लखीसराय के गांवों में दुधारू पशुओं में फैला थनैला रोग, दूध उत्पादन घटने से पशुपालक चिंतित
लखीसराय के सूर्यगढ़ा प्रखंड के गांवों में दुधारू पशुओं में थनैला रोग फैलने से पशुपालक चिंतित हैं, जिससे दूध उत्पादन में गिरावट आई है।

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HighLights
लखीसराय के गांवों में दुधारू पशुओं में थनैला रोग फैला।
रोग से दूध उत्पादन में कमी, पशुपालक चिंतित।
पशु चिकित्सक ने साफ-सफाई और शीघ्र उपचार की सलाह दी।
संवाद सूत्र, सूर्यगढ़ा (लखीसराय)। प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में दुधारू पशुओं में थनैला रोग के मामले सामने आ रहे हैं। इससे पशुपालक चिंतित हैं।
पशुपालकों के अनुसार, इस बीमारी के कारण दूध उत्पादन में कमी आ रही है। समय पर उपचार नहीं होने पर पशु के थन को भी नुकसान पहुंच सकता है।
सलेमपुर गांव के पशुपालक सुमन कुमार, निलेश कुमार और मुरारी कुमार ने बताया कि थनैला रोग से प्रभावित गाय-भैंस के दूध में कमी आ जाती है। गंभीर स्थिति में दूध के साथ खून या मवाद निकलने जैसी समस्या भी हो सकती है।
स्थानीय पशु अस्पताल के प्रभारी पशु चिकित्सक संजीव कुमार ने पशुपालकों को पशुओं की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।
उन्होंने बताया कि थनैला रोग से बचाव के लिए पशु के रहने की जगह साफ और सूखी रखनी चाहिए। समय पर उपचार नहीं होने से पशु को अधिक नुकसान हो सकता है। उन्होंने पशुपालकों को बीमारी के लक्षण दिखने पर पशु चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी।
साफ-सफाई और दुहने के तरीके पर दें ध्यान
पशुओं को गीली और गंदगी वाली जगह पर बांधने से बचना चाहिए। पशु के बैठने की जगह की नियमित सफाई करें और गोबर को अधिक समय तक जमा न रहने दें।
पशु का दूध निकालने से पहले थन को साफ पानी से धोकर स्वच्छ कपड़े से पोंछना चाहिए। दूध निकालते समय स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है।
दूध निकालने के बाद थन में दूध नहीं छोड़ना चाहिए और दुहने की सही विधि अपनानी चाहिए। पशुपालकों को सलाह दी गई है कि थन में सूजन, दर्द, असामान्य गर्माहट या दूध के रंग और बनावट में बदलाव दिखने पर तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करें। समय पर जांच और उचित उपचार से पशु को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
