बिहार की जीविका दीदियों की सफलता को मिलेगा डिजिटल मंच, अब ऑनलाइन दिखेगी मेहनत और आत्मनिर्भरता की कहानी
Jivika Didi Success Story Digital Media: जीविका से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं अब अपनी सफलता की कहानियों को डिजिटल मंच पर साझा करेंगी।

मधेपुरा में जीविका कर्मियों को डिजिटल मीडिया और रिपोर्टिंग का प्रशिक्षण देते अधिकारी।
HighLights
जीविका दीदियों की सफलता डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होगी।
'लखपति दीदियों' की प्रेरणादायक कहानियाँ प्रमुखता से दिखेंगी।
अन्य महिलाओं को स्वरोजगार हेतु प्रेरित करना मुख्य लक्ष्य।
संवाददाता, मधेपुरा। Jivika Didi Success Story Digital Media: जीविका से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं न केवल अपनी आजीविका चला रही हैं, बल्कि नए रोजगार सृजन कर आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिख रही हैं।
अब इन सफल दीदियों की सक्सेस स्टोरी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया जाएगा, ताकि जिले और राज्य की अन्य महिलाएं भी इनसे प्रेरित होकर स्वरोजगार से जुड़ सकें।
शुरुआत में 'लखपति दीदियों' और असाधारण काम करने वाले समूहों की कहानियों को प्रमुखता से प्रसारित किया जाएगा। इसके लिए जीविका द्वारा बकायदा कर्मियों को पेशेवर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें उन्हें केस अध्ययन लेखन, फोटोग्राफी, वीडियो प्रोडक्शन और प्रसारण के गुर सिखाए जा रहे हैं।
इन खास पहलों और समूहों की होगी ब्रांडिंग
जीविका के संचार प्रबंधक पद्माकर मिश्र के अनुसार, दीदियों की सक्सेस स्टोरी को पूरी जिम्मेदारी और पेशेवर तरीके से प्रस्तुत करने के लिए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। शुरुआती चरण में रोजगार सृजन करने वाली दीदियों और उनके समूहों की कहानियों को प्रकाशित किया जाएगा।
बांस क्लस्टर: कुमारखंड की 'वेणु जीविका हस्त शिल्प उत्पादक समिति' के तहत जुड़ी 29 दीदियां बांस के सूप, डगरा के अलावा पेन स्टैंड, मोबाइल स्टैंड और टी-टेबल जैसे आकर्षक उत्पाद तैयार कर रही हैं। विभिन्न शिल्प मेलों में इनकी प्रदर्शनी लगाई जा रही है, और जीविका टीम इनकी ब्रांडिंग व मार्केटिंग में पूरा सहयोग कर रही है।
दीदी की रसोई और FPC: सदर अस्पताल समेत विभिन्न अस्पतालों में 'दीदी की रसोई' चला रहे समूह बेहतरीन आमदनी का मॉडल पेश कर चुके हैं। वहीं, कुमारखंड में किसान उत्पादक कंपनी से जुड़ी 1052 दीदियां समूह में खेती कर अपने उत्पादों की ऑनलाइन ट्रेडिंग कर रही हैं।
सोशल मीडिया पर दिखेंगे हुनर के रंग
ज्ञात हो कि मधेपुरा जिले में कुल 3.65 लाख महिलाएं जीविका से जुड़ी हुई हैं। विभाग का अनुमान है कि इनमें से करीब एक तिहाई दीदियां 'लखपति दीदी' की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।
जिले के सभी 13 प्रखंडों में कुल 40 क्लस्टर, 2000 से अधिक ग्राम संगठन और 36000 जीविका समूह सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। अब इन सभी जगहों की सफलता की कहानियों को फेसबुक, इंस्टाग्राम, वेब पोर्टल और अन्य डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित किया जाएगा ताकि यह पहल व्यापक रूप ले सके।
