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कटिहार में मकड़ी के जाल व कॉकरोच थीम पर बना अनोखा पंडाल; 1935 से हो रही पूजा, बंगाल के कारीगरों ने एक माह में बनाया

Published: Mon, 19 Oct 2026 10:33 AM (IST)

Katihar Vinodpur Durga Puja Pandal: कटिहार के विनोदपुर में दुर्गा पूजा समिति ने इस वर्ष मकड़ी के जाल और तिलचट्टे ...और पढ़ें

Katihar Vinodpur Durga Puja Pandal: कटिहार शहर के विनोदपुर में बना दुर्गा पंडाल।

Katihar Vinodpur Durga Puja Pandal: कटिहार शहर के विनोदपुर में बना दुर्गा पंडाल।

HighLights

  1. कटिहार में अनोखा तिलचट्टा और मकड़ी जाल पंडाल।

  2. बच्चों के मनोरंजन हेतु बनाया गया यह अभिनव पंडाल।

  3. नवद्वीप के कारीगरों ने एक माह में किया तैयार।

संवाद सहयोगी, कटिहार। Katihar Vinodpur Durga Puja Pandal: देश के सियासी गलियारों में इन दिनों 'कॉकरोच' को लेकर चल रही जुबानी जंग के बीच कटिहार शहर के विनोदपुर में भी तिलचट्टा अचानक आकर्षण और कौतूहल का केंद्र बन गया है। हालांकि, यहां इसका सरोकार सियासत से नहीं, बल्कि कला और आस्था से है। विनोदपुर दुर्गा पूजा समिति ने इस वर्ष शारदीय नवरात्र के मौके पर मकड़ी के जाल और थर्माकोल से बने विशाल कॉकरोच की आकृतियों से एक बेहद अनूठा और आकर्षक पंडाल सजाया है। यह विचित्र और अभिनव सजावट शहरवासियों, खासकर बच्चों और युवाओं को अपनी ओर खींच रही है।

1935 से जारी है बंगाली टोला की ऐतिहासिक परंपरा

विनोदपुर दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष नवीन कुमार गोयनका ने बताया कि इस स्थान पर मां दुर्गा की पूजा का इतिहास अत्यंत गौरवमयी है। यहां वर्ष 1935 से लगातार मां भगवती की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जा रही है। पूर्व में इस इलाके को बंगाली टोला के नाम से जाना जाता था। पूर्वजों द्वारा शुरू की गई यह धार्मिक परंपरा आज 91वें वर्ष में भी पूरे विधि-विधान और पारंपरिक उल्लास के साथ निभाई जा रही है।

राजनीति से कोई सरोकार नहीं, बच्चों के मनोरंजन की पहल

पंडाल की थीम को लेकर अध्यक्ष नवीन गोयनका ने स्पष्ट किया कि कॉकरोच की आकृतियों का वर्तमान राजनीतिक बयानों या विवादों से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों का मनोरंजन करना और दर्शनार्थियों को पारंपरिक पंडालों से हटकर कुछ अलग व नया अनुभव प्रदान करना है। पंडाल में प्रवेश करते ही मकड़ी के विशाल जाले और उन पर रेंगते हुए थर्माकोल के कॉकरोच का दृश्य रोमांच पैदा करता है।

नवद्वीप के कारीगरों ने एक माह में गढ़ी कलाकृति, 5 लाख बजट

पूजा समिति के सचिव अमर प्रताप ने बताया कि इस विशेष पंडाल के निर्माण के लिए पश्चिम बंगाल के नवद्वीप से अनुभवी कारीगरों को आमंत्रित किया गया था। कारीगरों की टीम ने लगातार करीब एक महीने तक पसीना बहाकर इस अनूठी संरचना को अंतिम रूप दिया है। उन्होंने बताया कि पंडाल के भव्य निर्माण और मां दुर्गा की मनोहारी प्रतिमा की स्थापना सहित संपूर्ण आयोजन का बजट लगभग पांच लाख रुपये निर्धारित है।

सेल्फी और दर्शन के लिए उमड़ रहा जनसैलाब

पंडाल के भीतर श्रद्धालुओं और युवाओं के लिए खास 'सेल्फी पॉइंट्स' भी बनाए गए हैं, जहां लोग थर्माकोल की इन अनोखी कलाकृतियों के साथ तस्वीरें खींचकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। हालांकि पंडाल का बाहरी आवरण भले ही कौतूहल जगाने वाला हो, लेकिन मुख्य गर्भगृह में स्थापित मां दुर्गा की दिव्य और शांत प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए अटूट आस्था और श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है।