लखीसराय में यहां बनेगी 'हर्बल वैली', लेमनग्रास की खेती से महकेगी कोड़ा जनजाति की किस्मत
लखीसराय के चानन स्थित महजनमा गांव को जिला प्रशासन 'हर्बल वैली' के रूप में विकसित कर रहा है, जहां जैविक, औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।

लखीसराय में यहां बनेगी 'हर्बल वैली', लेमनग्रास की खेती से महकेगी कोड़ा जनजाति की किस्मत (AI Generated Image)
HighLights
महजनमा को जैविक, औषधीय पौधों की 'हर्बल वैली' बनाया जाएगा।
कोड़ा जनजाति के परिवारों को खेती से स्थायी आय मिलेगी।
गांव में अस्थाई स्कूल शुरू, बच्चों की पढ़ाई सुनिश्चित हुई।
मृत्युंजय मिश्रा, लखीसराय। चानन के सुदूर जनजातीय क्षेत्र भलुई पंचायत के महजनमा की पहचान अब सिर्फ दुर्गम गांव के रूप में नहीं रहेगी। जिला प्रशासन ने इस क्षेत्र को जैविक, औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल शुरू की है।
कछुवा, महजनमा और सतघरवा के बीच स्थित इस क्षेत्र को आने वाले समय में हर्बल वैली के रूप में विकसित करने की योजना है।
इसकी शुरुआत पांच एकड़ जमीन में 15 हजार लेमनग्रास के पौधे लगाकर की गई है। उद्देश्य पहाड़ी कोड़ा जनजाति के परिवारों को खेती से जोड़कर उनके लिए स्थायी आय का रास्ता तैयार करना है।
महजनमा में केवल लेमनग्रास की खेती नहीं होगी। यहां फूलों और विभिन्न औषधीय पौधों की जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। तैयार फूल, लेमनग्रास और औषधीय पौधों को बाजार तक पहुंचाने के साथ उनके प्रसंस्करण की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।
आगे डिस्टिलेशन प्लांट स्थापित कर लेमनग्रास और फूलों से तेल निकालने की योजना है। इससे कच्चे उत्पाद को स्थानीय स्तर पर ही अधिक मूल्य वाले उत्पाद में बदला जा सकेगा।
ग्रामीणों को तेल निकालने की प्रक्रिया और इसके व्यावसायिक उपयोग की जानकारी भी दी जाएगी। इस तरह खेत से तैयार उत्पाद सीधे बाजार तक पहुंचाने का माडल तैयार होगा।
महजनमा में यह पहल सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहेगी। बच्चों की पढ़ाई शुरू कराने के लिए दो शिक्षकों के साथ अस्थायी विद्यालय की व्यवस्था की गई है। अभिभावकों से बच्चों को नियमित स्कूल भेजने की अपील की गई है।
स्वास्थ्य के लिए टीबी मुक्त भारत, एनीमिया मुक्त भारत और चिकित्सा आपके द्वा’ जैसे अभियानों से ग्रामीणों को जोड़ा जाएगा। करीब 30 जनजातीय लोगों से कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के लिए आवेदन भी लिए गए हैं। महजनमा में यह बदलाव एक दिन में नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीके से हो रहा है।
पहले जैविक खेती के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया गया। इसके बाद गांव को पेयजल से जोड़ने और बीएसएनएल टावर के लिए भूमि चिह्नित करने की पहल हुई।
तीसरे चरण में हर्बल मेडिसिनल गार्डन की नर्सरी स्थापित की गई। अब चौथे चरण में 15 हजार लेमनग्रास पौधों के साथ पूरी घाटी को औषधीय खेती के क्षेत्र में बदलने की नींव रखी गई है।
जिला प्रशासन की मंशा है कि महजनमा में खेती केवल जीविका का साधन न रहकर रोजगार और आय का माध्यम बने। खेतों में फूल और औषधीय पौधे उगें, वहीं उनका प्रसंस्करण हो, तेल और अन्य उत्पाद तैयार हों और फिर उन्हें बाजार उपलब्ध कराया जाए।
इस पूरी कड़ी से कोड़ा जनजाति के परिवारों को जोड़कर महजनमा को जनजातीय विकास के ऐसे माडल के रूप में विकसित करने की तैयारी है, जहां खेती के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वरोजगार भी कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़े।
रास्ता कटा तो महजनमा में पहुंचा स्कूल
बरसात में रास्ता कटने से स्कूल नहीं जा पा रहे महजनमा के बच्चों की पढ़ाई अब नहीं रुकेगी। गांव में दो शिक्षकों के साथ अस्थाई स्कूल शुरू कर दिया गया है। गांव में स्कूल शुरू होने से कोड़ा जनजाति के बच्चों और उनके अभिभावकों में खुशी है।
महजनमा से बाहर स्थित स्कूल तक जाने का रास्ता बारिश में कट गया था। इस कारण बच्चे विद्यालय नहीं जा पा रहे थे। गांव के भ्रमण के दौरान इसकी जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी ने तत्काल दो शिक्षकों की व्यवस्था कर गांव में ही पढ़ाई शुरू कराने का निर्देश दिया। इसके अगले दिन अस्थाई स्कूल शुरू हो गया।
बच्चों को प्रतिदिन स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों से अपील की गई है। साथ ही स्कूल की नियमित निगरानी और बच्चों को पोषण कार्यक्रम से जोड़ने का निर्देश दिया गया है। उप विकास आयुक्त ने सुमित कुमार बच्चों से बातचीत कर उन्हें नियमित पढ़ाई के लिए प्रेरित किया।
