यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 24, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
महान ऋषि, ब्रह्म ज्ञानी थे याज्ञवल्क्य
बिस्फी (मधुबनी), संस : प्रखंड क्षेत्र के जगवन गाव स्थित याज्ञवल्क्य मुनि आश्रम में याज्ञवल्क्य मुनि

बिस्फी (मधुबनी), संस : प्रखंड क्षेत्र के जगवन गाव स्थित याज्ञवल्क्य मुनि आश्रम में याज्ञवल्क्य मुनि की प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान सोमवार को वैदिक मंत्रोचार के बीच किया गया। इससे पूर्व 205 कन्याओं द्वारा कलश शोभा यात्रा निकाली गई। प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान कर्नाटक से आए पंडित तीर्थराज द्वारा संपन्न कराया गया। मौके पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए गौतम पीठाधीश्वर महावीर शरण दास जी ने कहा कि याज्ञवल्क्य महान ऋषि एवं ब्रह्म ज्ञानी थे। वे महाराजा विदेह के गुरु थे। इनकी रचना बृहदारण्य उपनिषद सभी 111 उपनिषदों में श्रेष्ठ हैं। इस पुस्तक द्वारा मानव को महामानव एवं जीव को परमात्मा से अपनी जीवित अवस्था में ही एकाकार होने जैसे गूढ़ तत्वों का वर्णन किया गया है। आज भी दक्षिण भारत में याज्ञवल्क्य संहिता के अनुसार अपना कर्म करते हैं। कार्यक्रम में पूर्व विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल, वेदान्ताचार्य पं. सुरेश झा, विदुशी मंजू, प्रेम चन्द्र झा, शिवशकर यादव, पुरुषोत्तम मिश्र, श्यामल किशोर श्रीवास्तव, विजय लाल यादव, मुखिया कुलेश सिंह आदि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सक्रिय थे।
