प्रखंड क्षेत्र के कई स्कूलों में आज भी लकड़ी व उपला पर एमडीएम बनाया जा रहा है। जबकि इन स्कूलों में रसोई गैस की सुविधा भी उपलब्ध करा दी गई है। प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय औखरा में एमडीएम बनाने के लिए एलपीजी की सुविधा उपलब्ध होने के बाद भी प्रतिदिन लकड़ी के सहारे भोजन बनाने का कार्य किया जा रहा है। एक तरफ सरकार के द्वारा जल जीवन हरियाली जैसे जन जागरूकता अभियान चलाकर पर्यावरण को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए प्रशासन की तरफ से जगह-जगह ज्यादा से ज्यादा संख्या में पौधों को लगाने का कार्य के अलावा पोखर आहर आदि को अतिक्रमण मुक्त कराने का कार्य भी हो रहा है। वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार के कर्मी के द्वारा ही इस अभियान को अंगूठा दिखाते हुए लकड़ियां जलाकर एमडीएम बनाने का कार्य किया जा रहा है। यहां बता दें कि जिला प्रशासन के द्वारा जिन विद्यालयों में एलपीजी की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है प्रशासन की तरफ से सख्त निर्देश है कि किसी भी स्थिति में लकड़ी पर एमडीएम नहीं बनाया जाएगा। बावजूद प्रशासन के इस निर्देश की अवहेलना की जा रही है। उत्क्रमित मध्य विद्यालय औखरा में जब रसोईयां मुनिया देवी, संजू कुंअर, सुनीता देवी ने बताया कि लगभग 25 दिन पहले गैस चूल्हा खराब हो गया था। तभी से लकड़ी पर भोजन बनाया जा रहा है। जब इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाध्यापक रवि कुमार रंजन से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि गैस चूल्हा खराब होने के कारण लकड़ी पर भोजन बनाया जा रहा है।

वहीं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी यदुवंश राम से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि जिन विद्यालयों में एलपीजी की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। वहां एलपीजी पर ही भोजन बनाने का निर्देश दिया गया है। यदि उत्क्रमित मध्य विद्यालय औखरा में लकड़ी के सहारे भोजन बनाया जा रहा है तो मैं इसकी जांच कराता हूं। यदि लकड़ी पर खाना बनाया जा रहा होगा तो एचएम से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

Posted By: Jagran

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