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11 अक्टूबर से शुरू होगा शक्ति का महापर्व: हाथी पर सवार होकर आ रहीं मां भवानी, सुख-समृद्धि का लाईं संयोग

Published: Thu, 08 Oct 2026 03:30 PM (GMT+05:30)

शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होगा, जिसमें मां दुर्गा का आगमन और विदाई दोनों हाथी पर होगी, जो सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा का संकेत है।

11 अक्टूबर से शुरू होगा शक्ति का महापर्व: हाथी पर सवार होकर आ रहीं मां भवानी (AI Generated Image)

11 अक्टूबर से शुरू होगा शक्ति का महापर्व: हाथी पर सवार होकर आ रहीं मां भवानी (AI Generated Image)

HighLights

  1. नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू, मां दुर्गा का आगमन हाथी पर।

  2. हाथी पर आगमन सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा का शुभ संकेत।

  3. 21 अक्टूबर को प्रतिमा विसर्जन, पूजा पंडालों में तैयारी तेज।

संवाद सूत्र, सिंहेश्वर (मधेपुरा)। शक्ति की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होगा। दुर्गा पूजा को लेकर विभिन्न स्थानों पर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। घरों से लेकर पूजा-पंडालों तक भक्तिमय माहौल बनने लगा है। इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान, दोनों हाथी पर माना जा रहा है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, हाथी पर माता का आगमन और विदाई शुभ, स्थिरता, सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और धन-धान्य की वृद्धि का संकेत है।

पंडित महानंद झा ने बताया कि इस वर्ष मां दुर्गा के हाथी पर आगमन और विदाई का संयोग है। धार्मिक मान्यता में हाथी को स्थिरता, शांति, समृद्धि और कृषि के लिए शुभ माना गया है। इस कारण यह संयोग क्षेत्र के लिए मंगलकारी माना जा रहा है। हालांकि, इसे धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

11 अक्टूबर से देवी के नौ स्वरूपों की आराधना:

11 अक्टूबर को प्रतिपदा के साथ नवरात्र शुरू होगा। कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। 12 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी, 13 को मां चंद्रघंटा, 14 को मां कुष्मांडा, 15 को मां स्कंदमाता और 16 अक्टूबर को मां कात्यायनी की पूजा होगी।

17 अक्टूबर को महासप्तमी पर मां कालरात्रि की आराधना होगी। पूजा-पंडालों में विशेष अनुष्ठान और नवपत्रिका पूजा की जाएगी। 18 अक्टूबर को महाअष्टमी पर मां महागौरी की पूजा, कन्या पूजन और विशेष आरती होगी। 19 अक्टूबर को महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान होंगे।

20 अक्टूबर को विशेष हवन:

पंडित महानंद झा के अनुसार, 20 अक्टूबर को नवरात्र का विशेष हवन होगा। पूजा-पंडालों में विधि-विधान से हवन और पूर्णाहुति की जाएगी। श्रद्धालु परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए देवी की आराधना करेंगे।

21 अक्टूबर को प्रतिमाओं का विसर्जन:

21 अक्टूबर को मां दुर्गा की प्रतिमाओं की विदाई और विसर्जन किया जाएगा। श्रद्धालु गाजे-बाजे के साथ प्रतिमाओं को विसर्जन स्थल तक ले जाएंगे। भक्त मां को विदाई देते हुए अगले वर्ष फिर आने की कामना करेंगे।

क्षेत्र में सज रहे पूजा-पंडाल:

सिंहेश्वर, इटहरी, लरहा, सिरसिया, पटोरी, राजपुरा और जयपुरा सहित विभिन्न स्थानों पर दुर्गा पूजा की तैयारियां तेज हैं। पूजा समितियां पंडाल निर्माण, विद्युत सज्जा और श्रद्धालुओं की सुविधा के इंतजाम कर रही हैं।

पटोरी, सिरसिया और लरहा में मनोकामना पूरी होने पर छागर बलि देने की परंपरा भी रही है। इसके बाद प्रसाद का वितरण और सेवन किया जाता है। नवरात्र को लेकर बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ने लगी है।

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