क्या बदल जाएंगे जिला पार्षद, मुखिया व सरपंच के वोटर? बिहार पंचायत चुनाव में परिसीमन से नेताजी के साथ वोटर भी सशंकित
Bihar Panchayat Chunav 2026 Delimitation : बिहार में आगामी पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो ...और पढ़ें

Bihar Panchayat Chunav 2026 Delimitation : बिहार पंचायत चुनाव में इस बार परिसीमन से बदलेगा गणित; 7 हजार पर मुखिया और 50 हजार पर जिला पार्षद
HighLights
2011 जनगणना के आधार पर पंचायतों और वार्डों का होगा पुनर्गठन।
मुखिया, सरपंच 7 हजार, जिला परिषद 50 हजार आबादी पर।
परिसीमन, आरक्षण रोस्टर में लगभग 10-12 महीने लगेंगे।
संसू, सिकटी (अररिया)। Bihar Panchayat Chunav 2026 Delimitation : बिहार में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत आम चुनाव की आहट मिलते ही ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक हलचल अचानक तेज हो गई है। अमूमन अब तक पंचायत चुनावों की सुगबुगाहट शुरू होते ही चर्चा केवल आरक्षण रोस्टर और सीटों के बंटवारे पर केंद्रित रहती थी, लेकिन इस बार अररिया के सिकटी, कुर्साकांटा सहित पूरे सीमांचल में सबसे बड़ा मुद्दा पंचायतों और वार्डों का संभावित परिसीमन (Delimitation) बन गया है। वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों और वर्तमान भौगोलिक स्थिति के आधार पर पंचायतों की सीमाओं के पुनर्गठन की तैयारी से वर्तमान जनप्रतिनिधियों और नए दावेदारों की धड़कनें तेज हो गई हैं।
प्रखंड मुख्यालयों से लेकर गांवों की चाय चौपालों तक यही कयास लगाए जा रहे हैं कि कौन-सा गांव कटकर किस पंचायत में जाएगा और कहां नई ग्राम पंचायत का गठन होगा। परिसीमन लागू होने से कई पुराने राजनीतिक समीकरण ध्वस्त हो सकते हैं और नए चेहरों के लिए चुनावी राह आसान हो सकती है।
7 हजार पर मुखिया और 50 हजार पर जिला परिषद सीट का फॉर्मूला
प्रशासनिक स्तर पर चल रही चर्चाओं और निर्धारित मानकों के अनुसार, परिसीमन के तहत आबादी के अनुपात में पदों का नया दायरा तय किया जा सकता है:
मुखिया एवं सरपंच: औसतन 7,000 की आबादी पर एक ग्राम पंचायत (मुखिया) और एक ग्राम कचहरी (सरपंच) का क्षेत्र तय होने की संभावना है।
पंचायत समिति सदस्य (BDC): लगभग 5,000 की जनसंख्या के अनुपात पर एक पंचायत समिति सदस्य का निर्वाचन क्षेत्र बनेगा।
जिला परिषद सदस्य: करीब 50,000 की आबादी पर एक जिला परिषद क्षेत्र का निर्धारण किया जा सकता है।
वार्ड सदस्य एवं पंच: वार्डों का गठन और पंच के पदों का दायरा संबंधित क्षेत्र के स्थानीय जनसंख्या घनत्व और भौगोलिक अनुकूलता पर निर्भर करेगा।
आबादी के नए मानकों से कई पंचायतों में वार्डों की संख्या बढ़ सकती है, तो कहीं अत्यधिक छोटे वार्डों का विलय भी संभव है। हालांकि, निर्वाचन क्षेत्रों और पदों की अंतिम स्थिति प्रारूप प्रकाशन, आम जनता से दावा-आपत्ति प्राप्त करने और उनके निष्पादन के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
सीमाओं में बदलाव से बदल जाएंगे दावेदारों के चुनावी क्षेत्र
गांव और वार्ड की सीमाओं के संभावित बदलाव ने चुनावी समर में उतरने की तैयारी कर रहे प्रत्याशियों का गुणा-गणित बिगाड़ दिया है। मुखिया, सरपंच, बीडीसी, वार्ड सदस्य और पंच पद के भावी उम्मीदवार अब अपने-अपने समर्थक वोटरों और नए भौगोलिक दायरे का हिसाब लगाने में जुट गए हैं।
यदि किसी गांव का एक टोला कटकर दूसरी पंचायत में चला जाता है या दो पंचायतों को काटकर नई पंचायत बनती है, तो कई कद्दावर नेताओं का पारंपरिक वोट बैंक छिन्न-भिन्न हो सकता है। वहीं, सीमा बदलने से कई संभावित प्रत्याशियों को अपना चुनावी क्षेत्र छोड़कर नई जगह से जमीन तलाशनी पड़ सकती है।
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संभावित मानक: 7 हजार की आबादी पर मुखिया व सरपंच, 5 हजार पर पंचायत समिति (BDC) और 50 हजार पर बनेगा जिला परिषद क्षेत्र
2011 की जनगणना के आधार पर पंचायतों और वार्डों के पुनर्गठन की संभावना, सीमाएं बदलने से कई प्रत्याशियों का बदलेगा कार्यक्षेत्र
प्रक्रिया में लगेगा समय: परिसीमन, दावा-आपत्ति, आरक्षण रोस्टर और मतदाता सूची तैयार करने में लग सकते हैं करीब 10 से 12 महीने
नया आरक्षण रोस्टर तय होने में लगेगा करीब एक साल का समय
विभागीय जानकारों और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की यह पूरी कवायद काफी चरणबद्ध और विस्तृत है। परिसीमन का ड्राफ्ट तैयार करने, उस पर आपत्तियां लेने और अंतिम अधिसूचना जारी करने में ही छह माह से अधिक का वक्त लग सकता है।
परिसीमन की प्रक्रिया मुकम्मल होने के बाद ही नया आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाएगा। इसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) और 50 प्रतिशत महिलाओं के लिए पदों का अनुपात नए सिरे से निर्धारित होगा। इसके उपरांत मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) का विखंडन, पुनरीक्षण और नए मतदान केंद्रों (बूथों) का भौतिक सत्यापन करने में करीब छह माह का और समय लगेगा। यानी चुनाव की अंतिम डुगडुगी बजने से पहले पूरी प्रशासनिक मशीनरी को एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा।
