यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 11, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
शिक्षा की डगर पर 'टर्न द बस' का सफर
किशनगंज। कोरोना काल में स्कूल-कॉलेज बंद रहने से बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित हुआ। इस का

किशनगंज। कोरोना काल में स्कूल-कॉलेज बंद रहने से बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित हुआ। इस कारण ग्रामीण इलाकों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने के लिए जीविका ने एक नई पहल की है। यू ट्यूब वीडियो व एप के माध्यम से छात्रों को पाठ्यक्रम की तैयारी के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने के लिए अमेरिका बेस्ड एनजीओ 'टर्न द बस' के साथ करार किया गया है।
प्रारंभिक दौर में बिहार स्कूल एक्जामिनेशन बोर्ड की तैयारी के लिए 12वीं, यानी इंटरमीडिएट (कला) के पाठ्यक्रम को लेकर वीडियो तैयार कर यूट्यूब पर अपलोड किया गया। अब एप डेवलप किया जा रहा है। जल्द ही 10वीं बोर्ड, यानी मैट्रिक के पाठ्यक्रम से संबंधित वीडियो तैयार किए जाएंगे। पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए जेएनयू, आइआइएम व आइआइटी जैसे बड़े शिक्षण संस्थानों के पास आउट छात्रों व शिक्षकों की भी मदद ली जा रही है। इसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों के छात्रों को नि:शुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है।
इसके लिए जीविका के साथ ''टर्न द बस'' का तीन साल के लिए करार हुआ है। पारस्परिक सहयोग से जीविका के साथ मिलकर स्मार्टफोन के माध्यम से ग्रामीण बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन देने में ''टर्न द बस'' मदद करेगी। खासकर उन बच्चों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जिन्हें यह मालूम है कि स्मार्टफोन उनके लिए बदलाव ला सकता है। इसलिए शुरूआती दौर में 12वीं व 10वीं के बच्चों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। भविष्य में अन्य कक्षा के छात्रों के लिए भी इसका विस्तार किए जाने की योजना है। ''टर्न द बस'' करियर चुनने में भी छात्रों को मदद करेगी। करियर बनाने तक मार्गदर्शन व उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराने के साथ छात्रों को संभालने काया जाएगा। ऐसे तैयार किया जा रहा पाठ्यक्रम 'टर्न द बस' की सीनियर प्रोग्राम मैनेजर डॉ. सरिता बताती हैं कि अपने नेटवर्क के माध्यम से शिक्षकों, पेशेवरों व आइआइटी व आइआइएम के शिक्षकों के माध्यम से बिहार बोर्ड के पाठ्यक्रम के अनुसार प्रत्येक विषय के प्रत्येक अध्याय के लिए हिदी में वीडियो तैयार किया जाता है। जिसमें अभ्यास प्रश्न पत्र के अलावा गत वर्षों के बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्नों के हल के लिए प्रत्येक अध्याय और टेस्ट पेपर (क्विज) के प्रश्न उत्तर भी तैयार किया जाता है। इसमें जेएनयू, आइआइएम व आइआइटी जैसे बड़े शिक्षण संस्थानों के पास आउट छात्रों की भी मदद ली जा रही है। एक लाख बच्चों तक पहुंच बनाने का है लक्ष्य जीविका के माध्यम से ग्रामीण परिवेश के छात्रों तक पहुंच बनाई जा रही है। गत शैक्षणिक सत्र में सिर्फ इंटर(कला) के छात्रों को कवर किया गया। विगत सत्र में वाट्सएप समूह के माध्यम से छात्रों को जोड़ा गया। प्रत्येक समूह में 200 लड़के व लड़कियों को जोड़ कर वीडियो के माध्यम से सभी विषयों की पढ़ाई कराई गई। इस सत्र में 10 वीं व 12 वीं के एक लाख छात्रों को निश्शुल्क क्वालिटी एजुकेशन देने की योजना है।
कोट - ग्रामीण इलाकों के बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ''टर्न द बस'' के साथ एमओयू किया गया है। जीविका के प्लेटफॉर्म व नेटवर्क के माध्यम से ग्रामीण इलाकों के गरीब बच्चों को 10 वीं व 12 वीं की पढ़ाई में मदद की जा रही है। - कोयल, यंग प्रोफेशनल जीविका
