विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

ब‍िहार में 15 साल तक फर्जी डिग्री से करता रहा नौकरी, केस दर्ज होते ही खगड़‍िया स्‍कूल से शिक्षक फरार

Published: Sat, 04 Apr 2026 10:06 PM (IST)

खगड़िया में एक शिक्षक ने 15 साल तक फर्जी प्रमाण पत्र पर सरकारी स्कूल में नौकरी की। निगरानी जांच में ...और पढ़ें

खगड़िया में फर्जी डिग्री का खेल उजागर, 15 साल नौकरी करने वाला शिक्षक फरार

खगड़िया में फर्जी डिग्री का खेल उजागर, 15 साल नौकरी करने वाला शिक्षक फरार

जागरण संवाददाता, खगड़िया। खगड़िया जिले में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर करीब 15 वर्षों तक सरकारी स्कूल में नौकरी करने का मामला सामने आया है। इस खुलासे के बाद संबंधित शिक्षक की मुश्किलें बढ़ गई हैं। निगरानी टीम की जांच में फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद शनिवार को गंगौर ओपी में शिक्षक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

मामला सामने आते ही आरोपित शिक्षक फरार हो गया है, जबकि पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। इस घटना से शिक्षा विभाग और स्थानीय क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।

गंगौर मध्य विद्यालय में पदस्थापित था शिक्षक

जानकारी के अनुसार, आरोपित शिक्षक प्रमोद कुमार भारती, गंगौर मध्य विद्यालय गोपी टोल में पदस्थापित थे। वह गोपी टोल निवासी स्व. फुलचंद्र प्रसाद के पुत्र बताए जाते हैं।

निगरानी विभाग के इंस्पेक्टर मु. सलाउद्दीन ने फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने के आरोप में उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया है। केस दर्ज होने की जानकारी मिलते ही शिक्षक फरार हो गया।

इस घटना के बाद विद्यालय के शिक्षकों के बीच भी चिंता का माहौल है, वहीं ग्रामीणों के बीच इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

हाईकोर्ट के आदेश पर हुई जांच

इस पूरे मामले का खुलासा पटना उच्च न्यायालय के आदेश के बाद हुई जांच में हुआ। वर्ष 2015 में अदालत ने 2006 से अब तक नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशिक्षण प्रमाण पत्रों की जांच के निर्देश दिए थे।

इसी क्रम में खगड़िया क्षेत्र की जांच की जिम्मेदारी निगरानी विभाग के इंस्पेक्टर मु. सलाउद्दीन को सौंपी गई थी। करीब एक साल तक चली जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।

जांच में फर्जी निकला प्रशिक्षण प्रमाण पत्र

जांच में पाया गया कि प्रमोद कुमार भारती का नियोजन वर्ष 2010 में ग्राम पंचायत राज जहांगीरा के तहत हुआ था। उनके आवेदन पत्र में बताया गया था कि उन्होंने वर्ष 2002 में इंटर कॉलेज वीरापट्टी, वाराणसी से इंटरमीडिएट पास किया है, जिसमें 400 अंक और 87 प्रतिशत अंक प्राप्त होने का दावा किया गया था।

इसके अलावा, उन्होंने राजश्री टंडन ओपन यूनिवर्सिटी, प्रयागराज से वर्ष 2006 में डिप्लोमा इन प्रशिक्षण प्राप्त करने का भी दावा किया था, जिसमें 1750 अंक और 91 प्रतिशत अंक का उल्लेख किया गया था।

हालांकि, जब निगरानी टीम ने गहन जांच की तो विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने प्रशिक्षण प्रमाण पत्र को पूरी तरह फर्जी करार दिया। इस तरह यह स्पष्ट हो गया कि शिक्षक ने गलत दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की थी।

पुलिस ने तेज की गिरफ्तारी की कार्रवाई

गंगौर ओपी अध्यक्ष श्याम सुंदर पासवान ने बताया कि निगरानी विभाग की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया गया है। आरोपी शिक्षक की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम लगातार प्रयास कर रही है और जल्द ही उसे पकड़ लिया जाएगा।

पुलिस का कहना है कि इस मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस मामले ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लंबे समय तक फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करना न केवल सिस्टम की कमजोरी को दर्शाता है, बल्कि छात्रों के भविष्य पर भी इसका असर पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के मामलों की गहन जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।

जांच के बाद बढ़ सकती है कार्रवाई

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में आगे और भी खुलासे हो सकते हैं। यदि अन्य शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच होती है, तो कई और मामलों का पर्दाफाश होने की संभावना है।

फिलहाल, निगरानी विभाग और स्थानीय पुलिस की नजर इस मामले पर बनी हुई है। आरोपी शिक्षक की गिरफ्तारी के बाद आगे की कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है।

उक्त शिक्षक पर फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी करने के मामले में सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कराया गया है। 2010 में बहाल उक्त शिक्षक का प्रशिक्षण प्रमाण पत्र जांच में फर्जी निकला।

-

मु. सलाउद्दीन, इंस्पेक्टर निगरानी ब्यूरो, पटना।