विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

गोरखपुर-सिलीगुड़ी Expressway के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रोसेस शुरू, 21 दिनों के अंदर दर्ज करा सकते हैं आपत्ति

Published: Mon, 05 Oct 2026 01:53 PM (IST)

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के लिए किशनगंज जिले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। प्रभावित रैयत ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

संवाद सूत्र, ठाकुरगंज (किशनगंज)। गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे परियोजना को लेकर किशनगंज जिले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3ए के तहत भूमि अधिग्रहण की मंशा संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है।

24 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना को भारत के राजपत्र में एक अक्टूबर 2026 को प्रकाशित किया गया है। अधिसूचना जारी होने के साथ ही परियोजना के लिए चिह्नित जमीन के रैयतों के बीच हलचल बढ़ गई है।

किशनगंज के इन इलाकों में होगा जमीन अधिग्रहण 

अधिसूचना के मुताबिक किशनगंज जिले में गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के किमी 434.45से  506.95 किमी तक के हिस्से के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित है।

सरकार ने अधिग्रहण का उद्देश्य एक्सप्रेस-वे के निर्माण, रखरखाव, प्रबंधन एवं संचालन के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराना बताया है।

गजट में प्रकाशित शेड्यूल में किशनगंज जिले के ठाकुरगंज और टेढ़ागाछ अंचल की भूमि का विस्तृत विवरण दिया गया है।

उपलब्ध अधिसूचना में ठाकुरगंज तालुक के अंतर्गत बेसर बाटी, पथरिया, नेजागाछ, गोथरा और कनकपुर समेत विभिन्न राजस्व गांवों की जमीन को परियोजना के दायरे में शामिल किया गया है।

इससे संबंधित गांवों के रैयतों को अब अपनी जमीन से जुड़े राजस्व अभिलेखों और अधिसूचना में दर्ज विवरण की जांच करनी होगी।

21 दिनों में दर्ज करा सकते हैं आपत्ति 

अधिसूचना के अनुसार, अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित भूमि में किसी प्रकार का हित रखने वाला व्यक्ति राजपत्र में अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से 21 दिनों के भीतर लिखित आपत्ति दर्ज करा सकता है। आपत्ति जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, किशनगंज के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

सक्षम प्राधिकारी आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से अथवा विधि सम्मत प्रतिनिधि के माध्यम से अपना पक्ष रखने और सुनवाई का अवसर प्रदान करेगा। ऐसे में प्रभावित रैयतों के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर आपत्ति दर्ज कराना महत्वपूर्ण होगा।

भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद संबंधित रैयतों के बीच अपनी जमीन के खाता संख्या, प्लॉट संख्या, रकबा और मौजा आदि का मिलान करने की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। रैयतों को गजट में प्रकाशित विवरण का राजस्व अभिलेखों से मिलान कर यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी भूमि का विवरण सही दर्ज है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अधिग्रहण से संबंधित भूमि का नक्शा और अन्य विवरण सक्षम प्राधिकारी के कार्यालय में निरीक्षण के लिए उपलब्ध रहेगा। संबंधित रैयत वहां जाकर अधिसूचना में दर्ज विवरण और अपनी भूमि से जुड़े अभिलेखों की जांच कर सकते हैं।

यूपी से बंगाल तक बनेगा फास्टे रूट 

बताते चलें कि गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे को पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तर बंगाल के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में देखा जा रहा है।

किशनगंज इस परियोजना के लिहाज से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह जिला उत्तर बिहार को उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने वाले प्रमुख गलियारे में स्थित है।

गजट अधिसूचना जारी होने के बाद अब किशनगंज में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अगले चरण में प्रवेश करेगी। आपत्तियों की सुनवाई, भूमि विवरण का सत्यापन और आगे की अधिग्रहण प्रक्रिया पर ठाकुरगंज समेत परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों के रैयतों की नजर रहेगी।

यह भी पढ़ें- दरभंगा में जिस ड्रेनेज सिस्टम से मिलनी थी राहत, वही बना आफत, 270 करोड़ की योजना में आउटलेट बंद