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25 हजार का निवेश, लाखों का मुनाफा: बंजर जमीन पर खस उगाकर तकदीर बदल सकते हैं किसान

Published: Tue, 27 Oct 2026 04:59 PM (IST)

कटिहार जिले में 10 हजार हेक्टेयर बंजर भूमि पर खस की खेती की योजना बन रही है, जिससे किसानों को ...और पढ़ें

खस की खेती से कटिहार की बंजर भूमि बनेगी उपजाऊ, किसानों को मिलेगी नई आय

खस की खेती से कटिहार की बंजर भूमि बनेगी उपजाऊ, किसानों को मिलेगी नई आय

HighLights

  1. कटिहार में 10 हजार हेक्टेयर बंजर भूमि पर खस की खेती।

  2. किसानों को वैकल्पिक आय और रोजगार के अवसर मिलेंगे।

  3. खस तेल का उपयोग इत्र, सौंदर्य प्रसाधन, आयुर्वेद में।

प्रदीप गुप्ता, कटिहार। जिले में लंबे समय से अनुपजाऊ और बंजर पड़ी जमीन अब किसानों और ग्रामीणों के लिए आय का नया जरिया बन सकती है। जिला प्रशासन की पहल पर कृषि विभाग ने ऐसी करीब 10 हजार हेक्टेयर जमीन को चिह्नित किया है, जहां सुगंधित एवं औषधीय पौधे खस की खेती कराने की योजना तैयार की जा रही है।

प्रस्ताव को विभागीय अनुमोदन के लिए भेजने की तैयारी चल रही है। योजना के धरातल पर उतरने के बाद बंजर जमीन में हरियाली के साथ उसकी खुशबू भी लोगों की आमदनी बढ़ाने का माध्यम बन सकती है।

जिला कृषि पदाधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि चिह्नित जमीन पर खस के पौधे लगाए जाने की योजना है। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री केंद्रीय औषधीय एवं सुगंध पौधा संस्थान लखनऊ से मंगाने की तैयारी की जा रही है।

खस की खासियत यह है कि इसे अपेक्षाकृत बंजर जमीन में भी उगाया जा सकता है। ऐसे में जिन खेतों में परंपरागत फसलों की पैदावार कम होती है, वहां खस की खेती किसानों के लिए वैकल्पिक आय का माध्यम बन सकती है।

विभाग की माने जिले में लेमनग्रास, वेटिवर घास एवं काली तुलसी की खेती आधारित कृषि का उक्त माडल तैयार किया जायेगा। जिससे किसानों को अतिरिक्त आय एवं रोजगार के अवसर प्रदान करना है।

डेढ़ साल में तैयार होगी फसल:

कृषि विभाग के अनुसार खस की फसल तैयार होने में करीब 450 से 540 दिन का समय लगता है। एक एकड़ में 25 हजार पौधे लगने के साथ इसकी खेती पर लगभग 20 से 25 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है।

विभागीय आकलन के मुताबिक एक एकड़ से करीब 25 किलो खस तेल प्राप्त हो सकता है। इसकी बाजार कीमत लगभग 4500 से 5000 रुपये प्रति किलो बताई जा रही है।

इत्र से लेकर आयुर्वेद तक उपयोग:

खस की जड़ों से प्राप्त तेल की मांग सुगंध उद्योग में रहती है। इसका उपयोग इत्र, परफ्यूम, साबुन, सौंदर्य प्रसाधन और विभिन्न आयुर्वेदिक उत्पादों में किया जाता है।

यही वजह है कि खस को केवल एक फसल के रूप में नहीं, बल्कि बड़ी बड़ी कंपनी द्वारा विभिन्न सामग्री निर्माण में इसकी मांग बढ़ने के साथ खेती करने वाले किसान के लिये वरदान साबित होगा।

जमीन चयन से बाजार तक बनेगी कार्ययोजना:

कृषि विभाग अब चिह्नित जमीन के अंतिम चयन, किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, पौध उपलब्धता, खेती की निगरानी और उत्पाद के विपणन को लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रहा है।

विशेषकर इसके लिये गंगा नदी किनारे की बंजर पड़े जमीन का चयन किया गया है, जबकि बंजर जमीन का आंकड़ा बढ़ भी सकता है।

विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में खेती और तेल निकालने की प्रक्रिया की जानकारी किसानों को उपलब्ध कराने की भी योजना है। यदि प्रस्ताव को विभागीय मंजूरी मिलती है तो जिले में खस की खेती को चरणबद्ध तरीके से बढ़ावा दिया जा सकता है।

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