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138 वर्षों से सेवा की मिसाल बनी खगड़िया गौशाला, शुद्ध दूध के लिए रहती है एडवांस बुकिंग, बाढ़ और कोरोना को दी मात

Published: Tue, 27 Oct 2026 02:55 PM (IST)

Khagaria Gaushala 138 Years History: खगड़िया गौशाला 138 वर्षों से गोवंश संरक्षण और सेवा का प्रतीक बनी हुई है, जिसने ...और पढ़ें

Khagaria Gaushala 138 Years History: 138 वर्षों से गोवंश संरक्षण का केंद्र बनी खगड़िया गौशाला

Khagaria Gaushala 138 Years History: 138 वर्षों से गोवंश संरक्षण का केंद्र बनी खगड़िया गौशाला

HighLights

  1. खगड़िया गौशाला 138 वर्षों से गोवंश संरक्षण का केंद्र।

  2. प्रतिदिन 157 लीटर शुद्ध दूध का उत्पादन, भारी मांग।

  3. 17 से 26 नवंबर तक 10 दिवसीय गोपाष्टमी महोत्सव।

कौशल किशोर सिंह, खगड़िया। Khagaria Gaushala 138 Years History: 138 वर्षों से गोवंश संरक्षण का केंद्र बनी खगड़िया गौशालासेवा, आस्था और समर्पण की मिसाल बनी खगड़िया गौशाला पिछले 138 वर्षों से निरंतर गोवंश संरक्षण और संवर्धन का संदेश दे रही है। प्राकृतिक आपदाओं के थपेड़े हों या आर्थिक संकट का दौर, इस ऐतिहासिक गौशाला ने कभी अपनी परंपरा को टूटने नहीं दिया।

वर्ष 1987, 2004 और 2007 की विनाशकारी बाढ़ के दौरान जब पूरा इलाका जलमग्न हो गया था, तब गोवंश को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर उनकी जान बचाई गई। वैश्विक महामारी कोरोना काल के दौरान गौशाला की आर्थिक आय पर गंभीर असर पड़ा, लेकिन गौसेवकों और कमेटी के अथक प्रयासों से गोवंश की सुरक्षा और पोषण में कोई कमी नहीं आने दी गई।

231 गोवंश की देखरेख, 157 लीटर दूध का हो रहा उत्पादन

वर्तमान में खगड़िया जिला मुख्यालय के राजेंद्र सरोवर के समीप संहौली स्थित गौशाला परिसर में कुल 231 गोवंश की समुचित देखरेख की जा रही है। खगड़िया गौशाला कमेटी के मंत्री प्रदीप दहलान के अनुसार, यहां गोवंश की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। परिसर में करीब 60 शुद्ध देसी गायें हैं।

गौशाला में प्रतिदिन लगभग 157 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। दूध की शुद्धता, ताजगी और स्वच्छता के कारण स्थानीय उपभोक्ताओं के बीच इसकी भारी मांग है और इसके लिए बाकायदा अग्रिम बुकिंग (एडवांस बुकिंग) रहती है।

20 लीटर से 157 लीटर तक का संघर्षपूर्ण सफर

गौशाला का यह मुकाम आसान नहीं रहा है। वर्ष 2006 से 2010 के बीच एक ऐसा कठिन दौर भी आया जब व्यवस्था चरमरा गई थी और दैनिक दूध उत्पादन सिमटकर मात्र 20 से 25 लीटर रह गया था। लेकिन वर्ष 2010 के बाद कमेटी के कुशल प्रबंधन और स्थानीय लोगों के सहयोग से न केवल गोवंश के स्वास्थ्य में सुधार हुआ, बल्कि दूध उत्पादन में भी कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई।

मंत्री प्रदीप दहलान बताते हैं कि यह गौशाला मात्र एक संस्था नहीं, बल्कि ऐतिहासिक 'फड़किया' अंचल की जीवंत सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान है। हाल ही में दक्षिणी चारदीवारी की मरम्मत कराकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और रात्रि के समय सभी गोवंश को सुरक्षित खटाल के अंदर रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

17 से 26 नवंबर तक मनेगा 10 दिवसीय गोपाष्टमी महोत्सव

गौशाला के 138वें गोपाष्टमी महोत्सव को भव्य रूप से मनाने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) सह खगड़िया गौशाला कमेटी के अध्यक्ष धनंजय कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में 17 से 26 नवंबर तक कुल 10 दिवसीय गोपाष्टमी महोत्सव सह गौशाला मेला आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

मेले में बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले, खेल-तमाशा और विभिन्न दुकानें लगाने के लिए आगामी 28 अक्टूबर को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत निविदादाताओं की खुली बोली आयोजित की जाएगी। प्रशासन ने निविदा में पूरी पारदर्शिता बरतने और मेले के प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर देने का निर्देश दिया है, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु और आमजन इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल हो सकें।

 

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