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मधेपुरा में पशुपालकों के लिए पशुचारा का सकंट, कीमत हुई दोगुनी; दूध उत्पादन भी प्रभावित

Published: Wed, 16 Sep 2026 02:34 PM (IST)

आलमनगर में बाढ़ का पानी घटने के बाद भी पशुपालकों की समस्याएँ बढ़ी हैं, जहां हरे चारे की कमी और सूखे चारे की कीमतें दोगुनी हो गई हैं।

मधेपुरा में पशुपालकों के लिए पशुचारा का सकंट, कीमत हुई दोगुनी; दूध उत्पादन भी प्रभावित

मधेपुरा में पशुपालकों के लिए पशुचारा का सकंट, कीमत हुई दोगुनी; दूध उत्पादन भी प्रभावित

HighLights

  1. बाढ़ के कारण हरे चारे की भारी कमी हुई है।

  2. सूखे चारे की कीमतें दोगुनी, पशुपालकों की परेशानी बढ़ी।

  3. दूध उत्पादन में 30-40% की गिरावट, दाम में वृद्धि।

संतोष झा, आलमनगर (मधेपुरा)। कोसी नदी के मुहाने पर स्थित आलमनगर प्रखंड क्षेत्र में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे घटने लगा है, लेकिन पशुपालकों की समस्याएं कम होने के बजाय और बढ़ गई हैं। जलजमाव के कारण खेतों में खड़ी हरी घास और मक्का-धान की फसलें पूरी तरह गल चुकी हैं।

खाली मैदान भी जलमग्न होने से मवेशियों के सामने भूखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस कारण क्षेत्र में दूध का उत्पादन भी घट चुका है, और दूध की कीमतों में भी उछाल आया है। वर्तमान में दूध की कीमत में पांच रुपये प्रति लीटर की वृद्धि देखी जा रही है।

बाढ़ के कारण पशुचारा की उपलब्धता में कमी आई है, जिससे सूखे चारे की मांग अचानक बढ़ गई है। इस स्थिति के कारण बाजारों में भूसा और पशु आहार मनमाने दामों पर बिक रहा है। बाढ़ से पूर्व गेहूं का भूसा 1000 से 1200 रुपये क्विंटल था, लेकिन अब यह 1800-2000 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।

इसी प्रकार, धान का पुआल 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब 1000-1200 रुपये प्रति क्विंटल हो चुका है। चोकर, खली और अन्य पशु आहार की कीमतों में भी वृद्धि हुई है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पशुपालकों को हरा चारा लाने के लिए सूखे स्थानों की तलाश में 12-15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है।

सुविधा के अनुसार, पशुपालक साइकिल, रिक्शा, ठेला या ट्रैक्टर का उपयोग कर हरा चारा काटकर लाने को विवश हैं। इस कारण पशुपालकों का पूरा दिन हरा चारा लाने में बीत रहा है।

लगातार कई दिनों से बाढ़ का पानी घरों में और चारों ओर लगा रहने से पशुपालकों को संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

पशुपालक अवधेश मंडल, विन्देश्वरी मंडल, विलाश सिंह, मनोज यादव, रायबहादुर सिंह सहित अन्य ने बताया कि जलजमाव के बाद गंदे पानी और मच्छर-मक्खियों के प्रकोप से मवेशियों में कई प्रकार की बीमारियां फैल रही हैं।

ऊंचे स्थानों और सड़कों के किनारे तिरपाल तानकर मवेशियों को किसी तरह बचाया जा रहा है। भरपेट चारा नहीं मिलने से दूध की उपलब्धता पर सीधा असर पड़ा है। कुपोषण और भरपेट भोजन की कमी के कारण मवेशियों की दूध देने की क्षमता में 30% से 40% तक की गिरावट आई है। इस कारण दूध संग्रह केंद्रों पर आवक घट गई है।

स्थानीय बाजारों में दूध की आपूर्ति कम होने से इसके फुटकर दाम में पांच रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा हो गया है। दूध की किल्लत और बढ़ी कीमतों का सीधा प्रभाव आम परिवारों के पोषण पर पड़ रहा है। पशुपालकों ने प्रशासन और पशुपालन विभाग से प्रभावित इलाकों में शीघ्र सूखा चारा उपलब्ध कराने और पशु चिकित्सा किट, कैंप लगाने की मांग की है।