कैमूर। नुआंव: प्रखंड का एक मात्र सातों अवंती गोडियारी में स्थित स्टेडियम उपेक्षा का शिकार है। कहने को तो यह खेल स्टेडियम है लेकिन देखने से चारागाह लगता है। आवारा पशु दिन भर इसमें घूमते रहते हैं। समय समय पर निर्माण संबधी जारी राशि भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। ऐसे में सरकारी मंशा कि हर प्रखंड में ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए एक खेल स्टेडियम होगा, अपने आप में सवालिया निशान यह स्टेडियम लगा रहा है।

जानकारी के अनुसार सातों अवंती गोडियारी के खेल स्टेडियम का निर्माण कार्य जब पहली बार नीतीश कुमार की सरकार बनी थी तभी हुआ था। तत्कालीन खेल मंत्री जनार्दन सिंह सिकरीवाल इसे मंजूरी देते हुए 13 लाख 37 हजार रुपये स्वीकृत किए थे। उक्त राशि से खेल स्टेडियम की चहारदीवारी का निर्माण कराया जाना था। उक्त राशि से चहारदीवारी कभी पूर्ण नहीं हो सकी। जो थोड़ा बहुत चहारदीवारी बनी भी उसमें भी घोर अनियमितता बरती गई। कुछ ही दिनों बाद चहारदीवारी ढहने लगी। वर्तमान समय में लगभग पूरी टूट चुकी है। स्टेडियम में आवारा पशु घूमते हैं। अभ्यास करते समय खिलाड़ियों को पशुओं को भगाना पड़ता है।

इसके बाद तत्कालीन सांसद जगदानंद सिंह ने 5 लाख रुपये जिम निर्माण के लिए तथा तत्कालीन विधायक अंबिका सिंह यादव ने 1.5 लाख रुपये मंच निर्माण के लिए दिया। जिम के लिए दो कमरे का निर्माण हुआ वह भी खराब गुणवत्ता की वजह से लगभग पूरी तरह से खंडहर हो चुका है। मंच भी धंस गया है। अभी पिछले दिनों ग्राम पंचायत की कार्यकारिणी द्वारा 40 लाख रुपये इसके पुर्ननिर्माण के लिए पास किया गया है, लेकिन इसका पुर्ननिर्माण कब तक होगा यह कोई ठीक नहीं। जबकि इस स्टेडियम में अभ्यास करते हुए कई युवा पुलिस और आर्मी में भर्ती हो चुके हैं। एक युवा नेशनल स्तर पर और कई युवा राज्य स्तर पर गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। क्या कहते हैं खिलाड़ी :-

खेल परिसर के नाम पर

केवल एक खुला मैदान

मैं एक बार नेशनल और चार बार राज्य स्तर पर खेल चुका हूं। हमलोगों के पास उपलब्ध संसाधन सीमित है। खेल परिसर के नाम पर केवल एक खुला मैदान है। यदि सरकार द्वारा समुचित व्यवस्था की जाती तो परिणाम और बेहतर होता। इस तरफ सरकार, जनप्रतिनिधि और न हीं अधिकारियों का ध्यान जा रहा है।

- कुमार रमन सिंह।

जिम का भवन भी खंडहर में हुआ तब्दील

अभ्यास करते समय आवारा पशुओं को भगाना पड़ता है। खेल स्टेडियम में सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। जिम का भवन भी खंडहर में तब्दील हो चुका है।-जतिन सिंह

अभ्यास के समय खिलाड़ियों को होती है परेशानी

यहां खेल स्टेडियम का केवल नाम है। खिलाड़ी तो खेलते हैं लेकिन स्टेडियम गायब है। केवल खुला मैदान। अभ्यास के समय काफी परेशानी होती है ।-सुमन यादव देखरेख के अभाव में बर्बाद हो रहा स्टेडियम

सरकार की खेल को बढ़ाने की नीति पर यह स्टेडियम सवालिया निशान लगा रहा है। प्रखंड का एक मात्र खेल स्टेडियम है। वह भी देखरेख के अभाव में बर्बाद हो रहा है। पशुओं के लिए चारागाह बनकर रह गया है स्टेडिम।

-नीरज पासवान

Edited By: Jagran