जागरण संवाददाता, किशनगंज : नशे के रूप में उपयोग किए जाने वाले प्रतिबंधित कफ सीरप का कारोबार करने वाले किशनगंज के मोतीबाग के दवा व्यवसायी अजय कुमार साहा पर धीरे-धीरे कानून का शिकंजा कसा और पूरा परिवार जेल पहुंच गया। वर्षो से बंगाल सहित अन्य राज्यों से प्रतिबंधित कफ सीरप का तस्करी कर किशनगंज लाता और स्थानीय स्तर पर सप्लाई के अलावा बिहार के विभिन्न जिलों में सप्लाई करता था। बताया जाता है कि किशनगंज से सटे बंगाल के भी कई जिलों में भी प्रतिबंधित कफ सीरप सप्लाई करने वाला मुख्य तस्कर अजय कुमार साहा था। तस्करी के इस खेल में अकूत संपत्ति तो अर्जित कर लिया लेकिन धीरे-धीरे दवा व्यवसायी अजय कुमार साहा, पत्नी सोनी देवी और पुत्र नीतीश कुमार साहा पूरे परिवार कानूनी शिकंजे में फंसकर जेल पहुंच गया।

मंगलवार को चकुलिया पुलिस किशनगंज पुलिस के सहयोग से पूर्व में गिरफ्तार दवा व्यवसायी के चुड़ीपट्टी के आजाद मार्केट स्थित सोनी मेडिकल दवा दुकान और मोतीबाग स्थित घर में छापेमारी की। इस दौरान उसकी पत्नी सोनी देवी को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई, जिसे बुधवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। बड़े पैमाने पर तस्करी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूर्व में 2 सितंबर 2021 को दवा व्यवसायी खुद चकुलिया पुलिस के हत्थे करीब 21 लाख रुपये के प्रतिबंधित कफ सीरप के साथ गिरफ्तार हुआ था। वहीं जांच में सामने आया कि कुछ सालों में पत्नी के खाता से दवा खरीद बिक्री के लिए करीब चार करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन किया गया। यह हर किसी को अचंभित कर रहा है और चकुलिया पुलिस वाले भी इतने बड़े पैमाने पर ट्रांजेक्शन से हो रहे प्रतिबंधित कफ सीरप के कारोबार से अचंभा में पड़े हुए हैं।

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पुलिस खंगाल रही बैकवर्ड और फारवर्ड लिक::

बंगाल पुलिस द्वारा किशनगंज के दवा व्यवसायी के परिवार सहित साक्ष्य के साथ प्रतिबंधित दवा तस्करी के आरोप में गिरफ्तारी के बाद अब दवा तस्करी के बैकवर्ड और फारवर्ड लिक को खंगालने में जुट गई है। ताकि तस्करी से जुड़े सप्लायर और आपूर्तिकर्ता को दबोचा जा सके। इसके लिए गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के साथ उसके मोबाइल डिटेल और खाता की जांच चकुलिया थाना पुलिस ने तेज कर दी है। कार्रवाई और जांच से स्थानीय स्तर पर ऐसे कारोबार में जुटे कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।

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स्थानीय पुलिस को नहीं लगी थी भनक::

किशनगंज के दवा व्यवसायी प्रतिबंधित कफ सीरप का कारोबार सालों से कर रहा था। इसकी भनक किशनगंज पुलिस को नहीं लगी, यह स्थानीय पुलिस पर भी एक सवाल खड़ा कर रहा है। पुलिस स्थानीय स्तर पर कई बार छोटी-छोटी कफ सीरप की खेप पकड़ी भी लेकिन कभी गरहराई से उसकी जांच करना मुनासिब नहीं समझी नतीजा रहा कि धीरे-धीरे दवा व्यवसायी अजय कुमार साहा का स्थानीय स्तर से लेकर बंगाल और बिहार तक प्रतिबंधित कफ सीरप तस्करी का धंधा चलता रहा।

स्थानीय स्तर पर कई दुकानों में बेचा जा रहा नशीले कफ सीरप::

प्रतिबंधित नशीले कफ सीरप के इस्तेमाल का प्रचलन युवाओं में बढ़ गई है। युवा पीढ़ी इस दलदल में फंसते जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण है कि कुछ ऊंची कीमत पर आसानी से यह सीरफ कई मेडिकल स्टोर के अलावा पान एवं चाय दुकानों पर भी उपलब्ध हो जाता है। व्यवसायी अपनी मोटी कमाई को देखते हुए युवा पीढ़ी को नशा के दलदल में धकेलने में जुटे हुए हैं।

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कोट के लिए:-

किशनगंज से गिरफ्तार दवा व्यवसायी की पत्नी पर कानूनी कार्रवाई कर न्यायालय भेज दिया गया। जांच में यह सामने आया था कि उसके खाते से करोड़ों रुपये का ट्रांजेक्शन नशीले कफ सीरप को लेकर हुई है। मामले में पूर्व में उसके पति और पुत्र भी गिरफ्तार हो चुके हैं। जांच को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि प्रतिबंधित दवा के नेटवर्क से जुड़े अन्य पर कार्रवाई हो सके।

सोनम लामा, चकुलिया थानाध्यक्ष

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कोट के लिए:-

कोडिन युक्त कफ सीरप बेचने के लिए दवा दुकानदार को ग्राहक से डाक्टर का पर्ची देखने के बाद कैशमेमो काटकर दवा देना है। बिना डाक्टर के पर्ची के कोडिन युक्त दवा ग्राहक को नहीं देना है। इसके लिए मेडिकल दुकान की लगातार जांच अभियान भी चलाया जा रहा है आगे भी चलाया जाएगा।

राजकुमार रंजन, ड्रग इंस्पेक्टर

Edited By: Jagran