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विदेश में नौकरी के नाम पर ठगी व कबूतरबाजी! पाकिस्तानी एजेंट से जुड़ा गिरोह का तार, पटना से AIMIM नेता समेत 2 गिरफ्तार

Published: Sun, 18 Oct 2026 07:45 PM (IST)

Kishanganj Donkey Route Fake Job Racket: सीमांचल के युवाओं को विदेश में नौकरी का झांसा देकर ठगने वाले अंतरराज्यीय कबूतरबाजी ...और पढ़ें

Kishanganj Donkey Route Fake Job Racket: हाजी नाहिद गनी (निवासी वैसा, पूर्णिया)

Kishanganj Donkey Route Fake Job Racket: हाजी नाहिद गनी (निवासी वैसा, पूर्णिया) 

HighLights

  1. सीमांचल के युवाओं से विदेश नौकरी का झांसा।

  2. एआईएमआईएम नेता हाजी नाहिद गनी गिरफ्तार।

  3. पाकिस्तानी एजेंटों से जुड़े गिरोह के तार।

सुभजीत शेखर, जागरण, किशनगंज। Kishanganj Donkey Route Fake Job Racket: खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया में सुनहरी नौकरी का सपना दिखाकर सीमांचल के सीधे-सादे बेरोजगार युवाओं को ठगी के दलदल में धकेलने वाले एक अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय कबूतरबाजी गिरोह का सनसनीखेज पर्दाफाश हुआ है। इस गिरोह के तार मलेशिया में डेरा जमाए पाकिस्तानी एजेंटों के साथ सीधे तौर पर जुड़े मिले हैं।

बिहार पुलिस की विशेष टीम ने एसटीएफ (STF) के सहयोग से त्वरित कार्रवाई करते हुए सिंडिकेट के सरगना व कथित एआईएमआईएम नेता हाजी नाहिद गनी (निवासी वैसा, पूर्णिया) और उसके प्रमुख सहयोगी मोहम्मद तवरेज (निवासी कलठिया, अनगढ़) को पटना से गिरफ्तार कर लिया है।

डंकी रूट से अवैध घुसपैठ और बंधुआ मजदूरी का खेल

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपित अपनी कंपनियों—'हाजी नाहिद गनी प्राइवेट लिमिटेड' और 'ताइबा इंटरनेशनल टूर एंड ट्रैवल्स' के जरिए युवाओं को वैध वर्क परमिट पर विदेश भेजने का झांसा देते थे। इसके नाम पर प्रति युवक एक से दो लाख रुपये तक की मोटी रकम ऐंठी जाती थी।

शिकायतों के मुताबिक, मलेशिया में सक्रिय एक पाकिस्तानी एजेंट के साथ मिलीभगत कर युवाओं को थाईलैंड तक टूरिस्ट वीजा पर ले जाया जाता था और फिर वहां से 'डंकी रूट' (अवैध रास्तों और जंगलों) के जरिए मलेशिया की सीमा में घुसपैठ कराई जाती थी। वहां पहुंचते ही युवकों के पासपोर्ट जब्त कर उन्हें एक कमरे में बंधक बना लिया जाता था और वादे के विपरीत बेहद खतरनाक व अमानवीय परिस्थितियों में बंधुआ मजदूरों की तरह काम कराया जाता था।

1.80 लाख देकर फंसा युवक

पीड़ित पिता मोहम्मद सुलेमान की लिखित शिकायत इस गिरोह की बर्बरता की गवाही देती है। उन्होंने बताया कि उनके बेटे नूरजफर को विदेश में नौकरी दिलाने के लिए आरोपितों ने 1.80 लाख रुपये वसूले थे। बीते 9 सितंबर 2026 को युवक को पटना से दिल्ली और फिर थाईलैंड भेजा गया। इसके बाद 18 सितंबर को अवैध डंकी रूट से मलेशिया में घुसा दिया गया।

जंगलों में छिपकर बचाई जान

मलेशिया के सेनाई में उसे जबरन काम पर झोंक दिया गया। इसी बीच जब मलेशियाई आव्रजन पुलिस (Immigration Police) ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ छापेमारी की, तो भगदड़ मच गई। नूरजफर किसी तरह घने जंगलों में छिपकर जान बचाने में कामयाब रहा और स्थानीय संपर्कों की मदद से बदहवास हालत में भारत लौट सका। परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने युवकों की स्वदेश वापसी की गुहार लगाई, तो उल्टे लाखों रुपये की अतिरिक्त फिरौती मांगी गई।

अवैध संपत्ति होगी जब्त

एसडीपीओ खुशरू सिराज ने बताया कि पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने तकनीकी सर्विलांस और खुफिया सूचनाओं के आधार पर पटना में दबिश देकर दोनों को धर दबोचा। आरोपितों के खिलाफ जिले के बहादुरगंज, कोचाधामन और विशनपुर थानों में संगठित धोखाधड़ी, जबरन वसूली और मानव तस्करी की धाराओं में कई केस दर्ज हैं।

न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपित

पुलिस अब इनके बैंक खातों, हवाला नेटवर्क और विदेशी संपर्कों की वित्तीय पड़ताल कर रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस अवैध धंधे से अर्जित की गई चल-अचल संपत्तियों को कुर्क और जब्त करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दोनों को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

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पुलिस प्रशासन ने विदेश जाने के इच्छुक युवाओं से अपील की है कि वे बिना जांच-परख किसी अनधिकृत एजेंट या ट्रेवल एजेंसी को मोटी रकम न सौंपें। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा अधिकृत भर्ती एजेंसियों, वैध रोजगार वीजा, वैध ऑफर लेटर और नियोक्ता के कानूनी दस्तावेजों की पूरी तस्दीक करने के बाद ही कदम आगे बढ़ाएं।

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क‍िशनगंज पुलिस प्रशासन