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कटिहार: बाढ़ में बेबस परिवार, न सिर छिपाने को पॉलीथिन मिली; न पेट भरने को राशन

Published: Thu, 27 Aug 2026 08:39 PM (IST)

बाढ़ के कारण कटिहार के मोहना चांदपुर में दर्जनों परिवार बेघर हो गए हैं और सड़क किनारे शरण लिए हुए ...और पढ़ें

बाढ़ में बेबस परिवार, न सिर छिपाने को पॉलीथिन मिली; न पेट भरने को राशन

बाढ़ में बेबस परिवार, न सिर छिपाने को पॉलीथिन मिली; न पेट भरने को राशन

HighLights

  1. बाढ़ से बेघर हुए दर्जनों परिवार सड़क किनारे शरण लिए।

  2. प्रशासन से पालीथिन, राशन, चारा जैसी राहत नहीं मिली।

  3. मोहना चांदपुर के कई टोले बाढ़ के पानी से घिरे।

प्रवीण आनंद, सेमापुर (कटिहार)। बाढ़ का पानी गांव में घुसा तो दर्जनों परिवारों के सामने घर छोड़कर सड़क किनारे शरण लेने की मजबूरी आ गई। पांच-छह दिनों से सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजार रहे इन परिवारों की सबसे बड़ी चिंता अब घर लौटने की नहीं, बल्कि दो वक्त की रोटी और सिर छिपाने की है।

पीड़ितों का कहना है कि अब तक न तो प्रशासन की ओर से पालीथिन उपलब्ध कराई गई है और न ही पेट की आग बुझाने के लिए राशन। पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी नहीं हो पाई है।

गुरुवार दोपहर दैनिक जागरण की टीम ने मोहना चांदपुर पहुंचकर बाढ़ प्रभावित परिवारों का हाल जाना तो व्यवस्था की बदहाली और पीड़ितों की बेबसी साफ नजर आई।

बाढ़ के पानी के बीच सिर पर पोटली रखकर ऊंचे स्थान की तलाश में निकले 70 वर्षीय हरे राम हकलाते हुए कहते हैं कि आवागमन के लिए नाव तक नहीं मिली है। बाढ़ के पानी ने घर से निकलना मुश्किल कर दिया है।

वहीं, पशुओं के लिए चारा तैयार कर रहे गोरेलाल महतो ने बताया कि वे पांच-छह दिनों से सड़क किनारे शरण लिए हुए हैं। सरकारी स्तर पर अभी तक न तो खाने के लिए राशन मिला है और न ही पशुओं के चारे की व्यवस्था की गई है।

सड़क किनारे झोपड़ी में शरण लिए बुजुर्ग गया राम भी प्रशासन की ओर से किसी तरह की राहत नहीं मिलने की बात कहते हैं।

मीरा देवी ने बताया कि घर में जो थोड़ा-बहुत राशन बचा है, उसी से बच्चों के लिए खाना तैयार कर रही हैं, ताकि बच्चे भूखे न रहें। उनके चेहरे पर बाढ़ से ज्यादा राहत नहीं मिलने की चिंता साफ झलक रही थी।

बाढ़ के पानी से टापू में तब्दील हुआ मोहना चांदपुर

गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर से मोहना चांदपुर के कुंडी टोला, समदा, संथाली टोला, डुब्बा टोला और सोनाखाल में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। पानी से घिरने से गांव का संपर्क प्रभावित होने के साथ ही निचले इलाके टापू में तब्दील हो गए हैं। दर्जनों परिवारों के घरों में पानी प्रवेश कर गया है, जिससे वे सड़क किनारे शरण लेने को मजबूर हैं।

राहत के इंतजार में टकटकी

बाढ़ पीड़ित परिवार पेयजल, शौचालय, समुचित नाव, पालीथिन, राशन और पशुचारा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए शासन-प्रशासन की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।

पीड़ितों की स्थिति यह सवाल खड़ा कर रही है कि बाढ़ जैसी आपदा के बीच जब परिवार घर से बेघर हो गए हैं, तो राहत व्यवस्था उन तक कब पहुंचेगी। फिलहाल सड़क किनारे शरण लिए परिवारों के लिए हर गुजरता दिन परेशानी और सब्र की इंतहा ले रही है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में 72 घंटे चूल्हे बंद रहने की स्थिति में सूखा राशन या सामुदायिक किचन चलती हैं। अभी जलस्तर में उतार-चढाव हो रहा है। जांच कर सुविधा मुहैया कराई जाएगी। - मनीष कुमार, अंचलाधिकारी, बरारी

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