सड़क हादसों में घायल की मदद करें, बनें 'राह-वीर': बिहार सरकार देगी ₹25 हजार तक का पुरस्कार और सम्मान
बिहार सरकार ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वालों को 'राह-वीर' बनने की अपील की है। ऐसे मददगारों को ...और पढ़ें

सड़क हादसों में घायल की मदद करें (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
घायल की मदद करने वाले को 'राह-वीर' कहा जाएगा।
बिहार सरकार 25 हजार रुपये का पुरस्कार और सम्मान देगी।
मोटर वाहन अधिनियम 134ए के तहत कानूनी संरक्षण प्राप्त।
जागरण संवाददाता, लखीसराय। सड़क पर हादसा देखकर आगे बढ़ जाना आसान है, लेकिन उसी जगह रुककर घायल को अस्पताल पहुंचाने के लिए हाथ बढ़ाना किसी परिवार के लिए जिंदगी की सबसे बड़ी उम्मीद बन सकता है। इसी मानवीय संवेदना को सड़क सुरक्षा से जोड़ते हुए बिहार सरकार के परिवहन विभाग ने लोगों से राह-वीर बनने की अपील की है।
सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने वाले गुड सेमेरिटन को सरकार की ओर से सम्मानित करने के साथ 25 हजार रुपये तक का पुरस्कार दिया जा सकता है।
हादसे के बाद शुरुआती कुछ समय घायल के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में आसपास मौजूद व्यक्ति यदि एंबुलेंस बुलाने, पुलिस को सूचना देने या घायल को अस्पताल पहुंचाने में मदद करता है तो उसकी पहल जीवन बचाने में महत्वपूर्ण हो सकती है। आपात स्थिति में 112 पर पुलिस, एंबुलेंस सहित जरूरी सहायता के लिए सूचना दी जा सकती है।
मदद के लिए आगे आने पर कानूनी कार्रवाई का डर नहीं
अक्सर लोग पुलिस की पूछताछ या कानूनी प्रक्रिया के डर से दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने से पीछे हट जाते हैं। गुड सेमेरिटन के लिए कानूनी संरक्षण का प्रविधान है। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134ए में सद्भावना से दुर्घटना पीड़ित की आपात चिकित्सा या गैर-चिकित्सा सहायता करने वाले व्यक्ति को निर्धारित परिस्थितियों में नागरिक या आपराधिक कार्रवाई से संरक्षण दिया गया है।
एक फोन, एक मदद और किसी परिवार की बच सकती है दुनिया
परिवहन विभाग का संदेश है कि सड़क सुरक्षा केवल वाहन चलाने वाले की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर राहगीर की भी सामाजिक जिम्मेदारी है। सड़क पर घायल व्यक्ति को देखकर वीडियो बनाने या भीड़ का हिस्सा बनने के बजाय एंबुलेंस और पुलिस को सूचना देना तथा संभव हो तो सुरक्षित तरीके से अस्पताल पहुंचाने में सहयोग करना अधिक महत्वपूर्ण है।आज सड़क पर घायल पड़ा व्यक्ति किसी के लिए अनजान हो सकता है, लेकिन किसी घर में वहीं बेटा, पिता, भाई या परिवार का सहारा है।
विभाग का कहना है कि आपका कुछ मिनट रुकना उसके परिवार को जिंदगी भर का सहारा दे सकता है। इसलिए सड़क पर हादसा दिखे तो केवल राहगीर बनकर आगे न बढ़ें बल्कि राह-वीर बनकर किसी की जिंदगी बचाने की कोशिश करनी चाहिए।
