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एफडीआर तकनीक से गांव की सड़कों का कायाकल्प, मधुबनी में पीएमजीएसवाई फेज-3 का काम शुरू

By Abhay Kumar Edited By: Ajit kumar
Published: Mon, 16 Feb 2026 06:28 PM (IST)

PMGSY Phase 3 Project: मधुबनी में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत टी-28 बेलहा से खुटौना तक 15.350 किमी सड़क ...और पढ़ें

Madhubani Infrastructure Work: भविष्य की सड़क निर्माण नीति का मॉडल माना जा रहा। फोटो: जागरण

Madhubani Infrastructure Work: भविष्य की सड़क निर्माण नीति का मॉडल माना जा रहा। फोटो: जागरण

HighLights

  1. मधुबनी में एफडीआर तकनीक से 15.350 किमी सड़क निर्माण।

  2. पुरानी सड़क सामग्री रीसायकल कर मजबूत, टिकाऊ सड़कें।

  3. लागत प्रभावी, पर्यावरण अनुकूल, ग्रामीण कनेक्टिविटी में सुधार।

संवाद सहयोगी जागरण, खुटौना (मधुबनी)। FDR Road Construction Technology: ग्रामीण सड़कों की तस्वीर और तकदीर बदलने की दिशा में मधुबनी जिले में एक नई पहल शुरू हुई है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (फेज-3) के तहत टी-28 बेलहा से ललमनियां होते हुए खुटौना प्रखंड मुख्यालय तक बनने वाली 15.350 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण अब अत्याधुनिक फुल डेप्थ रेस्टोरेशन (FDR) तकनीक से किया जा रहा है। जैसे ही कालीकरण का कार्य शुरू हुआ, क्षेत्र के ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई।

आधुनिक मशीनों की मदद

निर्माण एजेंसी के अनुसार अब तक 6.450 किलोमीटर हिस्से में पीसीसी सड़क और पुल-पुलिया का कार्य पूरा कर लिया गया है। शेष 8.900 किलोमीटर में डामरीकरण का कार्य आधुनिक मशीनों की मदद से तेजी से चल रहा है। खास बात यह है कि दरभंगा–कोसी प्रमंडल में यह एफडीआर तकनीक से किया जा रहा एकमात्र ट्रायल प्रोजेक्ट है, जिसे सीमावर्ती इलाकों के लिए भविष्य की सड़क निर्माण नीति का मॉडल माना जा रहा है।

पहली बार अपनाई गई तकनीक

इस परियोजना में पहली बार पुरानी सड़क की परतों को उखाड़कर वहीं रिसाइकिल किया जा रहा है। एफडीआर तकनीक के जरिए सड़क की ऊपरी परत के साथ-साथ उसकी कमजोर नींव को भी मजबूत किया जाता है। इससे सड़क की उम्र बढ़ती है और भारी वाहनों का दबाव भी आसानी से सहन किया जा सकता है।

निर्माण कार्य तय समय सीमा में

संवेदक एनकेएसपी इंफ्रा प्रा. लि. के निदेशक फिरोज यादव ने बताया कि नई तकनीक से न सिर्फ सड़क की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि निर्माण कार्य भी तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह तकनीक ग्रामीण सड़कों के लिए किफायती और टिकाऊ साबित होगी।

क्या है फुल डेप्थ रेस्टोरेशन (FDR)?

फुल डेप्थ रेस्टोरेशन सड़कों के पुनर्निर्माण की एक आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल प्रक्रिया है। सामान्य मरम्मत में जहां केवल सड़क की ऊपरी परत बदली जाती है, वहीं एफडीआर में पूरी सड़क संरचना को सुधार दिया जाता है।

इस प्रक्रिया में पहले विशेष मशीनों से पुरानी सड़क की पूरी मोटाई को पीस दिया जाता है। इसके बाद पिसी हुई सामग्री में सीमेंट, चूना या अन्य स्टेबलाइजर मिलाकर उसे फिर से सड़क पर बिछाया जाता है। भारी रोलरों से दबाव देने के बाद एक मजबूत बेस लेयर तैयार होती है, जिसके ऊपर नई डामर या कंक्रीट की परत डाली जाती है।

क्यों है एफडीआर तकनीक खास?

यह तकनीक लागत के लिहाज से किफायती मानी जाती है, क्योंकि पुरानी सामग्री को दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। इससे न सिर्फ निर्माण खर्च घटता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है। मजबूत नींव के कारण सड़क लंबे समय तक टिकाऊ रहती है और बार-बार मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ती। इसके साथ ही निर्माण कार्य तेजी से पूरा होता है, जिससे लोगों को कम समय में बेहतर सड़क सुविधा मिलती है।

ग्रामीणों को मिलेगा सीधा लाभ

इस सड़क के बन जाने से खुटौना प्रखंड और आसपास के गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। बाजार, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि एफडीआर तकनीक से बनी यह सड़क आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय विकास की रफ्तार को नई दिशा देगी।

मधुबनी में शुरू हुआ यह प्रयोग अगर सफल रहा, तो आने वाले समय में बिहार के अन्य जिलों की ग्रामीण सड़कों के निर्माण में भी इसी तकनीक को अपनाया जा सकता है।