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लखीसराय: सरकारी दफ्तरों में खुलेगी खर्च की कुंडली, हाजिरी के बाद ही मिलेगा वेतन

Published: Wed, 04 Nov 2026 04:14 PM (IST)

लखीसराय जिले के 33 सरकारी कार्यालयों में वित्तीय लेनदेन और कर्मचारियों की हाजिरी की विशेष जांच शुरू हो गई है, जो 22 दिसंबर तक चलेगी।

लखीसराय: सरकारी दफ्तरों में खुलेगी खर्च की कुंडली, हाजिरी के बाद ही मिलेगा वेतन

लखीसराय: सरकारी दफ्तरों में खुलेगी खर्च की कुंडली, हाजिरी के बाद ही मिलेगा वेतन

HighLights

  1. सरकारी दफ्तरों में वित्तीय लेनदेन और हाजिरी की विशेष जांच।

  2. लखीसराय के 33 कार्यालयों में 22 दिसंबर तक चलेगा अभियान।

  3. कर्मचारियों का वेतन अब हाजिरी सत्यापन के बाद ही मिलेगा।

मृत्युंजय मिश्रा, लखीसराय। सरकारी दफ्तरों में किस मद में कितनी राशि आई, कितनी खर्च हुई और कितना पैसा अब भी हिसाब में लंबित है, इसकी पड़ताल होगी। सरकारी राशि के इस्तेमाल से लेकर कर्मचारियों की हाजिरी तक पर प्रशासन की नजर रहेगी।

जिले के 33 सरकारी कार्यालयों में विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है। 26 अक्टूबर से शुरू हुआ यह अभियान 22 दिसंबर तक चलेगा। इसके लिए चार सदस्यीय टीम बनाई गई है, जो तय कार्यक्रम के अनुसार एक-एक कार्यालय पहुंचकर वहां के वित्तीय रिकॉर्ड खंगालेगी।

खास बात यह है कि अब एचआरएमएस के माध्यम से वेतन पाने वाले कर्मचारियों और पदाधिकारियों का वेतन अगले माह तभी जारी होगा, जब उनकी उपस्थिति का सत्यापन हो जाएगा। यानी कार्यालय में हाजिरी और सरकारी खजाने से मिलने वाले वेतन के बीच सीधा संबंध सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

वित्त विभाग के प्रधान सचिव की ओर से नौ अक्टूबर को जारी निर्देश के बाद जिला स्तर पर यह पहल की गई है।

जांच के दायरे में गृह और शिक्षा विभाग से लेकर जिला नजारत, सदर अस्पताल, प्रखंड कार्यालय, बाल विकास परियोजना, नगर परिषद, जिला परिषद, आपदा प्रबंधन, कृषि, सिंचाई, पथ निर्माण, ग्रामीण कार्य और परिवहन विभाग समेत 33 कार्यालय शामिल हैं।

प्रत्येक कार्यालय की जांच के लिए अलग-अलग तारीख तय की गई है। इसका मतलब है कि जिले के प्रमुख सरकारी कार्यालयों में करीब दो महीने तक वित्तीय लेन-देन और रिकॉर्ड की जांच चलती रहेगी।

कहां कितना पैसा आया, कहां हुआ खर्च, खुलेगा पूरा हिसाब

जांच टीम सिर्फ फाइलों की औपचारिक पड़ताल नहीं करेगी, बल्कि सरकारी पैसे के लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी देखेगी।

इसमें रोजाना की आमदनी और खर्च का ब्योरा रखने वाली रोकड़ बही, पहले निकाली गई लेकिन अब तक हिसाब नहीं दी गई राशि, भुगतान की रसीदें, बैंक में जमा-निकासी का रिकॉर्ड और चेक से भुगतान का ब्योरा शामिल है।

इन दस्तावेजों का मिलान कर यह देखा जाएगा कि सरकारी राशि का इस्तेमाल निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुआ है या नहीं। संबंधित कार्यालय प्रधान को सभी जरूरी कागजात उपलब्ध कराने होंगे। जांच के समय कार्यालय प्रधान और लेखा लिपिक की मौजूदगी भी अनिवार्य की गई है।

गलती छिपाने का मौका नहीं, उसी दिन जाएगी रिपोर्ट

जांच के दौरान रिकॉर्ड में गड़बड़ी, खर्च का हिसाब नहीं मिलने, नियमों की अनदेखी अथवा वित्तीय अनुशासन में कमी सामने आने पर उसी दिन अपर समाहर्ता और जिला लेखा पदाधिकारी को इसकी जानकारी देनी होगी। जांच पूरी होने के एक सप्ताह के भीतर पूरी रिपोर्ट भी सौंपनी होगी।

चार सदस्यीय टीम में सहायक कोषागार पदाधिकारी सौंदर्य कुमार सुमन, सहायक जिला लेखा पदाधिकारी राजन कुमार, जिला लेखा शाखा के लिपिक सतीश कुमार सिन्हा और कोषागार कार्यालय के डेटा एंट्री आपरेटर अजय कुमार राय शामिल हैं। जिला लेखा पदाधिकारी को पूरी जांच के समन्वय और निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।

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