प्रोबेशन वाली अलका मैडम को मिली पेड छुट्टी, स्नेहा मैम की रुक गई सैलरी; बिहार में मेडिकल लीव पर 'डबल गेम'
कैमूर के भदौला स्थित एक विद्यालय में दो प्रोबेशनरी शिक्षिकाओं के चिकित्सा अवकाश मामले में विभाग द्वारा अलग-अलग नियम अपनाने का मामला सामने आया है।

प्रोबेशन अवधि में एक शिक्षिका को सवैतनिक अवकाश, दूसरी का भुगतान रोका (AI Generated Image)
HighLights
प्रोबेशनरी शिक्षिकाओं के चिकित्सा अवकाश पर विभाग की दोहरी नीति।
एक शिक्षिका को सवैतनिक अवकाश, दूसरी का वेतन रोका गया।
सरपंच ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से मामले की जांच की मांग की।
संवाद सूत्र, कुदरा। स्थानीय प्रखंड अंतर्गत राजकीयकृत मध्य विद्यालय, भदौला में कार्यरत दो शिक्षिकाओं के एक समान मामले में विभाग के द्वारा अलग-अलग नियम अपनाए जाने का मामला सामने आया है।
विद्यालय में प्रोबेशन अवधि में कार्यरत एक शिक्षिका को सवैतनिक चिकित्सा अवकाश (पेड मेडिकल लीव) दिया गया है, जबकि समान मामले में दूसरी शिक्षिका का भुगतान रोक दिया गया है।
संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच दिलीप सिंह ने मामले को लेकर गहरी आपत्ति जताते हुए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को आवेदन पत्र देकर समुचित जांच व कार्रवाई की मांग की है।
आवेदन में कहा गया है कि तीन वर्ष की प्रोबेशन अवधि में कार्यरत दो शिक्षिकाओं के मामले में नियमों के पालन में दोहरी नीति अपनाई गई।
अलका के लिए अलग नियम, स्नेहा के लिए अलग नियम?
आवेदन पत्र में दी गई जानकारी के मुताबिक राजकीयकृत मध्य विद्यालय भदौला में विशिष्ट शिक्षिका अलका पाठक तथा बीपीएससी शिक्षिका स्नेहा भट्ट कार्यरत हैं। दोनों शिक्षिकाएं स्वास्थ्य कारणों से चिकित्सा अवकाश पर गई थीं और दोनों ने नियमानुसार प्रधानाध्यापक को आवेदन दिया था।
पत्र में कहा गया है कि प्रधानाध्यापक द्वारा दोनों की अनुपस्थिति का विवरण विभाग को भेजते समय समान रूप से चिकित्सा अवकाश दर्शाया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामला बीईओ कार्यालय पहुंचने के बाद दोनों शिक्षिकाओं के साथ अलग-अलग व्यवहार किया गया।
आवेदन में कहा गया है कि तीन वर्ष की प्रोबेशन अवधि में रहने वाली विशिष्ट शिक्षिका अलका पाठक का चिकित्सा अवकाश स्वीकृत करने के साथ उनका वेतन भी कथित रूप से भुगतान कर दिया गया, जबकि बीपीएससी शिक्षिका स्नेहा भट्ट का वेतन भुगतान रोक दिया गया।
आवेदन में बिहार शिक्षा विभाग के नियमों और बीपीएससी, विशिष्ट शिक्षक नियमावली का हवाला देते हुए सवाल उठाया गया है कि तीन वर्ष की प्रोबेशन अवधि के दौरान चिकित्सा अवकाश किस प्रावधान के तहत स्वीकृत किया गया।
साथ ही यह भी पूछा गया है कि यदि प्रोबेशन अवधि में वेतन सहित चिकित्सा अवकाश दिया जा सकता है तो दूसरी शिक्षिका का वेतन क्यों रोका गया। शिकायतकर्ता ने मामले को सरकारी राशि और पद के दुरुपयोग से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए जांच की मांग की है।
आवेदन में संबंधित वेतन पंजी, अवकाश पंजी और संचिका की जांच कराने तथा दोषी कर्मी अथवा अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई के साथ सरकारी राशि की वसूली की मांग भी की गई है।
आवेदन में यह भी कहा गया है कि भविष्य में किसी शिक्षक के साथ मित्रता अथवा दुश्मनी के आधार पर वेतन भुगतान में भेदभाव न हो, इसके लिए स्पष्ट आदेश जारी किया जाए।
क्या कहते हैं पदाधिकारी?
मामला मेरे संज्ञान में है। समान प्रोबेशन अवधि में होने के बावजूद शिक्षिकाओं के भुगतान में विसंगति हुई है। किस स्तर पर गड़बड़ी हुई है, उसका पता लगाकर निराकरण किया जाएगा। - मुकेश कुमार, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, कुदरा
यह भी पढ़ें- बिहार में शिक्षकों को 'स्मार्ट' बनाएगा गूगल, AI से बदल जाएगा पढ़ाई का तरीका
यह भी पढ़ें- Bihar Teacher Transfer: बिहार में 26 जिलों के 42000 सरप्लस शिक्षकों का ट्रांसफर, सबको मिला मनपसंद स्कूल
