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दिनेश, मधेपुरा : गुजरे जमाने की गायिका राजकुमारी का जन्म 1924 में गुजरात में हुआ था। कहते हैं कि सपूत के पांव पलने में दिखने लगते हैं। कुछ ऐसी ही सख्शियत गायिका राजकुमारी भी थी। उन्होंने महज 14 वर्ष की उम्र में ही अपना पहला गाना एचएमवी में रिकार्ड कराया। गाने के बोल थे सुन 'बैरी बलमा कछू सच बोल न।' यह अलग बात थी राजकुमारी ने किसी संस्था से संगीत की कोई शिक्षा नहीं ली थी। लेकिन ईश्वर ने जो उन्हें कंठ बख्शा था वह कम नहीं था। इसके बाद तो उन्होंने विभिन्न मंचों पर अपनी गायिका सफर जारी रखा। कहते हैं एक बार वह सार्वजनिक मंच पर गाना गा रही थीं। वहीं उनकी मुलाकात फिल्म निर्माता प्रकाश भट्ट से हो गई। फिर क्या उन्होंने उन्हें प्रकाश पिक्चर से जुड़ने का न्यौता दे दिया। इस बैनर के तहत बनने वाली गुजराती फिल्म 'संसार लीला' में कई गाने पेश किए। इस फिल्म को हिन्दी में भी संसार नाम से फिल्माया गया। इसमें राजकुमारी जी ने गीत पेश किया 'आंख गुलाबी जैसे मद की प्यालियां, जागी हुई आंखों में है शरम की लालियां।' इसके बाद तो उनकी प्रतिभा बालीवुड में सिर चढ़कर बोलने लगी। वर्ष 1933 में फिल आंख का तारा, भक्त और भगवान,1934 में लाल चिट्ठी, मुंबई की रानी और शमशरे अलम में गीत पेश कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया। इस दौरान उनकी कई कालजयी गीतों ने लोगों को गुनगुनाने के लिए बाध्य कर दिया। जैसे 'चले जइयो बेदर्दा मैं रो पडूंगी, काली काली रतिया कैसे बिताऊं, बिरहा के सपने देख डर जाऊं।' इसके बाद 'नजरिया की मारी-मरी मोरी दइया।'़ ने तो उन्हें बुलंदियों पर पहुंचा दिया। इसी दौरान उन्होंने पंजाबी और बांग्ला में भी कई गीत पेश किए। इतना ही नहीं उन्होंने मशहूर गायक मुकेश के साथ भी गीत गाए। 'मुझे सच सच बता दो कब मेरे दिल में समाए थे,'जब तुम पहली बार देखकर मुस्कराए थे'। इसी दौरान वाराणसी निवासी बीके दुबे से उन्होंने शादी कर ली। 1952 में उन्होंने ओपी नैयर के साथ भी कई गीत गाए। यह अलग बात है कि उनका नाम भले ही राजकुमारी था। लेकिन अंत उनका मुफलिसी में हुआ। इस दौरान उन्होंने गायिका और अभिनेत्री के रुप में जो काम बालीवुड में किया वह शायद ही कभी भुला पाएं लोग।

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