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बाढ़ में डूबा पशुचारा, खगड़िया में 20 किलो दूध देने वाली गाय अब दे रही 10 किलो

Published: Wed, 16 Sep 2026 02:41 PM (IST)

प्रलयंकारी बाढ़ से खगड़िया में सैकड़ों एकड़ पशुचारा फसल नष्ट हो गई है, जिससे पशुपालकों को भारी परेशानी हो रही है और दूध उत्पादन में भी कमी आई है।

बाढ़ में डूबा पशुचारा, खगड़िया में 20 किलो दूध देने वाली गाय अब दे रही 10 किलो (AI Generated Image)

बाढ़ में डूबा पशुचारा, खगड़िया में 20 किलो दूध देने वाली गाय अब दे रही 10 किलो (AI Generated Image)

HighLights

  1. बाढ़ से सैकड़ों एकड़ पशुचारा फसल पूरी तरह नष्ट हो गई।

  2. दूध उत्पादन में भारी गिरावट, गायें आधा दूध दे रही हैं।

  3. सरकारी भूसा अपर्याप्त, किसान महंगे चारे को खरीदने पर मजबूर।

जागरण संवाददाता, खगड़िया। हाल ही में आई प्रलयंकारी बाढ़ ने सैकड़ों एकड़ फसल को डुबो दी है, जिससे पशुचारे की फसल भी नष्ट हो गई है। इस स्थिति ने किसानों और पशुपालकों के बीच त्राहिमाम की स्थिति उत्पन्न कर दी है। जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ित पशुपालकों के बीच मात्र 763.15 क्विंटल गेहूं के भूसे वितरित किए गए हैं।

खगड़िया प्रखंड में 166.45, मानसी प्रखंड में 119.30 और गोगरी प्रखंड में 158.80 क्विंटल गेहूं के भूसे का वितरण हुआ है। जो नाकाफी है।

जीएन तटबंध पर शरण लिए हुए गोगरी प्रखंड के बौरना पंचायत के पशुपालक मु. शहाबुद्दीन, जाबिर हुसैन और छट्टू सिंह ने बताया कि बाढ़ में पशुचारा की फसल नष्ट हो गई है। घर में पानी प्रवेश कर जाने के कारण पहले से स्टोर कर रखे गए भूसे भी सड़-गल गए। अब पशुओं को क्या खिलाएं, समझ में नहीं आ रहा।

उन्होंने कहा कि खेत-खलिहान से पानी जाने में समय लगेगा। नए घास उगने में भी समय लगेगा। परबत्ता प्रखंड के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के कई पशुपालकों ने बताया कि समुचित पशुचारा के अभाव में दूध उत्पादन में भी कमी आई है। पशुओं को पानी से गला हुआ भूसा देने के लिए विवश होना पड़ रहा है, जिसके कारण दूध की मात्रा आधी रह गई है।

उन्होंने कहा कि सरकारी स्तर पर भी समुचित रूप से पशुचारा नहीं दिया गया है। कई पशुपालकों ने बताया कि उन्हें तो सरकारी स्तर पर पशुचारा मिला ही नहीं, जिससे समस्या और बढ़ गई है।

माधवपुर पंचायत में बाढ़ का असर सर्वाधिक रहा है। पशुचारे की समस्या पर प्रकाश डालते हुए माधवपुर पंचायत के किसान प्रकाश कुमार सिंह ने बताया कि उनकी गायें पहले 20 किलो दूध देती थीं, जो अब घटकर 10 किलो रह गई हैं। उनका भूसा घर गिर चुका है और उन्हें भूसा 1500 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल खरीदना पड़ रहा है। बाढ़ आने से पहले हजार रुपये क्विंटल भूसा आसानी से मिल जा रहा था।

इसी गांव के अमर कुमार राय ने बताया कि उनकी गायें भी भूसा की कमी से प्रभावित हैं। अगस्त महीने में एक गाय 16 लीटर दूध देती थी और बाढ़ के बाद सात- आठ लीटर दूध दे रही हैं।

रविंद्र कुमार सिंह ने कहा कि उनकी चार गायों के सामने भी यही समस्या है। माधवपुर पंचायत स्थित विष्णुपुर, वार्ड संख्या-एक के पशुपालक सुनील सिंह ने बताया कि, आठ क्विंटल भूसा जमाकर रखा था। बाढ़ के पानी में भूसा घर गिर गया। दो क्विंटल भूसा किसी तरह से बच पाया।

वहीं, परबत्ता प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी खगेश कुमार ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लगभग 6000 पशु प्रभावित हुए हैं। बड़े पशुओं को छह किलो, छोटे पशुओं को तीन किलो और बकरियों को एक किलो की दर से गेहूं का भूसा वितरित किया गया है। उन्होंने कहा कि ऊपर से जो सहायता आई है, वही वितरित की गई है।

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