घर में भरा पानी, शिविर में बीमारी की मार, लखीसराय के बाढ़ पीड़ितों के सामने खड़ा हुआ रोटी और इलाज का संकट
लखीसराय के बड़हिया में गंगा और हरुहर नदी के बढ़ते जलस्तर से कई गांवों में बाढ़ आ गई है, जिससे सैकड़ों परिवार राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

रोज दाल-भात खाने से कई बीमार
HighLights
बाढ़ के कारण सैकड़ों परिवार राहत शिविरों में विस्थापित।
शिविरों में भोजन की कमी से लोग बीमार पड़ रहे।
मवेशियों के चारे और घर वापसी की चिंता सता रही।
अनंत कुमार शेखर, बड़हिया (लखीसराय)। घर में पानी घुस गया है। नौ दिनों से घर-द्वार छोड़कर राहत शिविर में रह रहे हैं। कब पानी पूरी तरह उतरेगा और कब अपने घर लौटेंगे, यही चिंता लगी रहती है। यहां खाने में रोटी नहीं मिलने से वे लोग सर्दी-जुकाम और बुखार से परेशान हो रहे हैं।
बड़हिया नगर की वार्ड संख्या 14 के सिकंदरपुर की रीता देवी, इंदिरा देवी और रंजन देवी की यह बात राहत शिविर में रह रहे सैकड़ों परिवारों की पीड़ा बयां करती है।
गंगा और हरुहर नदी के बढ़े जलस्तर से जैतपुर पंचायत के बिंद टोली सहित किशनपुर, सिकंदरपुर, खुशलटोला, बोधिटोल और गोलभट्ठा में घरों में पानी घुसा है। पिछले आठ दिनों से लोग अपने परिवार और बच्चों के साथ राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।
शिविर में करीब 482 लोग रह रहे
जगनानी धर्मशाला के शिविर में करीब 482 लोग रह रहे हैं। शुक्रवार सुबह चूड़ा-चीनी और करीब 65 बच्चों को ढाई सौ ग्राम की दर से दूध दिया गया। दोपहर में चावल, दाल और सब्जी मिली।
रीता देवी कहती हैं, खाना मिल रहा है, बच्चों को दूध भी दिया जा रहा है। लेकिन खाने में राज-रोज दाल-भात मिल रहा है। साफ-सफाई और बिजली ठीक है, लेकिन हमारे मवेशियों का क्या होगा? घर छोड़कर आए हैं, चारा नहीं मिल रहा है।'
रोज चावल-दाल खाकर बच्चे और घर के लोग बीमार पड़ गए
शिविर में बिंदु देवी गैस चूल्हे पर रोटी बना रही थीं। पास में पिंकी देवी चूड़ा भून रही थीं। दोनों ने कहा, दोनों समय चावल-दाल खाते-खाते परिवार के कई लोग बीमार हो गए। किसी को बुखार है तो किसी को सर्दी-खांसी। इसलिए आज रोटी बना रहे हैं। स्वास्थ्य शिविर में इलाज कराया जा रहा है, लेकिन बीमारी से पूरी तरह राहत नहीं मिली है।
प्लस टू उच्च विद्यालय बड़हिया के राहत शिविर में करीब 380 बाढ़ पीड़ित हैं, जिनमें लगभग 70 बच्चे हैं। यहां गोलभट्ठा, बिंद टोली और करारी पिपरिया के लोग रह रहे हैं। बिंद टोली की सरिता देवी और करारी पिपरिया के कैलाश भगत ने कहा, खाना तो मिल रहा है, लेकिन अभी तक प्लास्टिक नहीं मिला। जमीन पर सोना पड़ रहा है। मवेशियों के लिए भी चारा नहीं मिला है।
बीमार नाती को दवा पिलाते पहुंचे नाना, घर लौटने की चिंता
बेगूसराय के सीतारामपुर से संतोष दास अपनी बेटी और नाती का हाल जानने शिविर पहुंचे। उनका नाती तीन दिनों से बीमार है। वे उसे दवा पिला रहे थे। स्वास्थ्य शिविर में उसका इलाज चल रहा है।
गोलभट्ठा की गीता देवी, मंती देवी, गुड़िया देवी, काजल देवी तथा बिंद टोली की श्वेता देवी और ललिता देवी ने बताया कि शिविर में रहते हुए कई बच्चे और महिलाएं बीमार पड़ गए हैं। किसी का इलाज स्वास्थ्य शिविर में तो किसी का रेफरल अस्पताल बड़हिया में कराया जा रहा है। दो दिनों से पानी में कुछ कमी आई है, लेकिन मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं।
घरों में पानी रहने के कारण वापसी संभव नहीं है। शिविर में भोजन और इलाज का सहारा जरूर मिला है, मगर विस्थापन की पीड़ा बरकरार है। एक ओर बीमार बच्चों की चिंता है, दूसरी ओर मवेशियों के चारे की। और सबसे बड़ा सवाल है पानी उतरने के बाद जब घर लौटेंगे तो क्या घर रहने लायक बचा होगा?
