बिहार पंचायत चुनाव : जमुई में 152 से बढ़कर 230 होंगी पंचायतें; सिकंदरा-अलीगंज का बदलेगा स्वरूप, दशकों बाद बड़ा फैसला
बिहार पंचायत चुनाव : जमुई जिले में पंचायतों की संख्या 152 से बढ़कर लगभग 230 होने जा रही है, जिससे ...और पढ़ें

बिहार पंचायत चुनाव
HighLights
जमुई में पंचायतों की संख्या 152 से बढ़कर 230 होगी।
सिकंदरा-अलीगंज में पंचायतों की संख्या 38-40 तक पहुंचेगी।
2011 जनगणना के आधार पर 7,000 आबादी पर नई पंचायत।
संवाद सहयोगी, जमुई। बिहार पंचायत चुनाव : बिजार के जमुई जिले के सिकंदरा और अलीगंज क्षेत्र में प्रशासनिक सीमाओं और पंचायतों का भूगोल तो कई बार बदला, लेकिन पंचायतों की कुल संख्या का चुनावी गणित पिछले 57 सालों से लगभग एक ही जगह पर थमा रहा। वर्ष 1969 और 1978 के दौर में भी एकीकृत सिकंदरा में 27 से 28 पंचायतें थीं और आज भी दोनों प्रखंडों को मिलाकर लगभग वही संख्या कायम है।
हालांकि, अब दशकों पुराने इस संख्यात्मक गणित को नया परिसीमन पूरी तरह बदलने जा रहा है। पंचायती राज विभाग द्वारा वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर प्रति 7,000 की ग्रामीण आबादी पर नई ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की कवायद शुरू हो चुकी है। इस नए फार्मूले के लागू होते ही जमुई जिले में पंचायतों की कुल संख्या 152 से बढ़कर करीब 230 तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि सिकंदरा और अलीगंज प्रखंडों में यह आंकड़ा संयुक्त रूप से 38 से 40 तक पहुंच सकता है।
1969 से 1978 तक: बुजुर्ग जन प्रतिनिधियों की जुबानी
प्रशासनिक अभिलेख भले ही हर दौर के पूरी तरह उपलब्ध न हों, लेकिन उस समय पंचायतों का नेतृत्व करने वाले पूर्व मुखियाओं की गवाही इसकी पुष्टि करती है। 1969 में पहली बार हिलसा कोदवरिया से मुखिया चुने गए वयोवृद्ध फौजदारी यादव और सिझौड़ी के पूर्व मुखिया नारायण मंडल बताते हैं कि उस दौर में सिकंदरा और अलीगंज एक ही प्रखंड हुआ करता था और तब पूरे सिकंदरा प्रखंड में 27 मुखिया थे।
सिकंदरा-अलीगंज पंचायत पुनर्गठन: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि व नया गणित
1969 का दौर: एकीकृत सिकंदरा प्रखंड में कुल 27 पंचायतें (मुखिया पद)।
1972-1978 का दौर: हलसी प्रखंड से पिरहिंडा पंचायत जुड़ने के बाद संख्या बढ़कर हुई 28 (1978 तक यथावत)।
1994 का परिसीमन: सिकंदरा से काटकर इस्लामनगर अलीगंज प्रखंड का गठन; दोनों में 14-14 पंचायतें बंटीं (बाद में अलीगंज में 13 व सिकंदरा में 14 हुईं)।
वर्तमान स्थिति: सिकंदरा नगर पंचायत बनने के बाद जिले में कुल 152 पंचायतें शेष।
नया मानक: वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर प्रति 7,000 की आबादी पर एक ग्राम पंचायत का गठन।
प्रस्तावित प्रभाव: जिले में कुल पंचायतें ~230 तक पहुंचेंगी; सिकंदरा और अलीगंज में संयुक्त रूप से 38 से 40 पंचायतें संभावित।
इसके बाद वर्ष 1972 में पिरहिंडा पंचायत हलसी प्रखंड से अलग होकर सिकंदरा में शामिल हुई, जिससे पंचायतों की संख्या बढ़कर 28 हो गई। वर्ष 1978 के पंचायत चुनाव में भी कुल संख्या 28 ही रही। वर्ष 1978 में अलग-अलग पंचायतों से मुखिया चुने गए देवेंद्र कुमार सिंह और विद्यु शेखर सिंह भी बताते हैं कि उस समय पंचायतों की सीमाएं भले बदलीं, लेकिन संख्या में कोई बड़ा फेरबदल नहीं हुआ था।
1994 के परिसीमन में हुआ था केवल क्षेत्रीय बंटवारा
वर्ष 1994 के परिसीमन के दौरान एकीकृत सिकंदरा प्रखंड को विभाजित कर इस्लामनगर अलीगंज प्रखंड का गठन किया गया था। उस समय दोनों प्रखंडों के खाते में 14-14 पंचायतें आईं। परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने पर अलीगंज में एक पंचायत घटकर 13 हो गई, जबकि सिकंदरा में 14 पंचायतें बनी रहीं।
उसी 1994 के परिसीमन में जिले के अन्य हिस्सों में व्यापक बदलाव हुए थे—चकाई में पंचायतें 21 से बढ़कर 23 हुईं, खैरा में तीन पंचायतें बढ़ीं और तत्कालीन लक्ष्मीपुर प्रखंड (जिससे बाद में गिद्धौर और बरहट अलग हुए) का दायरा 24 से बढ़कर आज कुल 30 पंचायतों में तब्दील हो चुका है। वहीं, सोनो और झाझा में भी संख्या काफी हद तक पूर्ववत रही थी।
7000 की आबादी का मानक तोड़ेगा 57 साल का चक्र
हाल ही में सिकंदरा को नगर पंचायत का दर्जा दिए जाने के बाद एक ग्रामीण पंचायत कम हो गई थी, जिससे वर्तमान में जिले में कुल पंचायतों की संख्या 152 है। अब नए परिसीमन की सुगबुगाहट के बीच 57 वर्षों से चला आ रहा स्थिरता का चक्र टूटने जा रहा है।
2011 की जनगणना के आधार पर 7,000 की आबादी का पैमाना तय होने से गांवों की प्रशासनिक इकाई छोटी होगी और जन प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ेगी। यह नया परिसीमन न केवल गांवों के नक्शे को सुधारेगा, बल्कि पंचायतों के दशकों पुराने चुनावी गणित को भी पूरी तरह नया रूप दे देगा।
