बेटी ने दूसरी जाति में किया प्रेम विवाह तो पिता ने किया पिंडदान! सिर मुंडवाकर तोड़े सारे रिश्ते, कटिहार पहुंचे पंडित
Katihar Inter Caste Love Marriage: कटिहार के कदवा में एक पिता और भाई ने अपनी बेटी का अंतरजातीय प्रेम विवाह ...और पढ़ें
HighLights
बेटी के अंतरजातीय प्रेम विवाह से पिता नाराज।
जीवित बेटी का सिर मुंडवाकर किया पिंडदान।
यह घटना सामाजिक रूढ़ियों पर बहस छेड़ गई।
संवाद सूत्र, कदवा (कटिहार)। Katihar Inter Caste Love Marriage: 21वीं सदी में जहां कानून बालिग युवक-युवतियों को अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने का संवैधानिक अधिकार देता है, वहीं ग्रामीण इलाकों में सामाजिक रूढ़ियां और झूठी प्रतिष्ठा आज भी रिश्तों पर भारी पड़ रही हैं। कटिहार जिले के कदवा थाना क्षेत्र अंतर्गत कंटिया पंचायत के निझरा गांव से एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला और चौंकाने वाला मामला सामने आया है।
यहां एक युवती द्वारा अपनी पसंद से अंतरजातीय प्रेम विवाह करने का फैसला उसके पिता और भाई को इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने जीवित बेटी को ही परिवार के लिए मृत घोषित कर दिया। इतना ही नहीं, पिता और भाई ने सिर मुंडवाकर बाकायदा हिंदू रीति-रिवाज के साथ जीवित बेटी का पिंडदान और श्राद्ध कर्म भी कर डाला। इस अजब-गजब और मार्मिक घटना के बाद पूरे कदवा प्रखंड और सीमावर्ती इलाकों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
23 अक्टूबर को रचाई थी शादी
जानकारी के मुताबिक, निझरा गांव निवासी श्याम ठाकुर की पुत्री सैजल कुमारी का प्रेम प्रसंग पहलागढ़ पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि मुन्ना पासवान के पुत्र अजय पासवान से चल रहा था। दोनों ने अपने रिश्ते को सामाजिक मान्यता देने के लिए 23 अक्टूबर 2026 को प्रेम विवाह कर लिया।

मुखिया प्रतिनिधि के पुत्र से हुआ प्रेम
युवक और युवती दोनों बालिग हैं और उन्होंने अपनी स्वतंत्र इच्छा से वैवाहिक बंधन में बंधने का निर्णय लिया। हालांकि, दोनों के अलग-अलग जातियों से ताल्लुक रखने के कारण लड़की का परिवार इस रिश्ते को कतई स्वीकार करने को तैयार नहीं था। शादी की खबर जैसे ही परिजनों को मिली, घर में कोहराम मच गया।
समाज में प्रतिष्ठा जाने की दुहाई
बेटी के इस स्वावलंबी कदम को पिता और भाई ने अपनी झूठी पारिवारिक प्रतिष्ठा और सामाजिक मर्यादा पर हमला माना। परिजनों का कहना था कि अंतरजातीय विवाह के कारण समाज और बिरादरी में उनकी नाक कट गई है और प्रतिष्ठा को गहरी ठेस पहुंची है।
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जीवित बेटी का कर दिया पिंडदान
आक्रोश और सामाजिक दबाव में आकर पिता श्याम ठाकुर और उनके बेटे ने फैसला किया कि अब उनके लिए सैजल का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो चुका है। इसके बाद उन्होंने गांव के समीप ही पूरे विधि-विधान से मुंडन संस्कार कराया, पिंडदान की रस्में निभाईं और श्राद्ध कर्म पूरा कर यह ऐलान कर दिया कि उनके लिए अब बेटी जीवित नहीं रही।
गांव में पसरा सन्नाटा
इस घटना को लेकर निझरा और आसपास के गांवों में दो फाड़ राय देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे परिवार की लाचारी, आक्रोश और सामाजिक ताने-बाने से जोड़कर देख रहे हैं, तो वहीं प्रबुद्ध वर्ग और युवाओं का कहना है कि जब देश का कानून दो बालिगों को अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने की पूरी आजादी देता है, तो इस तरह जीवित संतान का श्राद्ध कर्म करना सामाजिक संकीर्णता और रूढ़िवादिता का चरम रूप है।
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रूढ़ियों और व्यक्तिगत आजादी पर बहस
कानूनी जानकारों के अनुसार, बालिग होने के नाते सैजल और अजय का विवाह पूरी तरह वैध है। बहरहाल, यह घटना एक बार फिर यह सवाल छोड़ गई है कि अपनी मर्जी से जीने की चाह रखने वाली बेटियों को कब तक झूठी सामाजिक प्रतिष्ठा की वेदी पर रिश्तों की कुर्बानी देनी पड़ेगी।
