किशनगंज में एक ही खेत में उगेगी हल्दी, सब्जी और पपीता; 10 डिसमिल जमीन से होगी 90 हजार तक की कमाई
किशनगंज में प्रदान संस्था और कृषि विभाग के सहयोग से महिला किसानों के लिए बहुस्तरीय खेती को बढ़ावा दिया जा ...और पढ़ें

एक ही खेत में उगेगी हल्दी, सब्जी और पपीता (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
बहुस्तरीय खेती से महिला किसानों की आय बढ़ेगी।
10 डिसमिल जमीन से 90 हजार तक कमाई संभव।
किशनगंज में 500 महिलाओं को दिया जा रहा प्रशिक्षण।
अमरेंद्र कांत, किशनगंज। सीमित जमीन में अधिक उत्पादन और महिला किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से जिले के सीमावर्ती इलाकों में बहुस्तरीय खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदान संस्था और जिला कृषि कार्यालय के सहयोग से पहले चरण में सीमावर्ती क्षेत्र की 29 पंचायतों की 500 महिलाओं को इस खेती से जोड़ने की पहल की गई है। इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
वहीं, कुछ गांवों में महिलाओं को प्रशिक्षित कर बहुस्तरीय खेती भी कराई जा रही है। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को कम जमीन में विभिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन कर अतिरिक्त आमदनी अर्जित करने के लिए सक्षम बनाना है।
एक ही खेत में कई स्तरों पर होगी खेती
जिला कृषि पदाधिकारी प्रभात कुमार ने बताया कि बहुस्तरीय खेती ऐसी कृषि पद्धति है, जिसमें एक ही खेत में जमीन के नीचे, सतह पर, ऊंचाई पर और खेत की मेड़ पर अलग-अलग फसलें उगाई जाती हैं।
इसके तहत मिट्टी के अंदर अदरक और हल्दी, जमीन की सतह पर हरी सब्जियां तथा बांस और तार के सहारे लौकी व खीरा जैसी लतावर्गीय सब्जियों की खेती की जा सकती है। वहीं, खेत की मेड़ पर पपीता और सहजन के पौधे लगाए जा सकते हैं।
इस पद्धति से एक ही खेत में कई तरह की फसलों का उत्पादन संभव होता है। इससे कम जमीन का बेहतर उपयोग होने के साथ किसानों को आमदनी के कई स्रोत मिलते हैं। किसी एक फसल के उत्पादन या बाजार भाव में गिरावट आने पर दूसरी फसलों से होने वाली कमाई भी सहारा बन सकती है।
10 डिसमिल जमीन से 90 हजार रुपये तक कमाई का अनुमान
बहुस्तरीय खेती के तैयार किए गए मॉडल के अनुसार 10 डिसमिल जमीन पर सालाना लगभग 80 से 90 हजार रुपये की कुल कमाई का अनुमान है। इसमें खरीफ मौसम में 45 से 50 हजार रुपये और रबी मौसम में 35 से 40 हजार रुपये की कमाई का आकलन किया गया है।
इस खेती को शुरू करने के लिए बांस, तार, विभिन्न फसलों के बीज या पौधे, गोबर की खाद, सिंचाई के लिए पानी और नियमित देखभाल की जरूरत होती है। महिलाओं को प्रशिक्षण के माध्यम से खेती की इस पद्धति की जानकारी दी जा रही है, ताकि वे उपलब्ध जमीन पर विभिन्न फसलों का उत्पादन कर सकें।
जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि जिला पदाधिकारी के निर्देशन में सीमावर्ती क्षेत्र की 29 पंचायतों की 500 महिलाओं को पहले चरण में इस पहल से जोड़ने का लक्ष्य है।
ग्रामीण महिलाओं के लिए खेती के नए अवसर तैयार करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। कुछ गांवों में इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। पहल के माध्यम से कम जमीन में अधिक उत्पादन, फसलों की विविधता और महिला किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
