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बिहार में जहां ठहरते थे हिलेरी और दिनकर, वह डाक बंगला 20 साल से बदहाल, अब बदलेगी तस्वीर

Published: Wed, 30 Sep 2026 05:15 PM (IST)

जयनगर का ऐतिहासिक ब्रिटिशकालीन डाक बंगला 20 साल से बदहाल था, जिसके जीर्णोद्धार की उम्मीद अब उप विकास आयुक्त के निरीक्षण के बाद जगी है।

जयनगर का डाक बंगला । जागरण

जयनगर का डाक बंगला । जागरण 

HighLights

  1. जयनगर का ऐतिहासिक डाक बंगला 20 वर्षों से बदहाली का शिकार।

  2. उप विकास आयुक्त ने मॉडल के रूप में विकसित करने की घोषणा की।

  3. हिलेरी, दिनकर जैसे कई प्रमुख हस्तियां यहां ठहरी थीं।

संवाद सहयोगी, जयनगर (मधुबनी)। जयनगर अनुमंडल मुख्यालय के जिला परिषद बाजार स्थित ब्रिटिशकालीन डाक बंगला पिछले 20 वर्षों से बदहाली का आंसू बहा रहा है।

1940 में ब्रिटिश शासन के दौरान बना यह डाक बंगला कभी राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था। यहीं से कई नेताओं के भाग्य तय होते थे। लेकिन वर्षों से क्षतिग्रस्त और जर्जर अवस्था में पड़ा यह ऐतिहासिक धरोहर जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा है।

पूर्व में कई जिला परिषद अध्यक्ष और उप विकास आयुक्त यहां आए, निरीक्षण किया, लेकिन किसी ने इसके जीर्णोद्धार को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई।

अब मंगलवार को उप विकास आयुक्त तुषार कुमार के आगमन और निरीक्षण के बाद एक नई उम्मीद जगी है। उन्होंने डाक बंगला को मॉडल के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों में खुशी है।

जानकारी के अनुसार, समाजसेवी सुरेंद्र प्रसाद और उनकी टीम ने लगातार इस धरोहर को बचाने के लिए जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया। इसी के बाद डीडीसी तुषार कुमार ने जिला परिषद बाजार और डाक बंगला का निरीक्षण किया।

यह डाक बंगला केवल एक भवन नहीं, बल्कि इतिहास का जीवंत गवाह है। माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले पहले व्यक्ति न्यूजीलैंड निवासी एडमंड हिलेरी और भारत के दार्जिलिंग निवासी तेनजिंग शेरपा नेपाल जाने के क्रम में इसी डाक बंगले में ठहरे थे।

वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. वीरेंद्र झा के अनुसार, 1934 में आए भूकंप के बाद राहत कार्य का जायजा लेने बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह और जयनगर के पहले सब रजिस्ट्रार राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर भी इसी डाक बंगले में रुके थे।

इसके अलावा मधुबनी के तत्कालीन सांसद भोगेंद्र झा, पूर्व मंत्री चतुरानन मिश्र, पूर्व मंत्री राम लखन राम रमण, विलट पासवान विहंगम, रामफल पासवान सहित दर्जनों राजनेताओं और अधिकारियों का ठहराव यहां होता था। सीपीआई नेता स्व. अमीरुद्दीन की किताब ‘यादें’ और डॉ. वीरेंद्र झा की किताब ‘नगर गाथा’ में भी इस डाक बंगले का उल्लेख है।

भाकपा-माले प्रखंड सचिव भूषण सिंह ने मांग की है कि डाक बंगले का जीर्णोद्धार कर इसे शहर में एक अतिथि गृह के रूप में विकसित किया जाए, ताकि बाहर से आने वाले लोगों को ठहरने की सुविधा मिल सके।

रीक्षण के दौरान डीडीसी तुषार कुमार ने कहा कि जिला परिषद बाजार का सर्वे किया गया है और जल्द ही डाक बंगले को मॉडल रूप में विकसित किया जाएगा। उनके इस आश्वासन से इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की उम्मीद फिर से जगी है।

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