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कोसी के उफान से मधेपुरा के 16 पंचायतों में तबाही, 6500 हेक्टेयर से अधिक में फसल तबाह

Published: Wed, 30 Sep 2026 02:38 PM (GMT+05:30)

मधेपुरा के आलमनगर और चौसा प्रखंड में कोसी नदी की बाढ़ से 16 पंचायतों में 6500 हेक्टेयर से अधिक धान ...और पढ़ें

6500 हेक्टेयर से अधिक में फसल तबाह

6500 हेक्टेयर से अधिक में फसल तबाह

HighLights

  1. मधेपुरा के 16 पंचायतों में कोसी बाढ़ से भारी तबाही।

  2. 6500 हेक्टेयर से अधिक धान की फसलें जलमग्न, बर्बाद।

  3. किसानों को 11 करोड़ से ज्यादा का आर्थिक नुकसान।

जागरण संवाददाता, मधेपुरा। कोसी नदी के मुहाने पर बसे जिले के आलमनगर एवं चौसा प्रखंड में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। दोनों प्रखंडों की 16 पंचायतों के किसानों की खेतों में लगी फसलें पूरी तरह डूब गईं। आलमनगर की नौ पंचायतों में 2745 हेक्टेयर और चौसा प्रखंड की सात पंचायतों में 3819 हेक्टेयर में धान की फसल बर्बाद हुई है। 

17 हजार प्रति हेक्टेयर की दर से किए गए आकलन के अनुसार चौसा प्रखंड में छह करोड़ 49 लाख 23 हजार रुपये और आलमनगर प्रखंड में चार करोड़ 66 लाख 65 हजार रुपये का नुकसान है। 

कृषि विभाग के सर्वे के अनुसार कुल मिलाकर 11 कराेड़ 15 लाख 88 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा 33 प्रतिशत से अधिक बर्बाद हुए फसलों की है। जबकि किसानों का कहना है कि क्षति इससे अधिक की है।

मुआवजा की प्रक्रिया शुरू, 29 सितंबर तक लिया गया आवेदन

कृषि विभाग के अनुसार मुख्यालय को फसल क्षति का आकलन रिपोर्ट भेज दिया गया है। मुआवजा की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 23 सितंबर से 29 सितंबर तक किसानों से आवेदन लिया गया। 

29 सितंबर की शाम पांच बजे तक कुल 21667 किसानों के द्वारा आनलाइन आवेदन किया गया है। इसके बाद तीन-चार स्तरों पर सत्यापन की प्रक्रिया के उपरांत मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

महाजन से कर्ज लेकर खेती की, अब जीविका पर संकट

रतवारा गांव के किसान सुमन शर्मा बताते हैं कि धान रोपनी के समय बारिश नहीं होने के कारण मजबूरन पंपसेट सिंचाई कर मजदूरों की मदद से खेती की। जिस कारण लागत भी बढ़ गई। बाढ़ के कारण फसल बर्बाद होने से अब भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कृषि ही एकमात्र जीविका का साधन है। 

गंगापुर पंचायत के कोलवारा टोला निवासी किसान अवधेश कुमार मंडल ने कहा कि हम जैसे छोटे किसान महाजन के कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। कर्ज लेकर खेती की वह भी बाढ़ में डूब गया। खेतों में लगी धान की फसल बर्बाद हो गई है। सरकार 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान पर ही मुआवजा देती है।

पंचायत स्तर पर सर्वे करवाकर मुख्यालय को फसल क्षति का रिपोर्ट भेज दिया गया है। 29 सितंबर तक किसानों से आवेदन लिए गए हैं। 30 सितंबर से आवेदन की सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद संबंधित किसानों के खाते में मुआवजे की राशि अंतरित की जाएगी। - रितेश रंजन, जिला कृषि पदाधिकारी।

पंचायतवार आंकड़े 

क्रमांक पंचायत फसल क्षति (हेक्टेयर में)
1 आलमनगर पूर्वी 130
2 आलमनगर दक्षिणी 165
3 बरगांव 250
4 बसनवाड़ा 210
5 गंगापुर 450
6 इटहरी 310
7 खापुर 360
8 रतवारा 490
9 कुंजौरी 380
कुल क्षति (आलमनगर) 2745

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