बिहार पंचायत चुनाव : बदल जाएगा कटिहार के 13 पंचायतों का भूगोल! परिसीमन व आरक्षण रोस्टर के फेर में 414 पदों के दावेदार
Bihar Panchayat Chunav 2026 : कटिहार के फलका प्रखंड में 2026 के पंचायत चुनाव को लेकर असमंजस है, क्योंकि परिसीमन ...और पढ़ें

Bihar Panchayat Chunav 2026 : कटिहार में पंचायत चुनाव की चर्चा हो रही है।
HighLights
कटिहार के फलका में 2026 पंचायत चुनाव पर असमंजस।
परिसीमन और नए आरक्षण रोस्टर से दावेदारों में चिंता।
414 पदों के लिए बदलेंगे राजनीतिक समीकरण और भूगोल।
संवाद सूत्र, जागरण, पोठिया (कटिहार)। Bihar Panchayat Chunav 2026 : बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत आम निर्वाचन 2026 की आधिकारिक डुगडुगी भले ही अभी राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नहीं बजाई गई है, लेकिन कटिहार जिले के फलका प्रखंड क्षेत्र में चुनावी बयार पूरी शिद्दत से बहने लगी है। गांव की संकरी पगडंडियों से लेकर चौक-चौराहों, खेत-खलिहानों और चाय की थड़ियों तक संभावित उम्मीदवारों के नाम और दांव-पेंच पर चर्चाएं उफान पर हैं। हालांकि, संभावित परिसीमन और नए आरक्षण रोस्टर को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण दावेदारों और मतदाताओं के बीच भारी असमंजस बना हुआ है।
विभागीय स्तर पर चल रही कवायद को लेकर दो तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। यदि पंचायतों का परिसीमन नहीं कराया गया, तो चुनाव तय समय पर वर्ष 2026 में ही संपन्न करा लिए जाएंगे। वहीं, यदि नए प्रशासनिक मानकों के तहत परिसीमन की जटिल प्रक्रिया शुरू हुई, तो चुनाव के वर्ष 2027 तक खिसकने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। अंतिम तस्वीर सरकार और आयोग के दिशा-निर्देश के बाद ही साफ होगी।
ब्लॉक मुख्यालय के चक्कर काट रहे वर्तमान मुखिया व दावेदार
परिसीमन और आरक्षण की थाह लेने के लिए वर्तमान जनप्रतिनिधि और भावी प्रत्याशी लगातार फलका प्रखंड मुख्यालय की दौड़ लगा रहे हैं। वे विकास शाखा और पंचायती राज कार्यालय के अधिकारियों-कर्मियों से यह टटोलने की जुगत में हैं कि परिसीमन में कौन सा गांव किस पंचायत से कटेगा, कौन सा टोला किसमें जुड़ेगा और किस पंचायत की सीट किस वर्ग (सामान्य, पिछड़ा, अति पिछड़ा या अनुसूचित जाति) के लिए आरक्षित होगी। हालांकि, आधिकारिक अधिसूचना के अभाव में कर्मियों से सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है, जिससे अधिकांश दावेदारों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
वर्तमान जनप्रतिनिधियों को सबसे बड़ा डर इस बात का सता रहा है कि यदि परिसीमन में उनके प्रभाव वाले परम्परागत वोट बैंक और प्रमुख गांव कटकर दूसरी पंचायत में चले गए, तो उनकी वर्षों की सियासी जमीन खिसक जाएगी। वहीं, कई दावेदार अपनी पसंदीदा सीट आरक्षित होने की आशंका से दूसरे पदों (जैसे मुखिया के बदले समिति या जिप) पर किस्मत आजमाने की रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
7500 की आबादी पर नई पंचायतों की चर्चा, बदलेंगे समीकरण
विभागीय स्तर पर छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, करीब 7500 की आबादी के मानक पर नई पंचायतों और नए वार्डों के गठन की चर्चा जोरों पर है। यदि यह फॉर्मूला लागू हुआ, तो फलका की कई बड़ी पंचायतों का भूगोल पूरी तरह बदल जाएगा। नए वार्ड और नई पंचायतें अस्तित्व में आएंगी। इसका सीधा असर मुखिया, पंचायत समिति और जिला परिषद सीटों के सामाजिक व राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा।
इसके अलावा, आगामी चुनाव नए आरक्षण रोस्टर और 'तीसरे चक्र' के पदवार चक्रानुक्रम (रोटेशन) के आधार पर कराए जाने की सुगबुगाहट है। नियमतः जिन सीटों पर पिछले लगातार दो चुनावों से एक ही वर्ग का आरक्षण लागू रहा है, वहां इस बार बदलाव होना तय माना जा रहा है। ऐसे में कई दिग्गज चेहरों का चुनावी रण से बाहर होना तय है, जबकि नए और युवा चेहरों के लिए दरवाजे खुल सकते हैं। पंचायत चुनाव में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था पूर्ववत प्रभावी रहेगी।
फलका में 414 पदों पर होता है चुनाव, अंतिम स्वरूप का इंतजार
वर्तमान में फलका प्रखंड क्षेत्र में कुल 414 पदों के लिए मतदान होता है। इनमें जिला परिषद सदस्य के 2, मुखिया के 13, सरपंच के 13, पंचायत समिति सदस्य के 18, वार्ड सदस्य के 184 और ग्राम कचहरी पंच के 184 पद शामिल हैं। यदि परिसीमन हुआ, तो इन पदों की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी।
फिलहाल दावेदारों, राजनीतिक पंडितों और आम मतदाताओं की नजरें राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी होने वाले परिसीमन के प्रारूप, आपत्तियों के निस्तारण और अंतिम आरक्षण रोस्टर पर टिकी हैं। रोस्टर की घोषणा होते ही फलका की ग्रामीण राजनीति में वास्तविक चुनावी घमासान शुरू होगा।
