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लखीसराय में मनरेगा के 90% से अधिक मजदूरों का ई-केवाईसी बाकी, सत्यापन में पिपरिया सबसे पीछे

Published: Thu, 15 Oct 2026 06:15 AM (IST)

लखीसराय जिले में मनरेगा के तहत 90% से अधिक मजदूरों का ई-केवाईसी सत्यापन अभी भी लंबित है, जिससे पारदर्शी भुगतान व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

एआई से निर्मित सांकेतिक तस्वीर।

एआई से निर्मित सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. लखीसराय में 90% से अधिक मनरेगा मजदूरों का ई-केवाईसी लंबित।

  2. पिपरिया प्रखंड में सत्यापन की गति सबसे धीमी, मात्र एक मजदूर का।

  3. लापरवाही पर पंचायत रोजगार सेवकों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी।

संवाद सहयोगी, लखीसराय। मनरेगा योजना में बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह समाप्त कर मजदूरों की मेहनत की कमाई सीधे उनके बैंक खातों में भेजने की सरकारी व्यवस्था को लखीसराय जिले में अपेक्षित गति नहीं मिल पा रही है।

विकसित भारत-जीरामजी योजना के तहत कुशल एवं अर्धकुशल जॉब कार्डधारी मजदूरों के ई-केवाईसी (e-KYC) में बरती जा रही सुस्ती के कारण बड़ी संख्या में मजदूरों का सत्यापन अब भी अधर में लटका हुआ है। जिले में कुल 13,563 कुशल एवं अर्धकुशल मजदूर चिह्नित हैं, लेकिन आंकड़ों के अनुसार अब तक महज 1,239 मजदूरों का ही ई-केवाईसी पूरा हो सका है।

यह कुल लक्ष्य का मात्र 9.13 प्रतिशत है, यानी 12,324 मजदूरों का सत्यापन होना अभी बाकी है। धीमी प्रगति के कारण विभागीय रैंकिंग में लखीसराय जिला राज्य स्तर पर 13वें स्थान पर है।

पिपरिया में सबसे धीमी रफ्तार, हलसी में थोड़ी राहत

प्रखंडवार आंकड़े ई-केवाईसी अभियान की बेहद असमान और चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। पिपरिया प्रखंड में 350 मजदूरों में से अब तक केवल एक का ही सत्यापन हो पाया है, जो जिले में सबसे फिसड्डी है। दूसरी ओर, हलसी प्रखंड में 2,827 में से 291 मजदूरों का ई-केवाईसी पूरा हुआ है जो सबसे आगे है।

बड़हिया में 1,077 में 60 (5.57%), चानन में 3,051 में 254 (8.32%), लखीसराय में 1,598 में 186 (11.64%), रामगढ़ चौक में 2,088 में 234 (11.21%) और सूर्यगढ़ा में 2,572 में 213 (8.28%) मजदूरों का ही सत्यापन हो सका है।

आधार सीडिंग और जॉब कार्ड सत्यापन पारदर्शी भुगतान की कुंजी

मनरेगा के तहत मजदूरों के भुगतान को पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा आधार आधारित भुगतान प्रणाली (ABPS) अनिवार्य रूप से लागू की गई है। इसके तहत मजदूरों के बैंक खाते की आधार सीडिंग, जॉब कार्ड का भौतिक सत्यापन और बायोमेट्रिक ई-केवाईसी कराना बेहद जरूरी है।

इन सभी कार्यों को धरातल पर पूरा करने की मुख्य जिम्मेदारी पंचायत रोजगार सेवकों (PRS) को सौंपी गई है, लेकिन पंचायत स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की कमी से काम पिछड़ रहा है।

प्रखंडवार कुशल एवं अर्धकुशल मजदूरों की ई-केवाईसी स्थिति:

प्रखंड कुल मजदूर ई-केवाईसी पूरा उपलब्धि (%)
बड़हिया 1,077 60 5.57%
चानन 3,051 254 8.32%
हलसी 2,827 291 10.29%
लखीसराय 1,598 186 11.64%
पिपरिया 350 1 0.29%
रामगढ़ चौक 2,088 234 11.21%
सूर्यगढ़ा 2,572 213 8.28%
कुल योग 13,563 1,239 9.13%

लापरवाही बरतने वाले रोजगार सेवकों पर गिरेगी गाज

उप विकास आयुक्त (DDC) सुमित कुमार ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए समीक्षा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शत-प्रतिशत सत्यापन का लक्ष्य हासिल करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सभी पंचायत रोजगार सेवकों को प्राथमिकता के आधार पर मजदूरों की आधार सीडिंग, जॉब कार्ड सत्यापन और ई-केवाईसी का काम जल्द से जल्द पूरा करने का कड़ा निर्देश दिया गया है। कार्य में लापरवाही या कोताही बरतने वाले कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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"सभी पंचायत रोजगार सेवकों को शत-प्रतिशत मनरेगा मजदूरों की आधार सीडिंग, जॉब कार्ड सत्यापन और ई-केवाईसी का काम तुरंत पूरा करने का सख्त निर्देश दिया गया है। पारदर्शी भुगतान प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।"

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— सुमित कुमार, उप विकास आयुक्त , लखीसराय