यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 13, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पुरसौलिया में विराजते पंचमुख शिव¨लग
मधुबनी। कलुआही प्रखंड की पुरसौलिया पंचायत के पश्चिम दिशा में विराजते हैं पंचमुख शिव¨लग। माना जाता है

मधुबनी। कलुआही प्रखंड की पुरसौलिया पंचायत के पश्चिम दिशा में विराजते हैं पंचमुख शिव¨लग। माना जाता है कि यह यहां प्राचीनकाल से ही जो राजा विराट द्वारा भी ये पुजित रहे हैं। जो कलान्तर में कमला के बहाव क्षेत्र में आकर भूमिगत हो गए थे। लेकिन उस स्थल पर परम्परा से नरक निवार्ण चतुर्दशी को शिव भक्त जमा होकर इनकी पूजा-अर्चना करता रहा।
मंदिर का इतिहास :
साठ के दशक में कैथाही के संत रामरसीक दास ने अपने हठयोग के बल पर गांव के पश्चिम में पुरानी कमला की धारा के मुहाने एक कूप से खोज भव्य मंदिर का निर्माण कराया था।
पंचमुख है शिव¨लग :
करीब एक फूट के यह अद्भूत शिव¨लग अर्द्व भग पर प्राप्त हुए थे जो पंचमुखी हैं जिनके सभी मुख एक ही आकृति और समानभाव भंगिमा वाले शिव का ही जो दुर्लभ माने जाते हैं।
कैसे पंहुचें :
एनएच 105 के बरदेपुर गणेश चौक से कलुआही-बासोपटृी में मिलने वाली करीब दो किमी की दूरी पर इस स्थान तक पैदल अथवा रिक्शा या अपने वाहन से भी पहुंचा जा सकता है।
सालों भर होती है पूजा :
माघ, बैसाख और सावन के अलावा यहां प्रत्येक सोमवार और चतुर्दशी के साथ ही हर दिन भक्तजन यहां पहुंचते हैं।