किशनगंज। विद्युत आपूर्ति प्रमंडल ठाकुरगंज अंतर्गत ठाकुरगंज प्रखंड में आए दिनों विद्युत आपूर्ति की लचर व्यवस्था से उपभोक्ताओं में काफी रोष व्याप्त है। ठाकुरगंज में औसतन सात से आठ घंटे विद्युत आपूर्ति 33 केवीए में फाल्ट बताकर बंद कर दी जाती हैं जिससे आमजनों को भारी कठिनाई होती है। उपभोक्ताओं की समस्या को देखते हुए नपं अध्यक्ष प्रमोद कुमार चौधरी ने उपमुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद सिंह एवं ऊर्जा मंत्री विजेंद्र यादव को ध्यान आकृष्ट कराया है। उन्होंने तीन वर्ष पूर्व सरकार द्वारा राशि आवंटित किए जाने के बावजूद ठाकुरगंज में पावर ग्रिड की स्थापना में विलंब होने पर भी मंत्रियों से ध्यान आकृष्ट कराया है।

विगत दो माह से ठाकुरगंज नगर पंचायत सहित प्रखंड में बिजली व्यवस्था बुरी तरह से चरमराई हुई है। बदहाल बिजली आपूर्ति पर सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि किशनगंज से ठाकुरगंज के बीच 33 केवीए लाइन का तार और पिन व इंसुलेटर बदलने का कार्य एनबीपीडीसीएल द्वारा अभी हाल ही में किया गया, फिर भी समस्याएं उत्पन्न हो रही है। इसका यह साबित होता है कि कार्य सही तरीके से नहीं कराया गया। ऐसे लोगों के विरूद्ध जांच कर कार्रवाई किये जाने की जरूरत है क्योंकि विद्युत आपूर्ति बाधित होने के कारण कल-कारखाने, फैक्ट्रियां, बिजली पर आधारित दूसरे धंधे बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। नपं अध्यक्ष ने बताया कि सारी समस्याओं का एक मात्र हल ठाकुरगंज में 220/132/33 केवीए ग्रिड उपकेंद्र की स्थापना हैं क्योंकि बारिश व वज्रपात आने की स्थिति में 52 किमी दूर किशनगंज से 33 केवीए लाइन आने के कारण समस्या उत्पन्न हो जाती है। बताते चलें कि बिहार सरकार सैकड़ों करोड़ की लागत से पावर ग्रिड निर्माण एवं ट्रांसमिशन लाइन का टेंडर करा चुकी है। तीन साल से अधिक समय पूर्व इस मद का पैसा आवंटित हो कर पड़ा हुआ है। बीएसपीटीसीएल को ठाकुरगंज में पावर ग्रिड बनाना है। उन्होंने इसके लिए जमीन चिन्हित भी कर ली है और संबंधित ट्रांसमिशन लाइन का टेंडर सितंबर 2018 में ही हो चुका है। तीन साल में भी ग्रिड का निर्माण नहीं हो पाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

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