आंखों के सामने गंगा में समा गए 12 घर! कटिहार के यूसुफ टोला में बेघर होने की दहशत, 2000 की आबादी पर मंडराया संकट
गंगा नदी के प्रचंड कटाव ने कटिहार के अमदाबाद प्रखंड स्थित यूसुफ टोला में हाहाकार मचा दिया है, जहां 12 ...और पढ़ें

कटिहार के अमदाबाद स्थित यूसुफ टोला में गंगा नदी के तेज कटाव में ढहते घर और किनारे पर बेबस ग्रामीण।
HighLights
कटिहार के यूसुफ टोला में गंगा कटाव से 12 घर बहे।
2000 की आबादी बेघर होने की दहशत में, ग्रामीण विस्थापित हो रहे।
81 करोड़ के कटाव निरोधी कार्य गुणवत्ताहीनता के कारण विफल रहे।
मनीष कुमार सिंह, अमदाबाद (कटिहार)। "तुझे भी नदी में समाना है क्या? कटाव तेरे पैर तक पहुंच गया है। घर का मोह छोड़, जो सामान बचा है उसे समेट और यहां से हट।" शौकत आरा की आवाज में डर और घबराहट साफ झलक रही थी।
उसने तेजी से सबीना खातून का हाथ पकड़ा और पीछे खींचा। लेकिन सबीना की पथराई नजरें उसी घर पर टिकी थीं, जिसे उसने जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई से संवारा था।
देखते ही देखते गंगा की उफनती लहरों ने उसके आशियाने को निगल लिया। यह दर्दनाक मंजर कटिहार जिले के अमदाबाद प्रखंड की पार दियारा पंचायत के वार्ड संख्या 12 स्थित यूसुफ टोला का है, जहां गंगा के प्रचंड कटाव ने 2000 की आबादी वाले गांव में अफरा-तफरी मचा दी है।
अब तक 12 से अधिक घर पूरी तरह गंगा में समा चुके हैं, जबकि तस्मीरा खातून, हूमेरा खातून, आसमां खातून, मो. मोहसेन, मो. महबूब और मो. वाजुद्दीन समेत करीब 15 परिवारों के मकान कटाव की सीधी जद में हैं।
बाढ़ के बाद कटाव की दोहरी मार, सामान समेट सुरक्षित ठिकाने की तलाश में ग्रामीण
यूसुफ टोला के निवासियों के लिए यह तबाही दोहरी मार की तरह आई है। कुछ दिन पहले ही वे बाढ़ के पानी में डूबे अपने घरों से निकले थे। पानी उतरने पर जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश चल ही रही थी कि अब गंगा के कटाव ने उनसे सिर की छत भी छीन ली।
कटिहार जिले के अमदाबाद प्रखंड अंतर्गत पार दियारा पंचायत के वार्ड संख्या 12 स्थित यूसुफ टोला में गंगा नदी के कटाव से मचा हाहाकार
गंगा की उफनती धार में देखते ही देखते 12 से अधिक घर विलीन, सबीना खातून, तस्मीरा, मो. मोहसेन, महबूब व वाजुद्दीन का आशियाना तबाहा
बाढ़ के बाद कटाव की दोहरी मार: 200 घरों वाले यूसुफ टोला की 2000 की आबादी पर संकट; किवाड़, अनाज व बर्तन लेकर भाग रहे लोग
अमदाबाद सीओ हिंदुजा भारतीय ने राजस्व कर्मी को मौके पर भेजा; प्रमुख प्रतिनिधि मो. अजहर व मुखिया प्रतिनिधि एजाबुल हक ने की बोल्डर पीचिंग की मांग
गांव में हर तरफ चीख-पुकार मची है। पुरुष मवेशियों, अनाज, किवाड़, बर्तन और बक्सों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में लगे हैं, तो महिलाएं व मासूम बच्चे ढहते आशियानों को टकटकी लगाए देखने को मजबूर हैं।
प्रमुख प्रतिनिधि मो. अजहर ने प्रशासन से विस्थापितों के लिए तात्कालिक राहत शिविरों की व्यवस्था और कटाव रोकने के लिए बोल्डर पीचिंग कराने की पुरजोर मांग की है।
आधा दर्जन गांवों का मिट चुका अस्तित्व, 81 करोड़ के कटाव निरोधी कार्य पानी में बहे
अमदाबाद क्षेत्र में गंगा का यह विभीषिका भरा रूप नया नहीं है। वर्ष 1990 से 2000 के बीच रामायणपुर तटबंध टूटने के बाद कटाव की गति तेज हुई थी। बीते दो दशकों में जामुनतल्ला, कोशी जल्ली टोला, रामायणपुर, धन्नी टोला और खट्टी जैसे गांव पूरी तरह नदी के पेट में समाकर मानचित्र से गायब हो चुके हैं। व
हीं बबला बन्ना, भादू टोला, पोड़ाबाद और गोलाघाट का बड़ा हिस्सा कट चुका है। मुखिया प्रतिनिधि एजाबुल हक के अनुसार, 2017-18 में 67 करोड़ रुपये की बोल्डर पीचिंग और 2019-20 में 14 करोड़ रुपये की बल्ला पाइलिंग कराई गई थी, लेकिन गुणवत्ता के अभाव में 81 करोड़ का यह सुरक्षा ढांचा बह गया और अब तक 6,000 परिवार विस्थापित हो चुके हैं।
