मधुबनी। बाढ़ सिर पर है लेकिन आपदा विभाग अभी तक नावों की व्यवस्था नहीं कर सका है। वैसे प्रशासन का दावा है कि बाढ़ पूर्व तैयारी अंतिम चरण में है। जिला आपदा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 124 सरकारी नाव व 21 निजी नाव है। जिसके निबंधन का रिन्यूअल करने की प्रक्रिया चल रही है। बताया गया कि जिले में 25 प्रशिक्षित नाविक हैं। जिनका कोई बकाया विभाग के पास नहीं है। यदि सरकारी व निजी नाव की संख्या पर गौर किया जाय तो जितनी नाव है उतनी ही प्रशिक्षित नाविक होना चाहिए। जिसमें से चौथाई नाविक की व्यवस्था नहीं है। जिस कारण बाढ़ आने की स्थिति में हाल क्या होगा सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। मधेपुर,संस : नेपाल के तराई क्षेत्र सहित बिहार में मानसून की बारिश जारी है। जिसके चलते संभावित बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बाढ़ से बचाव के लिए प्रशासनिक कागजी घुड़दौड़ जारी है। लेकिन तैयारी नाकाफी साबित हो रही है। पांच दिनों से रुक रुक कर हो रही बारिश से नदी नाले भर चुके हैं। कोसी एवं भूतही बलान भर चुकी है। मधेपुर प्रखंड के बाढ़ प्रभावित लगभग दर्जनभर पंचायतों के एक लाख से अधिक कि आबादी को बाढ़ से बचाने के लिए अंचल प्रशासन के पास चालू हालत में सिर्फ 30 नाव है। सरकारी कुल उपलब्ध नावों की संख्या 76 है जिसमें बकौल सीओ 46 नावों को मरम्मत कराने की आवश्यकता है। सीओ नरेश कुमार सिन्हा ने बताया कि जिला प्रशासन से 5 बड़ी और 10 मंझौले नाव की मांग की गई है। इधर खराब पड़े नावों की मरम्मत (गहनी) कराने का निर्देश नाविकों को दिया गया है। अंचल क्षेत्र में 31 नदी घाट हैं। जिसमें अधिकांश घाटों पर नाव का परिचालन किया जा रहा है। नावों पर क्षमता से अधिक लोग न चढ़े प्रशासन के लिए चुनौती होगा। अंचल प्रशासन के पास नावों की उपलब्धता कम रहने पर बाढ़ के समय पीड़ित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।अबतक अंचल के पास बारह लाईफ जैकेट है जबकि दस कि मांग की गई है। लेकिन सच माने तो निजी नाविकों के सहारे ही कोसी की यात्रा पूर्ण होती है।

Posted By: Jagran

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