने उसे राशि जमा करने का आदेश दिया। अस्पताल प्रशासन ने कई बार पत्र भेजा, लेकिन उसने एक रुपया भी वापस नहीं किया।

अंत में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने पुलिस से कार्रवाई कर सरकारी राशि वसूलने का अनुरोध किया। अस्पताल प्रशासन ने अपने दूसरे पत्र में बताया है कि इस मामले में मधेपुर थाना में कांड संख्या 271/26 दर्ज किया जा चुका है।

इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग में नियुक्ति और प्रमाणपत्र सत्यापन की पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। फर्जी डिग्री पर सरकारी नौकरी पाकर महीनों तक सरकारी राशि लेने की घटना से विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल है।

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