किशनगंज: मसाला उत्पादन से आसीना बनीं आत्मनिर्भर, 40 जीविका दीदियों को भी दिया रोजगार
किशनगंज की आसीना खातून ने जीविका समूह से जुड़कर मसाला उत्पादन का व्यवसाय शुरू किया, जिससे वह आत्मनिर्भर बनीं। उनके ...और पढ़ें

मसाला उत्पादन से आसीना खातून बनीं आत्मनिर्भर, 40 महिलाओं को मिला रोजगार (AI Generated Image)
HighLights
आसीना खातून ने मसाला उत्पादन से स्वरोजगार की राह पकड़ी।
उनके उद्यम से 40 जीविका दीदियों को मिला रोजगार।
मासिक आय 60 हजार रुपये तक पहुंच कर आत्मनिर्भर बनीं।
जागरण संवाददाता, किशनगंज। कभी परिवार की आर्थिक तंगी से जूझने वाली किशनगंज सदर प्रखंड की आसीना खातून आज स्वरोजगार के दम पर आत्मनिर्भर बन गई हैं। घर पर ही हाथ से मसाला तैयार करने का काम शुरू करने वाली आसीना के उत्पाद अब किशनगंज के अलावा अररिया, पूर्णिया और पश्चिम बंगाल के कई शहरों तक पहुंच रहे हैं।
उन्होंने अपने कारोबार से न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि आसपास के चार स्वयं सहायता समूहों की 40 जीविका दीदियों को भी रोजगार से जोड़ा है।
समूह से जुड़कर मिली आगे बढ़ने की प्रेरणा
किशनगंज सदर प्रखंड की मोतीहारा पंचायत के पानीसाल गांव निवासी आसीना खातून के सामने एक समय परिवार चलाने की बड़ी चुनौती थी। घर में लकवाग्रस्त पिता की देखभाल, पांच बहनों और एक छोटे भाई की जिम्मेदारी भी उन पर थी।
पति इम्तियाज अली की मजदूरी से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था।
वर्ष 2024 में आसीना रौशनूर जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह की नियमित बैठकों में शामिल होने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा।
एक बैठक में उन्होंने अपनी आर्थिक परेशानी साझा की तो समूह की अन्य महिलाओं ने उन्हें घर पर मसाला तैयार कर बेचने का सुझाव दिया। इस काम में पहले से रुचि और अनुभव होने के कारण उन्होंने इसे आजीविका का साधन बनाने का निर्णय लिया।
10 हजार रुपये से दो लाख तक का ऋण लेकर बढ़ाया कारोबार
आसीना ने स्वयं सहायता समूह और ग्राम संगठन से अलग-अलग चरणों में 10 हजार रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक का ऋण लिया। इसके बाद घर पर ही हल्दी, जीरा और धनिया जैसे मसालों के साथ चना और मकई का सत्तू तैयार करने का काम शुरू किया।
शुरुआत में उनके उत्पाद गांव और आसपास के बाजारों तक सीमित थे। धीरे-धीरे कारोबार बढ़ा और उत्पाद किशनगंज के साथ अररिया, पूर्णिया तथा पश्चिम बंगाल के कई शहरों तक पहुंचने लगे। इससे उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हुई और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगी।
40 महिलाओं को रोजगार, महीने में 15 से 20 हजार तक आमदनी
आसीना की सफलता का असर दूसरी महिलाओं पर भी पड़ा। उन्होंने आसपास के चार जीविका समूहों की 40 महिलाओं को इस काम से जोड़ा। इन महिलाओं को भी काम के माध्यम से प्रतिमाह 15 हजार से 20 हजार रुपये तक की आमदनी होने लगी है।
आसीना के अनुसार मसाला उत्पादन और बिक्री से उन्हें अब प्रतिमाह करीब 60 हजार रुपये की आमदनी होती है। उन्होंने बिहार और पश्चिम बंगाल में आयोजित सरस मेला तथा मेगा फूड एक्सपो में भी अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री की है। पश्चिम बंगाल के सरस मेले में उन्हें बिक्री श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार भी मिला।
जीविका के सहयोग से बदली जिंदगी
आसीना बताती हैं कि जीविका समूह से उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरणा के साथ पूंजीगत सहयोग भी मिला। अपने कारोबार की शुरुआत करने के बाद अब वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं और छोटे भाई-बहनों को आगे बढ़ने में मदद कर रही हैं।
