लखीसराय में ऑस्ट्रेलियन मोतियों से सजा छोटी दुर्गा मंदिर, पंडाल में दिखेगी स्वर्ण मंदिर की झलक
लखीसराय के पुरानी बाजार स्थित छोटी दुर्गा महारानी मंदिर को शारदीय नवरात्र के लिए ऑस्ट्रेलियन मोतियों से सजाया गया है, ...और पढ़ें

लखीसराय के पुरानी बाजार स्थित छोटी दुर्गा महारानी मंदिर
HighLights
मंदिर ऑस्ट्रेलियन मोतियों से सजा, स्वर्ण मंदिर जैसा स्वरूप।
तीन प्रतिमाओं की पूजा, 35 वर्षों से अखंड ज्योति प्रज्वलित।
चांदी के पात्रों में भोग, डांडिया-गरबा उत्सव का आयोजन।
संवाद सहयोगी, लखीसराय। आस्था, अटूट परंपरा और कलात्मक सजावट का एक अनूठा संगम इस शारदीय नवरात्र में लखीसराय शहर के पुरानी बाजार स्थित प्रसिद्ध छोटी दुर्गा महारानी मंदिर में देखने को मिलेगा।
घनी आबादी के बीच मुख्य सड़क किनारे स्थित इस भव्य मंदिर के गर्भगृह को इस वर्ष पश्चिम बंगाल से आए कुशल कारीगरों ने विशेष रूप से 'आस्ट्रेलियन मोतियों' से सजाकर चमकाया है।
लखीसराय के पुरानी बाजार स्थित ऐतिहासिक छोटी दुर्गा महारानी मंदिर के गर्भगृह को बंगाल के कारीगरों ने आस्ट्रेलियन मोतियों से सजाया
कोलकाता से मंगाए गए रंग-बिरंगे फूलों और सोने-चांदी के आभूषणों से प्रतिदिन अलग-अलग रंगों में होगा माता रानी का भव्य श्रृंगार
एक ही परिसर में 3 प्रतिमाओं (प्राचीन पत्थर, प्राण प्रतिष्ठित और नव-निर्मित मिट्टी की प्रतिमा) की सामूहिक पूजा की है अनूठी परंपरा
108 फीट ऊंचे संगमरमर के मंदिर में पिछले 35 वर्षों से जल रहा है अखंड दीप; नवरात्र के दौरान 3 दिनों तक डांडिया-गरबा का होगा आयोजन
ताजे प्राकृतिक फूलों और चमकते मोतियों की आकर्षक जुगलबंदी के बीच मंदिर परिसर को अमृतसर के स्वर्ण मंदिर जैसा दिव्य और अलौकिक स्वरूप देने की भव्य तैयारी की गई है।
यहां माता रानी का सोने-चांदी के बहुमूल्य आभूषणों तथा विशेष रूप से कोलकाता से मंगाए गए रंग-बिरंगे फूलों से भव्य श्रृंगार करने की समृद्ध परंपरा रही है, जो नवरात्र के नौ दिनों तक प्रतिदिन अलग-अलग रंगों के संयोजन में श्रद्धालुओं के मुख्य आकर्षण का केंद्र बना रहेगा।
एक ही परिसर में तीन प्रतिमाओं का संगम; चांदी के पात्रों में छप्पन भोग और कन्या पूजन
छोटी दुर्गा महारानी मंदिर की सबसे विशिष्ट और ऐतिहासिक पहचान एक साथ तीन प्रतिमाओं की पूजा-अर्चना करने की परंपरा है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में एक ओर वर्षों पुरानी प्राचीन पत्थर की प्रतिमा और दूसरी ओर पूर्व से प्राण प्रतिष्ठित मां दुर्गा की प्रतिमा विराजमान हैं।
शारदीय नवरात्र के अवसर पर इन्हीं दोनों प्रतिमाओं के बीच मिट्टी की नई प्रतिमा स्थापित कर वैदिक रीति-रिवाज से अनुष्ठान किया जाता है। अष्टमी, नवमी और दशमी तिथि को इन तीनों प्रतिमाओं की सामूहिक पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है।
इस दौरान माता रानी को शुद्ध चांदी के पात्रों में छप्पन भोग अर्पित किया जाता है। नवमी तिथि को इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए चांदी के बर्तनों में ही कुंवारी कन्याओं को भोजन कराया जाता है।
क्षेत्र की महिलाएं बड़ी देवी महारानी की पूजा करने के उपरांत छोटी दुर्गा मंदिर पहुंचकर खोइंछा भरती हैं और परिवार के मंगल की मन्नतें मांगती हैं।
108 फीट ऊंचा संगमरमर का मंदिर; 35 वर्षों से निरंतर प्रज्वलित है अखंड दीप
लखीसराय का यह मंदिर न केवल अपनी भव्यता बल्कि अपने आध्यात्मिक प्रभाव के लिए भी जाना जाता है। पूरी तरह संगमरमर की नक्काशीदार शिलाओं से निर्मित यह मंदिर 108 फीट ऊंचा है।
इस मंदिर की एक और सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके गर्भगृह में पिछले 35 वर्षों से अखंड ज्योति बिना रुके निरंतर प्रज्वलित हो रही है। नवरात्र उत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
श्रद्धालुओं और युवाओं के उत्साह को देखते हुए इस बार मंदिर परिसर में तीन दिनों तक विशेष डांडिया और गरबा उत्सव का आयोजन किया जाएगा।
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